जंतर-मंतर हिंसा मामले में बड़ा खुलासा: FRS सिस्टम से 2,500 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों की पहचान
जंतर-मंतर हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में FRS तकनीक से बड़ा खुलासा हुआ है। छात्र प्रदर्शन में 2500 से ज्यादा आपराधिक रिकॉर्ड वाले संदिग्ध पहचाने गए।
- Jantar Mantar Violence: दिल्ली पुलिस की FRS तकनीक से बड़ा खुलासा, छात्र आंदोलन में शामिल मिले 2500 क्रिमिनल बैकग्राउंड वाले लोग
- जंतर-मंतर पर हिंसा फैलाने वालों की FRS से हुई पहचान, 2500 से ज्यादा आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोग पकड़े गए!
- जंतर-मंतर हिंसा में दिल्ली पुलिस का बड़ा खुलासा, FRS तकनीक से 2,500 आपराधिक पृष्ठभूमि के संदिग्धों की हुई पहचान
राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर हाल ही में छात्र आंदोलन और प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा व अव्यवस्था मामले में दिल्ली पुलिस की जांच में एक बड़ा खुलासा सामने आया है। दिल्ली पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए एडवांस फेसिअल रिकग्निशन सिस्टम (FRS) और सीसीटीवी फुटेज विश्लेषण के जरिए 2,500 से अधिक ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों की पहचान की गई है, जिनका पुराना आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज है। पुलिस जांच के अनुसार, नीट परीक्षा धांधली और अन्य मांगों को लेकर चल रहे शांतिपूर्ण छात्र प्रदर्शन में बाहरी असामाजिक तत्वों ने घुसपैठ कर स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश की थी। इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस अब चिह्नित व्यक्तियों के खिलाफ सत्यापन और विधिक कार्रवाई की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है।
दिल्ली का ऐतिहासिक जंतर-मंतर परिसर, जहां विभिन्न मुद्दों को लेकर नागरिक और छात्र संगठन शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराते हैं, हाल के दिनों में नीट पेपर लीक और अन्य मांगों को लेकर जारी प्रदर्शनों के दौरान हिंसक झड़पों का गवाह बना। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी नोकझोंक हुई और कानून व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न हो गई। घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने आधुनिक फॉरेंसिक व सर्विलांस तकनीकों की मदद से जांच शुरू की। पुलिस ने एफआरएस (Face Recognition System) के माध्यम से घटना स्थल के फुटेज को अपने नेशनल क्राइम डेटाबेस से मैच कराया, जिससे यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि प्रदर्शन के दौरान मौजूद हजारों लोगों में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग भी सक्रिय थे।
नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में विभिन्न छात्र संगठनों और समर्थकों ने जंतर-मंतर पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों ने सुरक्षा बेरिकेड्स तोड़े और पुलिस कर्मियों के साथ धक्का-मुक्की की, जिससे स्थिति अचानक तनावपूर्ण हो गई। माहौल बिगड़ने के बाद दिल्ली पुलिस ने इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों, ड्रोन कैमरों और मीडिया फुटेज के डेटा को एकत्र किया। इस एकत्रित विजुअल डेटा को दिल्ली पुलिस के विशेष डेटाबेस और FRS सॉफ्टवेयर के जरिए स्कैन किया गया। FRS तकनीक ने चेहरे के बायोमीट्रिक प्रोफाइल का मिलान पुलिस के आपराधिक रिकॉर्ड से किया, जिसमें 2,500 से अधिक ऐसे चेहरे सामने आए जिनका पूर्व में किसी न किसी आपराधिक मामले में रिकॉर्ड दर्ज है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन लोगों ने छात्रों के आंदोलन का फायदा उठाकर अशांति फैलाने की योजना बनाई थी।
इस खुलासे के बाद दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि पुलिस शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों का सम्मान करती है, लेकिन कानून व्यवस्था को हाथ में लेने या छात्रों के नाम पर हिंसा भड़काने वाले असामाजिक तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि FRS डेटा के आधार पर केवल प्रामाणिक साक्ष्यों के जरिए ही संदिग्धों तक पहुंचा जा रहा है और किसी भी निर्दोष छात्र को परेशान नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी छात्र संगठनों और नागरिक अधिकारों से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष होनी चाहिए और इस तकनीकी जांच के नाम पर वास्तविक मांगों को उठाने वाले युवाओं या निर्दोष छात्रों को बेवजह निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
जांच में FRS तकनीक के इस व्यापक इस्तेमाल और बड़े खुलासे का असर दिल्ली में कानून व्यवस्था के संचालन पर गहराई से पड़ा है। इस घटना ने सार्वजनिक प्रदर्शनों में घुसपैठ करने वाले असामाजिक तत्वों के खतरे को उजागर किया है, जिससे भविष्य में बड़े आयोजनों की सुरक्षा रणनीति में बदलाव देखा जा सकता है। पुलिस द्वारा FRS के इस्तेमाल से यह संदेश गया है कि भीड़ का हिस्सा बनकर कानून तोड़ने वाले अब आधुनिक तकनीक से बच नहीं सकते। हालांकि, इस खुलासे के बाद वास्तविक रूप से अपनी मांगें रख रहे छात्रों के बीच भी सतर्कता बढ़ी है ताकि उनके शांतिपूर्ण मंच का इस्तेमाल कोई बाहरी तत्व अपने राजनीतिक या आपराधिक हितों के लिए न कर सके।
दिल्ली पुलिस FRS द्वारा पहचाने गए सभी 2,500 से अधिक संदिग्धों की सूची और डेटा को संबंधित स्थानीय पुलिस स्टेशनों के साथ साझा कर रही है। आने वाले दिनों में इन चिह्नित व्यक्तियों के पतों का सत्यापन किया जाएगा और हिंसा में उनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संलिप्तता पाए जाने पर कानूनी समन या गिरफ्तारी की कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही, जंतर-मंतर और लुटियंस दिल्ली के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा गश्त बढ़ा दी गई है और भविष्य के प्रदर्शनों के लिए डिजिटल सर्विलांस के कड़े नियम लागू किए जा रहे हैं।
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