Amruta Fadnavis On Garba Controversy: गरबा में मुसलमानों के प्रवेश पर अमृता फडणवीस का बड़ा बयान, जानिए क्या कहा

Amruta Fadnavis on Garba: गरबा में मुसलमानों के प्रवेश विवाद पर अमृता फडणवीस ने दो टूक राय रखी है। उन्होंने गरबा को सभी का उत्सव बताते हुए शांतिपूर्ण सहभागिता का समर्थन किया।

By INA News Desk
Sep 9, 2026 - 11:52
10 Views
Amruta Fadnavis On Garba Controversy: गरबा में मुसलमानों के प्रवेश पर अमृता फडणवीस का बड़ा बयान, जानिए क्या कहा
  • गरबा में मुस्लिम प्रवेश विवाद पर अमृता फडणवीस की दो टूक: बोलीं- उत्सव सभी का, शांति से देखने में कुछ गलत नहीं 
  • Garba Muslim Entry Row: गरबा में मुस्लिम प्रवेश विवाद पर बोलीं अमृता फडणवीस, उत्सव को बताया सर्वसमावेशी 
  • Maharashtra News: गरबा में मुसलमानों की एंट्री विवाद पर अमृता फडणवीस का बयान, उत्सव को बताया सर्वसमावेशक

महाराष्ट्र में आगामी नवरात्रि के दौरान गरबा और डांडिया आयोजनों में गैर-हिंदुओं और विशेषकर मुस्लिम समुदाय के प्रवेश को लेकर छिड़ी सियासी बहस के बीच राज्य के उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी व सामाजिक कार्यकर्ता अमृता फडणवीस का बड़ा बयान सामने आया है। चंद्रपुर जिले के दौरे पर पहुंचीं अमृता फडणवीस ने इस विवाद पर स्पष्ट राय रखते हुए गरबा को एक सर्वसमावेशक और राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाने वाला उत्सव करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति शांतिपूर्ण तरीके से बिना कोई अव्यवस्था फैलाए इस सांस्कृतिक उत्सव को देखने या इसका आनंद लेने आता है, तो इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है। सत्तारूढ़ खेमे के ही कुछ नेताओं की ओर से प्रवेश प्रतिबंध की मांग के बीच उनके इस रुख ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। 

आगामी नवरात्रि पर्व को देखते हुए महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों में गरबा और डांडिया आयोजनों में प्रवेश नियमों को लेकर तीखी बयानबाजी चल रही है। कुछ दक्षिणपंथी संगठनों और सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के विधायक नितेश राणे द्वारा गरबा में मुसलमानों के प्रवेश पर रोक लगाने तथा पहचान पत्र की जांच अनिवार्य करने की मांग उठाई गई थी। इसी पृष्ठभूमि में चंद्रपुर के सबसे बड़े महाशिवलिंग मंदिर में आयोजित रुद्राभिषेक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं अमृता फडणवीस से पत्रकारों ने इस विवाद पर सवाल पूछा। इस पर उन्होंने किसी भी प्रतिबंधात्मक राजनीति से अलग हटते हुए त्योहारों को सामाजिक सौहार्द और एकजुटता का माध्यम बताया। 

विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब विश्व हिंदू परिषद और कुछ अन्य संगठनों ने नवरात्रि के दौरान डांडिया और गरबा पंडालों में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक लगाने की अपील की। इस मांग का समर्थन करते हुए भाजपा विधायक नितेश राणे ने सार्वजनिक मंचों पर कहा था कि पंडालों में केवल उन्हीं लोगों को प्रवेश मिलना चाहिए जो सनातन आस्था में विश्वास रखते हैं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या असामाजिक गतिविधियों को रोका जा सके। इसके समर्थन में पहचान पत्रों की जांच और तिलक लगाने जैसे सुझाव भी सामने आए।

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए अमृता फडणवीस ने स्पष्ट और संतुलित भाषा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि गरबा हमारा एक राष्ट्रीय उत्सव है और इसे पूरे देश में उत्साह के साथ मनाया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि किसी भी जाति या धर्म के लोग बिना किसी अराजकता के, मर्यादा और शांति के साथ इस आयोजन को देखने आते हैं, तो इसमें किसी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि वे नेताओं द्वारा दिए गए बयानों के राजनीतिक कारणों की गहराई में नहीं जाना चाहतीं, लेकिन उनका निजी मानना है कि उत्सव सभी को जोड़ने वाले होने चाहिए।

सार्वजनिक आयोजनों की मर्यादा पर चर्चा करते हुए उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि श्रद्धा और आस्था का पालन व्यक्तिगत रूप से घर के भीतर पूरी निष्ठा से किया जाना चाहिए, जबकि सार्वजनिक स्थलों पर सरकारी और अदालती नियमों का पालन अनिवार्य है। उन्होंने त्योहारों के दौरान बजने वाले तेज लाउडस्पीकर और डीजे के विषय पर भी बात रखी और कहा कि किसी भी उत्सव से समाज के अन्य लोगों या बीमार-बुजुर्गों को असुविधा नहीं होनी चाहिए, इसलिए तय समय-सीमा और ध्वनि मानकों का सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए। 

अमृता फडणवीस के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखी जा रही हैं। विपक्षी दलों के नेताओं का कहना है कि अमृता फडणवीस ने अपनी ही सरकार के कुछ नेताओं के विभाजनकारी बयानों के विपरीत एक परिपक्व और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने वाला विचार रखा है। वहीं, आयोजनों में सख्त जांच की मांग करने वाले समूहों का तर्क है कि पंडालों में सुरक्षा, मर्यादा और पारंपरिक शुचिता बनाए रखने के लिए नियमों की कड़ाई आवश्यक है। दूसरी ओर, गरबा उत्सव समितियों के कई आयोजकों ने कहा है कि स्थानीय प्रशासन की सुरक्षा गाइडलाइंस का पालन करते हुए वे सभी नागरिकों के लिए सुरक्षित और मर्यादित माहौल सुनिश्चित करने को प्राथमिकता देते हैं।

उपमुख्यमंत्री की पत्नी द्वारा सार्वजनिक मंच से सर्वसमावेशक संस्कृति की वकालत किए जाने से राज्य में चल रही ध्रुवीकरण की बहस को नया मोड़ मिला है। इस बयान से यह स्पष्ट संदेश गया है कि त्योहारों के उल्लास को कट्टरपंथी सीमाओं में बांधने के बजाय सामाजिक समन्वय के नजरिए से भी देखा जा सकता है। इसके अलावा, डीजे और ध्वनि प्रदूषण पर उनके संतुलित दृष्टिकोण ने गणेशोत्सव और नवरात्रि जैसे विशाल आयोजनों के दौरान नागरिक अनुशासन और स्थानीय नियमों के पालन की जरूरत को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

नवरात्रि का त्योहार नजदीक आते ही राज्य गृह विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है। संवेदनशील इलाकों में गरबा आयोजनों के दौरान शांति समिति की बैठकें आयोजित की जा सकती हैं, ताकि आयोजकों, स्थानीय नागरिकों और विभिन्न समुदायों के बीच संवाद बना रहे। प्रशासन का मुख्य जोर इस बात पर रहेगा कि त्योहार की आड़ में न तो कोई कानून-व्यवस्था की समस्या पैदा हो और न ही सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचे।

Also Read- मनौना धाम मे भीषण गर्मी की के कारण आरती तथा आशीर्वाद समय के समय मे हुआ परिवर्तन।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow