सपा नेता के कथित बयान पर सियासी उबाल: संवैधानिक पद पर बैठी महिला पर ओछी टिप्पणी, लोगों ने पूछा- क्या यही है समाजवाद?
हरदोई जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमवती पीके वर्मा पर सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शराफत अली की कथित विवादित टिप्पणी से सियासी घमासान छिड़ गया है। जानिए पूरा मामला और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं।
- Hardoi News: जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा पर सपा नेता शराफत अली की कथित अभद्र टिप्पणी, PDA के दावों पर उठे सवाल
- हरदोई में गरमाई सियासत: महिला जनप्रतिनिधि पर सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष के बिगड़े बोल, आरक्षण और सामाजिक पृष्ठभूमि पर विवाद
- Hardoi Politics: पूर्व जिलाध्यक्ष शराफत अली के वायरल बयान से विवाद, जिला पंचायत अध्यक्ष को लेकर की गई आपत्तिजनक टिप्पणी
By Vijay Laxmi Singh (Editor- In- Chief)
हरदोई जिले में एक निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के खिलाफ राजनीतिक बयानबाजी ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दी हैं
जिले के सर्वोच्च नागरिक और प्रथम संवैधानिक ओहदे पर आसीन एक महिला जनप्रतिनिधि की सामाजिक व पारिवारिक पृष्ठभूमि को निशाना बनाकर दिए गए इस कथित बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखा आक्रोश पैदा कर दिया है
क्या है वायरल बयान और पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, एक सार्वजनिक या संगठनात्मक बातचीत के दौरान सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष शराफत अली स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी कर रहे थे
स्थानीय जानकारों के मुताबिक, किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक मतभेद, नीतियों का विरोध और प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना पूरी तरह से वैध है। किंतु किसी निर्वाचित प्रतिनिधि, विशेषकर एक महिला के सम्मान, जातिगत पृष्ठभूमि अथवा पारंपरिक पारिवारिक कार्य को अपमानजनक संदर्भ में सार्वजनिक मंच पर घसीटना स्वस्थ राजनीति का हिस्सा नहीं हो सकता।
'PDA' के राजनीतिक दावों पर लगे गंभीर प्रश्नचिह्न
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव वर्तमान में पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक यानी 'PDA' के उत्थान को अपनी राजनीति का मुख्य आधार बता रहे हैं। पार्टी लगातार यह दावा करती है कि वह वंचित वर्गों और महिलाओं को मुख्यधारा में प्रतिनिधित्व देने के लिए प्रतिबद्ध है।
हरदोई के इस ताजा प्रकरण ने सपा के इस दावे को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि जब एक प्रमुख विपक्षी दल के जिम्मेदार पूर्व जिलाध्यक्ष स्तर के नेता पिछड़े व दलित वर्ग से आने वाली महिला जनप्रतिनिधि की प्रगति को नीचा दिखाने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं
अतीत में भी विवादित बयानों को लेकर घिरी है पार्टी
सपा नेताओं द्वारा महिलाओं अथवा महिला राजनीतिज्ञों को लेकर की गई असंवेदनशील टिप्पणियों का इतिहास काफी पुराना रहा है, जिसको लेकर पार्टी पूर्व में भी राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा आलोचना झेल चुकी है:
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मुलायम सिंह यादव (अप्रैल 2014): मुरादाबाद में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए दुष्कर्म के मामलों में फांसी की सजा के कानून पर बोलते हुए उन्होंने कहा था कि "लड़कों से गलतियां हो जाती हैं, क्या इसके लिए उन्हें फांसी दी जाएगी?" इस बयान पर देशव्यापी विरोध हुआ था।
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आजम खान (अप्रैल 2019): लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान रामपुर में भाजपा प्रत्याशी जया प्रदा को लेकर आजम खान ने एक चुनावी रैली में सार्वजनिक रूप से "खाकी अंडरवियर" वाली अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिसके बाद निर्वाचन आयोग ने उनके प्रचार पर प्रतिबंध तक लगा दिया था।
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अबू आसिम आजमी (2014): मुंबई में सपा नेता अबू आजमी ने सहमति या असहमति से शारीरिक संबंध और दुष्कर्म के मामलों में महिलाओं पर ही दोष मढ़ते हुए विवादित और प्रतिगामी टिप्पणी की थी, जिसकी व्यापक निंदा हुई थी।
हरदोई में यह बयान सामने आने के बाद सामाजिक संगठनों और महिला प्रतिनिधियों में भारी रोष व्याप्त है
मांग की जा रही है कि स्थानीय पुलिस-प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर विधिसम्मत जांच करे और संबंधित नेता के खिलाफ विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा और शुचिता का स्तर बना रहे।
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