Hardoi: मा. हाईकोर्ट ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के गर्भपात की दी अनुमति
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हरदोई की 15 वर्षीय नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के 21 सप्ताह 2 दिन के
हरदोई/लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने हरदोई की 15 वर्षीय नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता के 21 सप्ताह 2 दिन के अनचाहे गर्भ को चिकित्सकीय रूप से समाप्त करने की अनुमति प्रदान की है। यह राहत समाधान अभियान एवं इंडिया पेस्टीसाइड्स लिमिटेड के संयुक्त प्रयास से संचालित “चुप्पी तोड़; हल्ला बोल” अभियान के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई विधिक सहायता के बाद संभव हो सकी।
मामले में हाईकोर्ट के अधिवक्ता ईशान गर्ग एवं प्राची आर्या द्वारा याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान एवं न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र समंत की खंडपीठ ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट पर विचार करते हुए गर्भपात की अनुमति दी।
न्यायालय ने King George's Medical University स्थित गांधी मेमोरियल एवं एसोसिएटेड हॉस्पिटल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रिया सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया है। साथ ही भ्रूण को सुरक्षित रखने के आदेश दिए गए हैं, ताकि डीएनए परीक्षण के माध्यम से अभियुक्त की संलिप्तता की पुष्टि की जा सके।
याचिका में बताया गया था कि पीड़िता मात्र 15 वर्ष की है और दुष्कर्म की घटना के परिणामस्वरूप हुए अनचाहे गर्भ के कारण मानसिक एवं सामाजिक कठिनाइयों का सामना कर रही है। पूर्व में गठित मेडिकल बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया था कि पीड़िता लगभग 21 सप्ताह 2 दिन के गर्भ से है तथा चिकित्सकीय प्रक्रिया के माध्यम से गर्भपात संभव है, हालांकि इसमें सामान्य चिकित्सकीय जोखिम एवं जटिलताएं भी निहित हैं।
मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर न्यायालय ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी, हरदोई को निर्देशित किया कि पीड़िता को एंबुलेंस के माध्यम से केजीएमयू, लखनऊ भेजा जाए, जहां एक से दो दिनों के भीतर आवश्यक चिकित्सीय प्रक्रिया पूरी कराई जाए।
न्यायालय ने अपने आदेश में पीड़िता के स्वास्थ्य, गरिमा और न्याय के अधिकार को सर्वोपरि मानते हुए यह निर्णय पारित किया। यह आदेश यौन अपराधों की पीड़ित नाबालिग बालिकाओं को समयबद्ध चिकित्सा एवं कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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