Hardoi News: 169 साल पुरानी धरोहर को JCB से ढहाने की कोशिश, राज्यमंत्री रजनी तिवारी के भाई समेत चार पर मुकदमा
बिलग्राम कस्बे में स्थित करीब 169 साल पुराने तहसील भवन को जेसीबी से क्षतिग्रस्त कराने के आरोप में उच्च शिक्षा
हरदोई। बिलग्राम कस्बे में स्थित करीब 169 साल पुराने तहसील भवन को जेसीबी से क्षतिग्रस्त कराने के आरोप में उच्च शिक्षा राज्यमंत्री रजनी तिवारी के भाई धर्मेंद्र कुमार अग्निहोत्री सहित चार लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए जेसीबी चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। यह पूरी घटना 30 अक्टूबर की शाम की बताई जा रही है। आरोप के अनुसार, बिलग्राम चौराहा निवासी धर्मेंद्र कुमार अग्निहोत्री जेसीबी लेकर पुराने तहसील परिसर पहुंचे और मशीन की मदद से ब्रिटिश कालीन इमारत के एक हिस्से को तुड़वाना शुरू कर दिया।
- 1857 में हुआ था ऐतिहासिक भवन का निर्माण
प्रशासनिक अभिलेखों के मुताबिक, इस ऐतिहासिक भवन का निर्माण वर्ष 1857 में प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौर में हुआ था। बाद में वर्ष 1962 में तहसील का कामकाज नए परिसर में स्थानांतरित कर दिया गया, जिसके बाद से यह पुराना ढांचा बंद पड़ा हुआ था। हालांकि कामकाज बंद होने के बावजूद यह परिसर सरकारी संपत्ति के रूप में सुरक्षित था।
परिसर में तोड़फोड़ की सूचना मिलने पर बिलग्राम तहसील के नायब नाजिर मुकेश यादव ने कोतवाली में लिखित तहरीर दी। तहरीर में स्पष्ट किया गया कि पुरानी तहसील सरकारी संपत्ति है और इसे बिना किसी विधिक प्रक्रिया के जानबूझकर भारी नुकसान पहुंचाया गया है। उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के निर्देश पर पुलिस ने तत्काल प्रभाव से मुकदमा पंजीकृत किया।
- टेंडर और बैनामे का दावा, प्रशासन ने नकारा
पुलिस के अनुसार, मामले में धर्मेंद्र कुमार अग्निहोत्री के अलावा ईशान पाल, महेंद्र पाल और जेसीबी चालक वीरेश यादव को नामजद किया गया है। जेसीबी मालिक सुशील पाल की मशीन को वीरेश यादव चला रहा था।
घटनास्थल पर मौजूद ईशान पाल और उनके पिता महेंद्र पाल ने दावा किया कि यह ध्वस्तीकरण धर्मेंद्र अग्निहोत्री के निर्देश पर किया जा रहा था। महेंद्र पाल का कहना था कि धर्मेंद्र ने उन्हें पुरानी इमारत के ध्वस्तीकरण का टेंडर मिलने और जमीन का बैनामा अपने नाम होने की बात कही थी। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसी किसी भी निविदा या निजी बैनामे की कोई प्रशासनिक अनुमति अस्तित्व में नहीं है। पूरी कार्रवाई फर्जी दावों के सहारे सरकारी संपत्ति हथियाने के उद्देश्य से की जा रही थी।
- चालक हिरासत में,
पुलिस ने जेसीबी चालक वीरेश यादव (निवासी जानकीपुरवा सेमरा) को हिरासत में ले लिया है और मशीन को कब्जे में लेकर विधिक जांच आगे बढ़ा दी है। बाकी नामजद आरोपियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।
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