Special Article: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बजा भारत की कूटनीति का डंका 

भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स समूह के देशों का 18वां  शिखर सम्मेलन सितम्बर 12-13 2026 को संपन्न हुआ। भारत

By INA News Desk
Sep 16, 2026 - 11:47
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Special Article: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में बजा भारत की कूटनीति का डंका 

लेखक: मृत्युंजय दीक्षित

भारत की अध्यक्षता में आयोजित ब्रिक्स समूह के देशों का 18वां  शिखर सम्मेलन सितम्बर 12-13 2026 को संपन्न हुआ। भारत के दृष्टिकोण से 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन कई दृष्टियों से ऐतिहासिक रहा और अंतरराष्ट्र्रीय कूटनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीति का डंका बजा । इस सम्मेलन में कई परस्पर  विरोधी देश एक मंच पर दिखे और साझा घोषणापत्र सामने आया जिसे भारतीय कूटनीति की एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर बनकर उभरे। नई दिल्ली ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से वैश्विक समुदाय को शांति का संदेश तो दिया ही गया साथ ही पश्चिमी दादागिरी को भी कड़ा संदेश दिया गया। 

नई दिल्ली घोषणापत्र इस बात का प्रमाण है कि भारत ने “वसुधैव कुटुम्बकम” के मन्त्र और दबाव रहित स्वतंत्र विदेश नीति के बल पर विश्व की महाशक्तियों के साथ बेहतरीन संतुलन बनाया है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन केवल कूटनीतिक बैठकों का एक और सिलसिला नहीं था अपितु वैश्विक मंच पर भारत के बढ़ते कद राजनीतिक परिपक्वता और कूटनीतिक कौशल का एक स्वर्णिम अध्याय था। आज जब दुनियाभर के देश भू- राजनीतिक तनावों, महाशक्तियों के बीच गहरी होती खाई, बढ़ती दूरियों के बीच खिंचती रेखाओं और दो सक्रिय महायुद्धों के कारण होते ध्रुवीकरण से गुजर रहे हैं तब भारत ने बिखरे हुए और जटिल होते बहुपक्षीय मंच पर असाधारण संतुलन का परिचय दिया है। स्वाभाविक रूप से यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करिश्माई नेतृत्व व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी बढ़ती स्वीकार्यता के कारण ही संभव हो सका है। 
एक समय ब्रिक्स समूह में केवल चार सदस्य ही थे जिनकी संख्या अब 11 हो गई है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने हर मोर्चे पर अपने राष्ट्रीय हितों को साधते हुए वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाई है। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत की सफलताओं में ब्रिक्स घोषणापत्र में जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की स्पष्ट निंदा से लेकर आतंकवाद के सुरक्षित ठिकानों और सीमा पार आतंकी आवाजाही के खिलाफ कड़ी कार्यवाही के संकल्प को स्थान मिलने को मानाजा रहा है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर संयम और संवाद की अपील के साथ युद्ध रोकने, परमाणु जोखिम कम करने और विवादों का शांतिपूर्ण समाधान निकालने पर बल दिया जाना भी घोषणापत्र का महत्वपूर्ण अंश है। एकतरफा टैरिफ और व्यापार प्रतिबंधों को लेकर पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दिया गया।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में  फिलीस्तीन समस्या पर भी विचार किया गया और दो देश समाधान और 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फिलीस्तीन का समर्थन किया गया। ब्रिक्स घोषणापत्र में यह भी भारत की सफलता मानी जा रही है कि  ब्रिक्स नेताओं  ने आतंकवाद के सभी  प्रारूपों से निपटने की प्रतिबद्धता दोहराते हुए आतंकियों की सीमा पार आवाजाही को रोकने, आतंकवाद के वित्तपोषण के नेटवर्क को तोड़ने और सुरक्षित पनाहगाहों से निपटने की जरूरत पर बल दिया है यह इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अभी तक आतंकवाद के खिलाफ चीन का रवैया निराशाजनक रहा है।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में पहली बार संयुक्तराष्ट्र महासभा में सुधार पर बल दिया गया भारत- ब्राजील की बड़ी भूमिका का समर्थन किया गया। संयुक्तराष्ट्र महासभा में भारत की स्थायी सदस्यता पर चीन का समर्थन मिलने की सम्भावना बढ़ी है। सम्मेलन से पूर्व सम्भावना व्यक्त की गयी थी  कि ब्रिक्स देश अपनी एक करेंसी लाने पर विचार कर सकते हैं किंतु ऐसा नहीं हुआ अपितु सभी सदस्य देशों ने स्थानीय मुद्राओं में कारोबार को बढ़ावा देने पर बल दिया गया । ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के मध्य संवाद स्थापित होने को भी भारत सफलता माना जा रहा है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और यूएई के प्रिंस खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद की यह मुलाकात हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण मुलाकात मानी जा रही है। 
प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन को संबोधित करते हुए वैश्विक वयवस्था में बड़े बदलाव की चर्चा की और कहा कि जो देश वैश्विक आर्थिक विकास के संचालक हैं उन्हें इसे आकार देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए। दुनिया के भविष्य के नियम तय करने में हर देश की बराबर भूमिका होनी चाहिए। साइबर स्पेस, एआई,अंतरिक्ष, जैव प्रौद्योगिकी जैसी महत्वपूर्ण तकनीकें भविष्य के अवसर ही नहीं तय कर रहीं अपितु भविष्य के नियम भी तय कर रही हैं ऐसे में वैश्विक दक्षिण के देशों को दूसरे देशों के बनाए नियम मानने वाला नहीं, अपितु नियम बनाने वाला बनना होगा। 

सम्मेलन में वैश्विक शासन सुधार का 10 सूत्रीय रोडमैप बनाने का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया। सम्मेलन के समापन सत्र में ब्रिक्स का साझा लक्ष्य “सर्वजन हिताय” तय किया गया है। अंतिम सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानंमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ब्रिक्स का सहयोग सरकारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसमें उद्यमियों, किसानों, शोधकर्ताओं, महिलाओं, युवाओं और आम नागरिकों को भी शामिल किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री ने डिजिटल कृषि से संबंधित ब्रिक्स नेटवर्क का उल्लेख किया जिसका उद्देश्य एआई, भू-स्थानिक तकनीक और डिजिटल बुनियादी ढांचे को किसानों की जरूरतों से जोड़ना है। प्रधानमंत्री मोदी ने अंतिेम सत्र में सहयोग के चार स्तंभ बताए जिसमें लचीलापन, स्थिरता, नवाचार के अंतर्गत ब्रिक्स देशों के  स्टार्टअप को आपस में जोड़ने के लिए ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क बनाने का संकल्प लिया गया है। ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड का भी प्रस्ताव किया गया है। ब्रिक्स देशों में संक्रामक बीमारियों की समय रहते हुए पहचान और रोकथाम के लिए  ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाने पर भी सहमति बन गई है। छोटे कारोबारों को मजबूती देने के लिए ब्रिक्स  एमएसएमई  पोर्टल और ब्रिक्स कनेक्ट के माध्यम से कौशल, रोजगार व महिलाओं के लिए अधिक अवसर पैदा करने का संकल्प लिया गया है। ब्रिक्स समूह के देश अब समावेशी, टिकाऊ, लचीले और  स्मार्ट सिटी के निर्माण में भी एक दूसरे का सहयोग करेंगे। इसके लिए ब्रिक्स शहरी अनुसंधान एवं ज्ञान नेटवर्क एव ब्रिक्स शहरी गतिशीलता केंद्र की स्थापना होगी। वर्तमान समय में युद्धों के कारण आपूर्ति श्रृंखला बाधित हुई है अतः मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के लिए ब्रिक्स लाजिस्टिक सप्लाई चेन बनाने पर भी बात हुई जिससे सामान की आवाजाही को ज्यादा भरोसेमंद और मजबूत बनाने में सहयोग मिलेगा। ब्रिक्स देशों के मध्य पुरावशेषों व ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व वाली वस्तुओं को उनके मूल देशों को वापस किया जाएगा। कलाकारों और सांस्कृतिक क्षेत्र से जुडे़ लोगों का प्रशिक्षण होगा। ब्रिक्स संस्कृति महोत्सव से लेकर वेब बाजार ब्रिक्स थिएटर महोत्सव होंगे।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन नई दिल्ली- 2026 से भारत वैश्विक कूटनीति के केंद्र में  मजबूती से स्थापित हो गया है। वैश्विक शांति और संवाद के लिए दुनिया भारत की ओर देख रही है। भविष्य में  भारत और  ब्राजील संयुक्तराष्ट्र महासभा में बड़ी भूमिका में दिखाई दे सकते हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अतिथियों को भारतीय संस्कृति का दर्शन कराया गया तथा स्वदेशी शाकाहारी व्यंजन परोसे गए तथा भारतीय स्थानीय उत्पाद उपहार स्वरूप दिए गए। नई दिल्ली में आयोजित यह ब्रिक्स सम्मेलन अब तक सबसे सफल व स्मरणीय आयोजन माना जा रहा है जिसके सकारात्मक परिणाम अवश्यम्भावी हैं। 

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