Stomach Surgery Case: पेट में मिले 13 पेन और लकड़ी के चम्मच, मेडिकल टीम ने बताया कैसे बची महिला की जान
महिला के पेट में 13 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती मिलने से डॉक्टर हैरान रह गए। सर्जिकल टीम ने ऑपरेशन कर सभी वस्तुएं बाहर निकालीं। जानिए पूरा मामला।
- महिला के पेट से निकले 13 पेन, 5 चम्मच और मोमबत्ती, डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर बचाई जान
- पेट दर्द की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंची महिला, जांच में पेट के अंदर मिले 13 पेन और चम्मच; डॉक्टर भी रह गए दंग
- Medical Miracle: महिला के पेट से 25 सेमी लंबे पेन, 5 चम्मच और मोमबत्ती सुरक्षित निकाली गई, हालत स्थिर
चिकित्सा जगत से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां डॉक्टरों की एक टीम ने सफल ऑपरेशन करते हुए एक महिला के पेट से 13 पेन, 5 लकड़ी के चम्मच और एक मोमबत्ती सुरक्षित बाहर निकाली है। महिला को असहनीय पेट दर्द और पाचन संबंधी गंभीर दिक्कतों के बाद अस्पताल लाया गया था। जांच के दौरान पेट के अंदर असामान्य ठोस वस्तुएं दिखने पर चिकित्सकों के होश उड़ गए, जिनमें एक पेन करीब 25 सेंटीमीटर लंबा था। मेडिकल टीम ने बिना देरी किए आपातकालीन शल्य प्रक्रिया को अंजाम दिया और महिला की जान बचाने में कामयाबी हासिल की। फिलहाल मरीज की हालत स्थिर है और डॉक्टर इस बात की जांच कर रहे हैं कि मरीज ने इन घातक वस्तुओं को कैसे और किस मानसिक अथवा शारीरिक स्थिति के चलते निगला।
एक महिला के उदर विकार की जांच के दौरान डॉक्टरों के सामने एक अत्यंत दुर्लभ और पेचीदा स्थिति उत्पन्न हुई। अस्पताल पहुंची महिला के पेट में जांच के दौरान भारी मात्रा में अखाद्य और खतरनाक वस्तुएं पाई गईं। ऑपरेशन के दौरान उसके आमाशय से तेरह प्लास्टिक व धातु के पेन, पांच लकड़ी के चम्मच और एक पूरी मोमबत्ती बरामद की गई। इनमें से एक पेन का आकार पच्चीस सेंटीमीटर तक लंबा था, जो आंतों या आमाशय की भीतरी दीवार को पूरी तरह चीर सकता था। सर्जनों की विशेषज्ञ टीम ने बेहद सावधानीपूर्वक प्रक्रिया अपनाते हुए महिला के पेट से इन सभी वस्तुओं को एक-एक कर बाहर निकाला। समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप मिलने से महिला को जीवनदान मिल गया है।
मरीज लंबे समय से पेट में मरोड़, भारीपन और असहजता की शिकायत महसूस कर रही थी। सामान्य तौर पर भोजन के अतिरिक्त कोई कंकड़ या छोटी अवांछित चीज भी गले से नीचे उतर जाए तो शरीर तुरंत गंभीर दर्द, उल्टी या दस्त जैसी प्रतिक्रिया देने लगता है। हालांकि, इस मामले में महिला लंबे अंतराल में इन धारदार व ठोस वस्तुओं को धीरे-धीरे निगलती रही। जब दर्द अत्यधिक असहनीय हो गया और तरल पदार्थ पचाना भी मुश्किल होने लगा, तब परिजनों द्वारा उसे अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया।
अस्पताल में डॉक्टरों ने पहले प्राथमिक परीक्षण किया और फिर पेट का अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे कराया। रेडियोलॉजी जांच की तस्वीरों में पेट के निचले हिस्से में अजीबोगरीब आकृतियां नजर आईं। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए डॉक्टरों ने आंतरिक क्षति का आकलन किया और पाया कि किसी भी पल पेट की अंदरूनी परत फट सकती थी, जिससे शरीर के भीतर जानलेवा संक्रमण यानी सेप्सिस फैलने का खतरा था। विशेषज्ञों के दल ने तत्काल आपातकालीन सर्जरी का निर्णय लिया। कई घंटों तक चले इस जटिल ऑपरेशन में डॉक्टरों ने बड़ी कुशलता से एक-एक वस्तु को निकाला ताकि आंतरिक अंगों को न्यूनतम नुकसान पहुंचे।
ऑपरेशन का नेतृत्व करने वाले मुख्य शल्य चिकित्सक ने बताया कि यह उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और अप्रत्याशित केस था। डॉक्टरों का कहना है कि पच्चीस सेंटीमीटर लंबे पेन और लकड़ी के चम्मचों का पेट में बने रहना किसी चमत्कार से कम नहीं है, क्योंकि आमतौर पर इतनी नुकीली चीजें पेट के संवेदनशील ऊतकों में छेद कर देती हैं। मनोचिकित्सकों और मेडिकल जानकारों के अनुसार, इस प्रकार की गैर-खाद्य वस्तुओं को खाने की प्रवृत्ति अक्सर 'पिका' (Pica) विकार या किसी गहरे मनोवैज्ञानिक तनाव का परिणाम होती है। अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शारीरिक घावों के भरने के साथ-साथ मरीज की मनोवैज्ञानिक काउंसलिंग भी कराई जाएगी, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना दोबारा न हो।
इस मामले ने चिकित्सा विशेषज्ञों के बीच पाचन तंत्र की सहनशीलता और मनोवैज्ञानिक विकारों के अंतर्संबंधों पर एक नई चर्चा शुरू कर दी है। सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से यह घटना परिवारों को यह संदेश देती है कि यदि घर का कोई सदस्य असामान्य व्यवहार या किसी वस्तु को मुंह में डालने की आदत प्रदर्शित करता है, तो उसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। समय रहते मनोचिकित्सक से परामर्श न लेने पर ऐसी आदतें आंतरिक अंगों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती हैं। इस सफल ऑपरेशन ने आधुनिक सर्जिकल तकनीकों और चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता पर आम जनता के भरोसे को और मजबूत किया है।
सर्जरी के बाद महिला को गहन चिकित्सा कक्ष से सामान्य वार्ड में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया जारी है। अगले कुछ दिनों तक उसके आंतरिक अंगों के उपचार और सामान्य पाचन क्रिया की बहाली पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी। पेट के अंदरूनी घावों के पूरी तरह भरने के बाद डॉक्टरों की टीम मरीज को मनोरोग विभाग के सुपुर्द करेगी। वहां विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि मरीज ने किन परिस्थितियों में इन वस्तुओं को निगला था, जिसके आधार पर दीर्घकालिक थेरेपी और दवाओं का निर्धारण किया जाएगा ताकि मरीज पूरी तरह सामान्य जीवन में लौट सके।
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