Hardoi News: बेटियां बोझ नहीं, बदलाव की पहचान: गुलामऊ स्कूल में धूमधाम से मना मीना दिवस
यूनिसेफ की परिकल्पना पर आधारित नौ वर्षीय बालिका मीना सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और जागरूकता की प्रतीक है। मीना
हरदोई। यूनिसेफ की परिकल्पना पर आधारित नौ वर्षीय बालिका मीना सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और जागरूकता की प्रतीक है। मीना प्रश्न पूछने में झिझकती नहीं, कमजोर वर्ग की आवाज उठाती है और परिवार, मित्रों तथा समाज की आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील रहते हुए सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहती है। बालिकाओं में आत्मविश्वास, सुरक्षा, समानता और नेतृत्व क्षमता विकसित करने के उद्देश्य से जनपद के सभी उच्च प्राथमिक विद्यालयों, संविलियन विद्यालयों एवं कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में मीना मंच का गठन किया गया है। प्रत्येक वर्ष 24 सितंबर को मीना दिवस मनाया जाता है।

इसी क्रम में गुरुवार को विकासखंड बावन के उच्च प्राथमिक विद्यालय गुलामऊ में मीना दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में मीना मंच की अध्यक्ष, कोषाध्यक्ष, सचिव, दो सदस्य तथा प्रत्येक कक्षा की पावर एंजेल ने केक काटकर सभी बच्चों में वितरित किया। इस दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया। जिला नोडल अधिकारी अभिषेक गुप्ता ने कहा कि मीना मंच केवल एक मंच नहीं, बल्कि बालिकाओं के आत्मविश्वास, सुरक्षा, समानता और सपनों को पंख देने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बालिका को अपनी बात कहने, अपने सपनों को चुनने और आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने कहा, “बेटियां बोझ नहीं, बदलाव की पहचान हैं। हर बालिका शिक्षित, सुरक्षित और आत्मनिर्भर बने—यही मीना दिवस का संदेश है। मीना की आवाज, हर बेटी की आवाज है।” कार्यक्रम में विद्यालय के प्रभारी प्रधानाध्यापक हरिहर सिंह, सुगमकर्ता शशि देवी, संध्या सिंह, इंदु गौतम, अनुराधा देवी, नीरज सत्यार्थी, वीरेंद्र सहित अभिभावक एवं विद्यार्थी मौजूद रहे। पूरे विद्यालय परिसर में मीना दिवस को लेकर उत्साह और उल्लास का माहौल रहा।
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