"बिकाऊ है वफादारी..." शिवसेना के बागी सांसदों पर क्यों भड़क गए आदित्य ठाकरे? जानें पूरा मामला

Maharashtra Politics: आदित्य ठाकरे ने उद्धव गुट छोड़कर जाने वाले बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन नेताओं की वफादारी बिकाऊ है। जानें पूरा मामला।

Jun 22, 2026 - 11:27
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"बिकाऊ है वफादारी..." शिवसेना के बागी सांसदों पर क्यों भड़क गए आदित्य ठाकरे? जानें पूरा मामला
आदित्य ठाकरे जनसभा को संबोधित करते हुए आक्रामक अंदाज में (Aaditya Thackeray addressing a rally in Maharashtra)
  • 'आपकी वफादारी बिकाऊ है': बागी सांसदों पर भड़के आदित्य ठाकरे, शिवसेना विवाद फिर गहराया
  • Aditya Thackeray On Rebel MPs: उद्धव गुट के बागी सांसदों पर बरसे आदित्य, लगाया वफादारी बेचने का आरोप
  • शिवसेना विवाद: बागी सांसदों पर बरसे आदित्य ठाकरे, कहा- 'आपकी वफादारी बिकाऊ है'

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर जुबानी तीर चलने तेज हो गए हैं। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने अपनी पार्टी छोड़कर विपक्षी खेमे में शामिल होने वाले बागी सांसदों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। मुंबई में आयोजित एक जनसभा के दौरान आदित्य ठाकरे ने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग संकट के समय पार्टी छोड़कर गए, उनकी 'वफादारी बिकाऊ है'। महाराष्ट्र में आगामी राजनीतिक समीकरणों और सांगठनिक मजबूती के बीच आए आदित्य ठाकरे के इस बयान ने राज्य के सियासी पारे को एक बार फिर बढ़ा दिया है। इस बयान के बाद अब उद्धव गुट और शिंदे गुट के नेताओं के बीच कड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है।

महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में शिवसेना के दोफाड़ होने के बाद से ही दोनों गुटों के बीच वर्चस्व की जंग जारी है। इसी क्रम में एक सार्वजनिक मंच से बोलते हुए युवा सेना प्रमुख आदित्य ठाकरे का गुस्सा बागी सांसदों पर फूट पड़ा। उन्होंने किसी का सीधा नाम लिए बिना उन सभी सांसदों और विधायकों को आड़े हाथों लिया जिन्होंने जून 2022 के विद्रोह और उसके बाद उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया था। आदित्य ठाकरे ने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि जो लोग पार्टी की साख और जनता के भरोसे पर चुनकर आए थे, उन्होंने निजी स्वार्थ के लिए अपनी निष्ठा को बेच दिया।

यह पूरा विवाद तब दोबारा गरमाया जब आदित्य ठाकरे महाराष्ट्र के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं और आगामी चुनावों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश भर रहे हैं। मुंबई और आसपास के इलाकों में पार्टी संगठन की बैठक को संबोधित करते हुए आदित्य ने अतीत के घटनाक्रमों को याद किया।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए कहा, "जो लोग हमारे साथ रहकर बड़े हुए, जिन्हें पार्टी ने मान-सम्मान और टिकट दिया, वे संकट आते ही दूसरी तरफ चले गए। इससे यह साफ होता है कि आपकी वफादारी बिकाऊ है।" आदित्य ठाकरे का इशारा उन सांसदों की तरफ था जिन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट का दामन थाम लिया था। ठाकरे ने यह भी दावा किया कि राज्य की जनता गद्दारी करने वाले इन नेताओं को कभी माफ नहीं करेगी और आने वाले चुनावों में उन्हें इसका करारा जवाब देगी।

संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया

आदित्य ठाकरे के इस तीखे हमले के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। एकनाथ शिंदे गुट (शिवसेना) के प्रवक्ताओं और नेताओं ने इस पर पलटवार करने में देर नहीं की।

  • शिंदे गुट का रुख: शिंदे गुट के नेताओं का कहना है कि उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी, बल्कि असली शिवसेना और बालासाहेब ठाकरे के विचारों को बचाया है। उन्होंने आदित्य ठाकरे के बयान को हताशा का प्रतीक बताया और कहा कि जनता के बीच आधार खोने के बाद अब उद्धव गुट केवल सहानुभूति बटोरने के लिए इस तरह की बयानबाजी कर रहा है।

  • उद्धव गुट का समर्थन: दूसरी ओर, उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेताओं ने आदित्य ठाकरे के बयान का खुलकर समर्थन किया है। संजय राउत समेत अन्य नेताओं का कहना है कि पार्टी की पीठ में छुरा घोंपने वालों का असली चेहरा समाज के सामने लाना जरूरी है।

  • विपक्ष एवं अन्य दल: महाविकास अघाड़ी (MVA) के अन्य सहयोगी दलों ने इस मामले पर संभलकर प्रतिक्रिया दी है, हालांकि उन्होंने माना कि दलबदल की राजनीति के कारण महाराष्ट्र के जनमत का अपमान हुआ है।

आदित्य ठाकरे के इस बयान का महाराष्ट्र की राजनीति पर गहरा असर देखने को मिल रहा है:

    1. कार्यकर्ताओं में नया जोश: इस आक्रामक बयानबाजी से उद्धव गुट के जमीनी कार्यकर्ताओं में एक नया उत्साह देखा जा रहा है, जिससे वे चुनावी मैदान में अधिक सक्रिय हो रहे हैं।

    2. ध्रुवीकरण तेज: शिवसेना के दोनों धड़ों के बीच का अंतर और ज्यादा बढ़ गया है, जिससे भविष्य में किसी भी तरह के समझौते या सुलह की गुंजाइश पूरी तरह खत्म नजर आती है।

    3. जनता के बीच विमर्श: 'वफादारी बनाम बगावत' की इस बहस से आम जनता के बीच भी राजनीतिक शुचिता को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं, जो आने वाले स्थानीय और राज्य स्तर के चुनावों में मतदान के पैटर्न को प्रभावित कर सकती हैं।

महाराष्ट्र की राजनीति इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर है। आदित्य ठाकरे का यह हमला दिखाता है कि उद्धव गुट अब बैकफुट पर रहने के बजाय सीधे आक्रमण की रणनीति अपना रहा है। आने वाले दिनों में आदित्य ठाकरे के राज्यव्यापी दौरों में ऐसे बयानों की धार और तेज होने की उम्मीद है। वहीं, शिंदे गुट भी विकास कार्यों और बालासाहेब की विरासत के नाम पर जनता के बीच जाकर इस नैरेटिव को काटने की कोशिश करेगा। साफ है कि महाराष्ट्र के सियासी मंच पर यह शह और मात का खेल अभी लंबा चलने वाला है।

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