मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग: केरल विधानसभा ने पारित किया ऐतिहासिक प्रस्ताव, ऐसा करने वाला पहला राज्य
केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया है। ऐसा कदम उठाने वाला केरल देश का पहला राज्य बन गया है।
- चुनाव आयोग विवाद में केरल विधानसभा का बड़ा कदम: सीईसी ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव पास
- एसआईआर विवाद पर केरल विधानसभा में आर-पार: मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने की मांग पर सत्ता पक्ष और विपक्ष एकजुट
- निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और साख पर सवाल: केरल विधानसभा बनी सीईसी को हटाने का प्रस्ताव लाने वाली पहली विधानसभा
तिरुवनंतपुरम: देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जारी तीखे राजनीतिक विवाद के बीच केरल विधानसभा ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। केरल विधानसभा ने मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने और भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) की साख व पारदर्शिता बहाल करने की मांग वाला आधिकारिक प्रस्ताव पारित किया है। स्वतंत्र भारत के विधायी इतिहास में किसी राज्य की विधानसभा द्वारा देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की औपचारिक मांग वाला प्रस्ताव पारित करने का यह पहला मामला है।
सदन में यह प्रस्ताव पेश किए जाने के दौरान पक्ष और मुख्य विपक्षी दल दोनों ने इसका समर्थन किया। सदन ने इस बात पर जोर दिया कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव हैं और चुनाव प्रक्रिया की विश्वसनीयता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
- चयन समिति में चीफ जस्टिस को शामिल करने की मांग
पारित किए गए प्रस्ताव में केवल मुख्य निर्वाचन आयुक्त को पद से हटाने तक ही बात सीमित नहीं रखी गई, बल्कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में संरचनात्मक सुधार की भी मांग की गई है। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति करने वाली चयन समिति का पुनर्गठन किया जाए। समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने की मांग दोहराई गई है, ताकि संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता और निष्पक्षता पर जनविश्वास बना रहे।
- मतदाता सूची और एसआईआर प्रक्रिया पर गंभीर आपत्तियां
सदन में चर्चा के दौरान सदस्यों ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। यह आरोप लगाया गया कि प्रक्रियागत विसंगतियों और पारदर्शिता के अभाव के कारण देश भर में पात्र मतदाताओं के नाम कटने की आशंका पैदा हुई है। सदन का मानना था कि निर्वाचन आयोग द्वारा इस संदर्भ में उठाए गए कदमों से जनता और राजनीतिक दलों के बीच असंतोष बढ़ा है, जिसे दूर करने के लिए शीर्ष स्तर पर जवाबदेही तय होना आवश्यक है। हालांकि, सदन में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सदस्यों ने इस प्रस्ताव की विषय-वस्तु और भाषा पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई और इसमें संशोधन के प्रस्ताव रखे, जिन्हें बहुमत से खारिज कर दिया गया। संवैधानिक जानकारों का कहना है कि राज्य विधानसभा द्वारा पारित ऐसे प्रस्ताव केंद्र सरकार या संसद के लिए कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते, क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का अधिकार केवल संसद के दोनों सदनों द्वारा विशेष बहुमत से पारित महाभियोग (Impeachment) जैसी प्रक्रिया के जरिए ही राष्ट्रपति के पास है। इसके बावजूद, एक राज्य विधानसभा द्वारा इस तरह का औपचारिक प्रस्ताव पारित किया जाना केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर गहरा राजनीतिक व नैतिक दबाव बनाता है।
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