Hardoi: हरदोई के डॉ॰ सुशील चन्द्र त्रिवेदी 'मधुपेश' तीन वर्ष के लिए अ. भा. साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद का 17वां राष्ट्रीय अधिवेशन रीवा (मध्य प्रदेश )में आयोजित हुआ जिसमें हरदोई जनपद के गौरव डॉ॰ सुशील चन्द्र त्रिवेदी"मधुपेश" को आगामी
हरदोई(अम्बरीष कुमार सक्सेना)
अखिल भारतीय साहित्य परिषद का 17वां राष्ट्रीय अधिवेशन रीवा (मध्य प्रदेश )में आयोजित हुआ जिसमें हरदोई जनपद के गौरव डॉ॰ सुशील चन्द्र त्रिवेदी"मधुपेश" को आगामी तीन वर्ष के लिए पुनः परिषद का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया गया , डॉ.पवन पुत्र बादल जी को राष्ट्रीय महामंत्री एवं परिषद के संगठन मंत्री का दायित्व मनोज कुमार को दिया गया।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. सुशील चन्द्र त्रिवेदी "मधुपेश" ने कहा कि भारतीय संस्कृति और सनातन व्यवस्था को सुरक्षित करने के उद्देश्य से इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। तीन दिवसीय कार्यक्रम में 9 पद्मश्री से सम्मानित महानुभावों ने भाग लिया। देश भर से आए लगभग 800 से ज्यादा साहित्यकारों ने सहभागिता की । डाॅ. मधुपेश जी ने कहा कि युवा भारतीय पढ़ें-लिखें और भारतीयता का विश्व में विकास हो। इस कार्यक्रम में बघेली साहित्य सहित सभी भाषाओं और बोलियों के साहित्यकारों को मंच प्रदान किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ही आत्मबोध से विश्वबोध की ओर है, जिसके द्वारा देश के सभी साहित्यकारों को एकता के सूत्र में पिरौना है।
3 दिवसीय अधिवेशन का उद्घाटन पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द जी ने किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि सत्य और साहित्य का सामंजस्य विज्ञान से भी बढ़कर है। इसलिए साहित्य का समाज में बड़ा योगदान है ।आत्म बोध से विश्वबोध की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा जो खुद को भूल जाता है उसे दुनिया भी भुला देती है। आत्म बोध जागृत न रहे तो समाज भटक जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की हर भाषा श्रेष्ठ है। भारत की हर भाषा में श्रेष्ठ साहित्यिक रचनाओं का भंडार है। इसलिए अखिल भारतीय साहित्य परिषद, सभी भाषाओं के साहित्य का आपस में अनुवाद करने की दिशा में काम करे, जिससे पूरे देश का साहित्य और अधिक समृद्ध हो सके।
महाराष्ट्र के वरिष्ठ साहित्यकार विश्वास महिपति पाटिल ने कहा कि समाज और साहित्य की नब्ज परखने के लिए सर्वे किए जाते हैं। आजकल मोबाइल में रील्स के प्रचलन ने पढ़ने की आदत को लगभग समाप्त कर दिया है। जो लोग सोने से पहले किताबें पढ़ते थे और अच्छी नींद आती थी लेकिन इस रील्स और मोबाइल के कारण लोग अनिद्रा के शिकार हो रहे हैं।
कार्यक्रम में पद्मश्री से सम्मानित अतिथियों ने अपने विचार व्यक्त किए। साहित्यकार कुमुद शर्मा ने कहा भारतीय साहित्य में वैदिक काल की बहुत प्रभुता रही है। हमने वेदों और उपनिषदों से लिए हुए ज्ञान को साहित्य द्वारा जनमानस तक पहुंचाया है , जिससे भारतीय समाज की आत्मा जीवित रही है।
जल संरक्षण के लिए 2020 में जल योद्धा पुरस्कार से सम्मानित उमाशंकर जी ने कहा कि पानी बनाया नहीं जा सकता, केवल बचाया जा सकता है। तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा क्योंकि आज पानी का बाज़ार बन गया है और गंगा यमुना की धरती पर भी जल बिक रहा है।
पद्मश्री जगदीश जी ने कहा कि सोशल मीडिया ने साहित्य की आत्मा को क्षति पहुंचाई है। युवाओं की पठन और लेखन की क्षमता घटती जा रही है जिससे स्व प्रेरणा और दिशा का अभाव दिखता है ।
समापन उद्बोधन अतुल लिमये जी सरसंघचालक कार्यवाह ने कला, मीडिया और शिक्षा जगत के समन्वय पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम का समापन भारत माता की जय के उद्घोष के साथ हुआ। देशभर से आए साहित्यकारों ने विंध्य की पावन भूमि को नमन किया और यहाँ की पुण्य गाथाओं को साहित्य के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया। उक्त जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से अखिल भारतीय साहित्य परिषद हरदोई के जिलाध्यक्ष डॉ ब्रह्म स्वरूप पांडेय एवं जिला महामंत्री श्री ईश्वर चंद्र वर्मा जी द्वारा दी गई।
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