Gomti Pustak Mahotsav 2026: गोमती पुस्तक महोत्सव में सजा ज्ञान का मंच, शुभांशु शुक्ला ने सुनाए अंतरिक्ष यात्रा के रोमांचक अनुभव
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत की ओर से आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव में मंगलवार को साहित्य, विज्ञान, समकालीन विमर्श
लखनऊ। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत की ओर से आयोजित गोमती पुस्तक महोत्सव में मंगलवार को साहित्य, विज्ञान, समकालीन विमर्श और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विषयों पर गहन चर्चा हुई। दिन की शुरुआत ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के प्रेरक संवाद से हुई। इसके बाद दोपहर के सत्र में नरेंद्र मोदी और बनारस से जुड़े विमर्श, बाल साहित्य और पर्यावरण संरक्षण पर चर्चा हुई, जबकि शाम को कवि सम्मेलन में कविता, स्मृतियों और हास्य-व्यंग्य ने माहौल को साहित्यिक रंग दिया।
- शुभांशु शुक्ला ने साझा किए अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव
विशेष संवाद सत्र ‘धरती से अंतरिक्ष तक सपनों की उड़ान’ में ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की पुस्तक ‘द सेकेंड ऑर्बिट’ का लोकार्पण उनके परिजनों के साथ संयुक्त रूप से हुआ। भारत के प्रथम अंतरिक्ष यात्री राकेश शर्मा ने वीडियो संदेश के माध्यम से शुभांशु शुक्ला की पुस्तक और उनकी अंतरिक्ष यात्रा की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं।
शुभांशु शुक्ला ने विद्यार्थियों के साथ अपने बचपन, शिक्षा, भारतीय वायुसेना में सेवा, प्रशिक्षण और अंतरिक्ष यात्रा के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने पर देश, शहर और सीमाएं दिखाई नहीं देतीं, बल्कि एक सुंदर और एकीकृत पृथ्वी नजर आती है। उन्होंने सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण, वैज्ञानिक प्रयोगों और अंतरिक्ष में जीवन से जुड़े अनुभवों की जानकारी भी विद्यार्थियों को दी।
अपने जीवन की यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनके समय का लखनऊ आज की तुलना में काफी अलग था और सुविधाएं भी सीमित थीं। वर्ष 2019 को अपने जीवन का निर्णायक मोड़ बताते हुए उन्होंने चयन की सूचना मिलने का अनुभव साझा किया। उन्होंने अपनी सफलता में परिवार, शिक्षकों और सहयोगियों के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने युवाओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और निरंतर मेहनत करने का आह्वान करते हुए कहा कि लखनऊ का युवा भी अंतरिक्ष यात्री बन सकता है।
उन्होंने कहा, “बड़ा सपना देखने से मत डरिए। कई बार जो सपना असंभव लगता है, वही जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि बन जाता है।”
- ‘मोदी का बनारस’ में दिखी नरेंद्र मोदी के जीवन और व्यक्तित्व की यात्रा
दोपहर के सत्र में आयोजित ‘शब्दों में मोदी, मोदी का बनारस’ में वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक अरविंद चतुर्वेदी से लेखक एवं संवादकर्ता शांतनु गुप्ता ने बातचीत की। अरविंद चतुर्वेदी ने नरेंद्र मोदी के बाल्यकाल से लेकर कार्यकर्ता, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री बनने तक की यात्रा के विभिन्न पड़ावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अलग-अलग चरणों में मिले अनुभवों और चुनौतियों ने उनके व्यक्तित्व, दृष्टिकोण और कार्यशैली को आकार दिया।
उन्होंने बनारस के साथ नरेंद्र मोदी के सामाजिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को भी रेखांकित किया। शांतनु गुप्ता ने कहा कि मोदी और बनारस का रिश्ता केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं है, बल्कि समय के साथ यह व्यापक सामाजिक और सांस्कृतिक जुड़ाव में बदल गया है।
- ‘साहित्य के कालजयी स्वर’ में बाल साहित्य और संस्कारों पर मंथन
‘साहित्य के कालजयी स्वर’ सत्र में राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत की ‘आधुनिक कालजयी बाल कहानियां’ शृंखला की रचनाओं के संदर्भ में बाल साहित्य की भाषा, बदलते परिवेश और संस्कारों पर चर्चा हुई। सत्र का संचालन पल्लवी विनोद ने किया।
साहित्यकार सूर्यनाथ सिंह ने कहा कि बच्चों के लिए लेखन करते समय उनके मन, रुचियों और परिवेश को समझना आवश्यक है। लेखिका क्षमा शर्मा ने कहा कि सोशल मीडिया और चैटजीपीटी के दौर में बच्चों की भाषा और जीवनशैली तेजी से बदल रही है। ऐसे में साहित्य के माध्यम से भाषा और संस्कार विकसित करना जरूरी है। सर्वेंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि बच्चों में नैतिक मूल्यों का विकास केवल पुस्तकों से नहीं, बल्कि परिवार और समाज के व्यवहार से भी होता है।
- ‘वनक्षेत्रों के वारिस’ में दुधवा की जैव विविधता पर संवाद
‘वनक्षेत्रों के वारिस’ सत्र में दुधवा वन्यजीव संरक्षित क्षेत्र की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण पर चर्चा हुई। संजय कुमार, IAS, डी.एन.एस. सुमन, IFS (सेवानिवृत्त) और शैलेंद्र सिंह ने अपने अनुभव साझा किए। सत्र का संचालन अरुण सिंह ने किया।
संजय कुमार ने दुधवा को उत्तर प्रदेश की शान बताते हुए इसकी जैव विविधता और वन्यजीव पर्यटन की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। डी.एन.एस. सुमन ने कहा कि दुधवा को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि प्राकृतिक संपदा और वन्यजीव संरक्षण की दृष्टि से देखा जाना चाहिए। शैलेंद्र सिंह ने कछुओं और अन्य जलीय जीवों पर अपने शोध अनुभव साझा करते हुए बताया कि भारत में कछुओं की लगभग 32 प्रजातियां हैं, जिनमें से 13 दुधवा क्षेत्र में पाई जाती हैं। उन्होंने इनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने पर जोर दिया।
- कविताओं ने जगाई बचपन की यादें, हास्य-व्यंग्य से गूंजा मंच
मंगलवार की शाम आयोजित कवि सम्मेलन में कविता, संवेदना, स्मृतियों और हास्य-व्यंग्य का रंग देखने को मिला। कवयित्री पद्मिनी शर्मा ने मां सरस्वती की वंदना से कवि सम्मेलन का शुभारंभ किया। इसके बाद कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से जीवन के विविध अनुभवों को श्रोताओं के सामने रखा।
कवि चेतन चर्चित ने घर और परिवार के महत्व को रेखांकित करते हुए बचपन की छुट्टियों और आज की जिंदगी के बीच का फर्क सहज अंदाज में प्रस्तुत किया। उनकी बात—“बचपन में छुट्टी होते ही घूमने जाने का मन करता था, लेकिन अब छुट्टी मिलते ही घर जाने का ख्याल आता है”—ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।
कवि राजेश अग्रवाल ने बचपन की निश्छल यादों और जीवन की सच्चाइयों को अपनी भावपूर्ण रचनाओं में पिरोया। उनकी प्रस्तुति पर सभागार तालियों से गूंज उठा।
शाम के सत्र में हास्य कवि शंभू शिखर ने समकालीन राजनीति और सामाजिक घटनाक्रम पर हास्य-व्यंग्य के तीखे तड़के से खूब मनोरंजन किया। उनकी चुटीली प्रस्तुतियों पर श्रोता ठहाके लगाते नजर आए। अन्य कवियों की रचनाओं ने भी शाम को साहित्यिक और मनोरंजक रंग प्रदान किया।
- बुधवार (16 सितंबर) को गोमती पुस्तक महोत्सव में साहित्य, विज्ञान और संगीत से सजेगा मंच
गोमती पुस्तक महोत्सव में बुधवार का दिन साहित्य, विज्ञान, रंगमंच और संगीत के नाम रहेगा। दिन की शुरुआत बच्चों और विद्यार्थियों के लिए रोचक एवं रचनात्मक गतिविधियों से होगी, जबकि शाम तक साहित्यिक संवाद, कविताओं और संगीत की प्रस्तुतियों से महोत्सव का मंच गुलजार रहेगा।
कार्यक्रमों की शुरुआत सुबह 10 से 10:45 बजे तक ‘बच्चों के संग दास्तानगोई’ से होगी। आस्था और तसनीम बच्चों को दास्तानगोई की रोचक दुनिया से परिचित कराएंगी। इसके बाद सुबह 11 से 11:45 बजे तक ‘रंगमंच: कल्पना और अभिनय’ विषय पर रंजीता और राहुल का सत्र आयोजित होगा।
दोपहर 12 से 12:45 बजे तक ‘फन विद साइंस’ में अभिषेक दास बच्चों को विज्ञान के दिलचस्प प्रयोगों और गतिविधियों से जोड़ेंगे। इसके बाद 12:45 से 1:15 बजे तक टीम राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय द्वारा ‘कविता पाठ कार्यशाला’ आयोजित की जाएगी।
दोपहर 2:30 से 3:15 बजे तक ‘लेखक से मिलिए: सृजन, साहित्य और संवेदना का संवाद’ कार्यक्रम होगा। इसके बाद 3:30 से 4:15 बजे तक यतींद्र मिश्र और मालिनी अवस्थी के बीच विशेष बातचीत होगी, जिसमें साहित्य, सृजन और संस्कृति से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जाएगी।
शाम 4:30 से 5:15 बजे तक ‘हिंदी दिवस पर विशेष कवि सम्मेलन—कविता के रंग, शब्दों के संग’ आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न कवि अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देंगे।
दिन का समापन शाम 6:30 से 7:30 बजे तक देवानंद की विशेष संगीतमय प्रस्तुति से होगा। संगीत के सुरों के साथ बुधवार का यह साहित्यिक और सांस्कृतिक सफर यादगार बनेगा।
What's Your Reaction?







