हाथरस में आरटीआई कार्यकर्ता राजीव वार्ष्णेय ने पीएमओ की शिकायत निस्तारण प्रक्रिया पर उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग

हाथरस के आरटीआई कार्यकर्ता राजीव वार्ष्णेय ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजकर शिकायतों के निपटारे पर सवाल उठाए। आरटीआई से मांगी कार्रवाई की रिपोर्ट।

Jul 9, 2026 - 21:34
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हाथरस में आरटीआई कार्यकर्ता राजीव वार्ष्णेय ने पीएमओ की शिकायत निस्तारण प्रक्रिया पर उठाए सवाल, निष्पक्ष जांच की मांग
हाथरस के आरटीआई कार्यकर्ता ने प्रधानमंत्री कार्यालय की शिकायत प्रणाली पर खड़े किए सवाल, निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग

हाथरस जिले में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कार्यकर्ता एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन भेजकर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को भेजी जाने वाली गंभीर शिकायतों के निपटारे के तौर-तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया पर आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया कि ऊंचे स्तर पर की जाने वाली गंभीर और दस्तावेजी शिकायतों पर कोई स्वतंत्र या निष्पक्ष जांच नहीं बैठाई जा रही है। इसके बजाय, उन शिकायतों को सीधे उन्हीं संबंधित स्थानीय विभागों को वापस भेजकर केवल कागजी और औपचारिक रूप से उनका निस्तारण कर दिया जाता है, जिससे भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच पूरी तरह प्रभावित होती है। इसके साथ ही उन्होंने अब आरटीआई कानून का सहारा लेकर अपनी पुरानी शिकायतों पर हुई दैनिक प्रगति और फाइलों की नोटशीट से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज मांगे हैं।

जिला अध्यक्ष राजीव वार्ष्णेय ने पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने पूर्व में प्रधानमंत्री कार्यालय को साक्ष्यों और जरूरी सरकारी दस्तावेजों के साथ एक मुख्य शिकायत भेजी थी। उनका सीधा आरोप है कि उस शिकायत में जिन बड़े और गंभीर मुद्दों को उठाया गया था, उन पर स्थानीय प्रशासन या संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा कोई ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाया गया। इसी लचर प्रशासनिक रवैये के विरोध में उन्होंने अब दोबारा प्रधानमंत्री को संबोधित एक विस्तृत पत्र भेजा है, जिसमें पूरे मामले की एक स्वतंत्र और निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की अपील की गई है।

इस ज्ञापन में मुख्य रूप से एक बड़े उद्योग समूह से जुड़े अरुण गर्ग और अभय गर्ग पर गंभीर वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, इन व्यक्तियों पर कथित रूप से फर्जी दस्तावेज तैयार कर गलत तरीके से बड़ा बीमा क्लेम हड़पने, औद्योगिक क्षेत्र के भूखंडों का तय नियमों के विरुद्ध जाकर व्यावसायिक उपयोग करने, सरकारी जमीनों पर अवैध रूप से अतिक्रमण करने और औद्योगिक इकाइयों में विद्युत सुरक्षा के तय मानकों का पूरी तरह उल्लंघन करने के गंभीर आरोप हैं। आरटीआई कार्यकर्ता का दावा है कि इन सभी मामलों से जुड़े पुख्ता और अकाट्य साक्ष्य संबंधित विभागों के आला अधिकारियों को पहले ही सौंपे जा चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई संतोषजनक कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई है।

राजीव वार्ष्णेय ने अपने ज्ञापन के माध्यम से मांग की है कि केंद्र सरकार को प्रधानमंत्री कार्यालय में आने वाली देश भर की शिकायतों के निस्तारण की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र और पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए। यदि मामले गंभीर हों, तो उनकी जांच स्थानीय स्तर के अधिकारियों को सौंपने के बजाय सीधे सक्षम केंद्रीय जांच एजेंसियों के हवाले की जानी चाहिए। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस पूरे मामले में उन्होंने आरटीआई अधिनियम के तहत एक नया आवेदन दाखिल किया है, जिसके जरिए उन्होंने अपनी पुरानी शिकायत पर विभागों द्वारा की गई अब तक की कार्रवाई, फाइलों पर अधिकारियों द्वारा लिखी गई नोटशीट और अन्य संबंधित अभिलेखों की प्रमाणित प्रतियां मांगी हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन गंभीर मामलों पर सरकार और प्रशासन द्वारा जल्द ही कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया, तो वह न्याय पाने के लिए उपलब्ध सभी कानूनी रास्तों और न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

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