जनपद में साइबर अपराध से निपटने के लिए चलाए जा रहे धरपकड़ अभियान के तहत पुलिस को उल्लेखनीय सफलता मिली है। जिलाधिकारी कार्यालय का बाबू बनकर पीड़ित से विरासत असलहा लाइसेंस के स्थानांतरण के नाम पर धोखाधड़ी करने वाले एक शातिर को साइबर थाना पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने पकड़े गए आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन और ठगी की गई रकम में से नौ हजार रुपये नकद बरामद किए हैं।
मामले का विवरण देते हुए पुलिस ने बताया कि कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम असिगांव निवासी शानू उर्फ हरिश्चन्द्र ने साइबर क्राइम थाने पर प्रार्थना पत्र दिया था। पीड़ित का आरोप था कि एक अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें फोन किया और खुद को जिलाधिकारी कार्यालय का कर्मचारी बताया। उसने विरासत में मिले असलहा लाइसेंस को आसानी से स्थानांतरित कराने का झांसा दिया और प्रक्रिया शुल्क के नाम पर दस हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी कर ली। ठगी का अहसास होने के बाद पीड़ित ने तुरंत पुलिस की शरण ली।
पीड़ित की तहरीर के आधार पर साइबर थाना पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम की विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर विवेचना शुरू की। विवेचना के क्रम में तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल के आधार पर आरोपी की पहचान पुख्ता की गई। इसके बाद साइबर पुलिस टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी अनूप कुमार, निवासी ग्राम भैंसामऊ, थाना बख्शी का तालाब, जनपद लखनऊ को घेराबंदी कर धर दबोचा।
तलाशी के दौरान आरोपी के कब्जे से ठगी के नौ हजार रुपये और वारदात में प्रयुक्त मोबाइल फोन जब्त किया गया। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ आवश्यक विधिक कार्यवाही करते हुए उसे न्यायालय के समक्ष पेश किया है। इस सफल कार्रवाई में साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक वहीद अहमद, निरीक्षक हरिनाथ, आरक्षी मोहम्मद जीशान तथा महिला आरक्षी प्रियंका की मुख्य भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अज्ञात फोन कॉल पर भरोसा करके सरकारी काम के नाम पर पैसे न भेजें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।