Azam Khan Supreme Court - रिहाई के 40 मिनट बाद ED की गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे आजम खान के वकील, इसी हफ्ते होगी सुनवाई
सपा नेता आजम खान ने जेल से रिहाई के तुरंत बाद ED द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई गिरफ्तारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अदालत इसी हफ्ते सुनवाई करेगी।
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समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा नए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में की गई अपनी गिरफ्तारी के खिलाफ उच्चतम न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा खटखटाया है। वरिष्ठ अधिवक्ता निजाम पाशा ने सोमवार को शीर्ष अदालत के समक्ष इस मामले का उल्लेख करते हुए अति-शीघ्र सुनवाई का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर संज्ञान लेते हुए संकेत दिया है कि याचिका को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिका में ईडी की कार्रवाई की वैधानिकता और प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए गए हैं। आजम खान के विधिक दल का तर्क है कि जब अदालत से राहत मिल चुकी थी, तब राजनीतिक दुर्भावना और बिना उचित प्रक्रिया का पालन किए उन्हें दोबारा हिरासत में ले लिया गया।
- रिहाई के महज 40 मिनट बाद दोबारा शिकंजा
पूरा घटनाक्रम उस समय चर्चा में आया जब इलाहाबाद उच्च न्यायालय से 'डुअल पैन कार्ड' मामले में सजा पर रोक और जमानत मिलने के बाद आजम खान को रामपुर जेल से रिहा किया गया था। याचिका के अनुसार, 29 अक्टूबर को जेल से बाहर आने के महज 40 मिनट के भीतर ही ईडी के अधिकारियों ने उन्हें नए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया।
इस दौरान उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को भी उसी दिन रिहा किया गया था, लेकिन आजम खान को जेल परिसर के बाहर ही कुछ देर पूछताछ के बाद अपने साथ ले जाया गया। बाद में गाजियाबाद स्थित विशेष अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
- जौहर यूनिवर्सिटी और संपत्तियों से जुड़ा मामला
प्रवर्तन निदेशालय की यह ताजा कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण और उससे जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं व मनी लॉन्ड्रिंग की जांच से संबंधित बताई जा रही है। जांच एजेंसी का आरोप है कि ट्रस्ट और विश्वविद्यालय के निर्माण में संदिग्ध वित्तीय लेनदेन हुए हैं।
दूसरी ओर, आजम खान के पक्ष का कहना है कि उनके खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों में एक-एक कर नियमित जमानत मिलने के बाद उन्हें जेल से बाहर आने से रोकने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है। अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की इस हफ्ते होने वाली संभावित सुनवाई पर टिकी हैं, जहां गिरफ्तारी की वैधता और हिरासत के तौर-तरीकों की कानूनी समीक्षा होगी।
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