Asaduddin Owaisi on CEC: मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर असदुद्दीन ओवैसी का तीखा हमला, बोले- SIR का फैसला पूरी तरह गलत

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने एसआईआर (SIR) से जुड़े निर्णय को पूरी तरह गलत करार दिया।

By INA News Desk
Sep 27, 2026 - 13:31
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Asaduddin Owaisi on CEC: मुख्य चुनाव आयुक्त की निष्पक्षता पर असदुद्दीन ओवैसी का तीखा हमला, बोले- SIR का फैसला पूरी तरह गलत

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की कार्यप्रणाली और संवैधानिक भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हैदराबाद में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए उन्होंने निर्वाचन आयोग द्वारा लिए गए निर्णयों की निष्पक्षता पर आपत्ति जताई। इसके साथ ही ओवैसी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि चुनाव आयोग द्वारा लिया गया एसआईआर (SIR) संबंधी निर्णय पूरी तरह गलत और अनुचित था, जिसके दूरगामी परिणाम चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर पड़ सकते हैं।

संसदीय लोकतंत्र में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की अनिवार्यता को रेखांकित करते हुए एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक संस्था है, जिसकी जवाबदेही देश के संविधान और आम जनता के प्रति है। यदि आयोग के शीर्ष पद पर बैठे व्यक्ति की भूमिका या उसके द्वारा लिए गए नीतिगत निर्णयों पर राजनीतिक या प्रक्रियात्मक सवाल उठते हैं, तो यह सीधे तौर पर लोकतांत्रिक व्यवस्था की साख को प्रभावित करता है।

एसआईआर (SIR) निर्णय पर ओवैसी की मुख्य आपत्तियां

असदुद्दीन ओवैसी ने अपने बयान में एसआईआर से जुड़े फैसले की वैधानिकता और औचित्य पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी बड़े प्रशासनिक या चुनावी सुधार से जुड़े फैसले को लागू करने से पहले सभी राजनीतिक दलों और हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक होता है।

ओवैसी का कहना था कि बिना उचित आम सहमति और ज़मीनी हकीकत को समझे लिए गए निर्णय केवल प्रशासनिक जटिलताएं बढ़ाते हैं और इससे मतदाताओं के अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के कदमों से यह संदेश जाता है कि संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करने के बजाय एकतरफा दृष्टिकोण अपना रही हैं। सांसद ने इस फैसले की समीक्षा करने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को अधिक समावेशी बनाने की मांग उठाई।

मुख्य चुनाव आयुक्त की संवैधानिक भूमिका और तटस्थता का सवाल

संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला देते हुए ओवैसी ने कहा कि चुनाव आयोग को देश में बिना किसी भय या पक्षपात के चुनाव कराने का सर्वोच्च दायित्व सौंपा गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त की कुर्सी किसी भी राजनीतिक प्रभाव या सरकारी दबाव से सर्वथा मुक्त होनी चाहिए।

हैदराबाद के सांसद ने हाल के दिनों में चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया और उनके प्रशासनिक आचरण को लेकर उठ रहे सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर असाधारण टिप्पणियां की जाती हैं या संस्था की भूमिका को लेकर जनता में संदेह पैदा होता है, तो आयोग के नेतृत्व को अपने आचरण से यह सिद्ध करना चाहिए कि वे पूरी तरह निष्पक्ष हैं। ओवैसी ने कहा कि संस्थागत मर्यादा तभी बच सकती है जब आयोग अपने हर फैसले में पूर्ण पारदर्शिता और नियम-आधारित निष्पक्षता प्रदर्शित करे।

विपक्षी दलों की चिंताओं के साथ जुड़ाव

यह पहली बार नहीं है जब चुनावी प्रक्रियाओं और निर्वाचन आयोग के कदमों को लेकर विपक्षी दलों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। मतदाता सूची के संशोधन, चुनाव तिथियों के निर्धारण, आदर्श आचार संहिता के क्रियान्वयन और चुनावी सुधारों से जुड़े निर्णयों पर विभिन्न गैर-सत्तारूढ़ दल समय-समय पर अपनी चिंताएं व्यक्त करते रहे हैं।

असदुद्दीन ओवैसी के इस ताजा बयान ने चुनावी सुधारों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर जारी राष्ट्रीय बहस को एक बार फिर गरमा दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह आक्रामक रुख संसद और सार्वजनिक मंचों पर चुनावी तंत्र की जवाबदेही तय करने की मांग को और धार देगा।

लोकतांत्रिक संस्थाओं की साख बनाए रखने की आवश्यकता

अपने संबोधन के समापन पर एआईएमआईएम प्रमुख ने जोर देकर कहा कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की ताकत उसकी निष्पक्ष संस्थाओं में निहित है। यदि न्यायपालिका और निर्वाचन आयोग जैसी बुनियादी संस्थाओं की विश्वसनीयता पर आंच आती है, तो यह लोकतंत्र की नींव को कमजोर करता है।

उन्होंने चुनाव आयोग से आग्रह किया कि वह अपने विवादास्पद फैसलों का पुनर्मूल्यांकन करे और ऐसा कोई भी कदम उठाने से बचे जिससे आम नागरिकों और विभिन्न राजनीतिक दलों के मन में संस्था की निष्पक्षता को लेकर किसी तरह का अविश्वास पैदा हो।

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