India vs Pakistan Cricket: 'सिंधु जल समझौता रुक सकता है तो ICC कॉन्ट्रैक्ट क्यों नहीं?' पाकिस्तान से मैच खेलने पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान के खिलाफ क्रिकेट मैच खेलने पर केंद्र सरकार और बीसीसीआई पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सिंधु जल समझौते और आतंकवाद का हवाला देकर सवाल उठाए।
- India vs Pakistan Cricket: 'सिंधु जल समझौता रुक सकता है तो ICC कॉन्ट्रैक्ट क्यों नहीं?' पाकिस्तान से मैच खेलने पर भड़के असदुद्दीन ओवैसी
- भारत-पाक क्रिकेट पर असदुद्दीन ओवैसी का सरकार और BCCI पर हमला, बोले- क्या टीवी राइट्स की कमाई आतंकवाद से बड़ी है?
- Owaisi on Indo-Pak Match: पाकिस्तान के साथ मैच खेलने पर एआईएमआईएम प्रमुख ने उठाए सवाल, केंद्र की नीति पर लगाया दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप
- असदुद्दीन ओवैसी का तीखा बयान: 'जो देश आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा, उसके साथ क्रिकेट खेलकर पैसे कमा रहा BCCI'
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मंचों पर पाकिस्तान के साथ भारतीय टीम के मुकाबले को लेकर केंद्र सरकार और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) पर जोरदार हमला बोला है। ओवैसी ने भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले क्रिकेट मैचों की प्रासंगिकता पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का दावा करती है और सिंधु जल समझौते जैसी दशकों पुरानी संधियों पर सख्त कदम उठाती है, तो दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के अनुबंधों का हवाला देकर पाकिस्तान के साथ मैच खेलने की अनुमति कैसे दी जा सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में राष्ट्रीय स्वाभिमान पर व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दी जा रही है।
हैदराबाद में पत्रकारों से बातचीत के दौरान एआईएमआईएम प्रमुख ने दोनों देशों के बीच खेल संबंधों को लेकर सरकारी नीति में विरोधाभास होने का दावा किया। ओवैसी ने दो टूक शब्दों में कहा, "आप उनके (पाकिस्तान) साथ क्यों खेल रहे हैं? जब सिंधु जल समझौते को रोक दिया गया है, तो आईसीसी का कॉन्ट्रैक्ट कैसे ज़रूरी हो सकता है? आप बीसीसीआई को टीवी राइट्स के ज़रिए पैसे कमाने दे रहे हैं... आप उस देश के साथ क्यों खेल रहे हैं, जो अब भी आतंकवाद को बढ़ावा देता है?" उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।
- सिंधु जल समझौते की नजीर देकर नीति पर सवाल
ओवैसी ने अपने बयान में वर्ष 1960 के ऐतिहासिक सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) का विशेष रूप से उल्लेख किया। गौरतलब है कि भारत सरकार ने पाकिस्तान द्वारा सीमा पार प्रायोजित आतंकवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तकनीकी विवादों के समाधान में अड़ंगेबाजी के चलते इस संधि में मूलभूत संशोधन और समीक्षा की मांग करते हुए पड़ोसी मुल्क को औपचारिक नोटिस भेजा है। इस नीतिगत फैसले को देश भर में भारत के एक सख्त और कूटनीतिक जवाब के रूप में देखा गया था।
ओवैसी ने इसी पृष्ठभूमि को आधार बनाते हुए सरकार को घेरा। उनका तर्क था कि यदि देश की सुरक्षा, संप्रभुता और जनभावनाओं को ध्यान में रखकर छह दशक से अधिक पुरानी अंतरराष्ट्रीय जल संधि को पुनर्विचार के दायरे में लाया जा सकता है या उसके प्रावधानों को रोका जा सकता है, तो फिर क्रिकेट के मैदान पर आईसीसी के बहुपक्षीय अनुबंधों को रद्द क्यों नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि क्या क्रिकेट टूर्नामेंट से जुड़े व्यावसायिक अनुबंध देश के जल सुरक्षा और कूटनीतिक संप्रभुता से भी अधिक अनिवार्य और बाध्यकारी हैं।
- बीसीसीआई और टीवी राइट्स के वित्तीय गणित पर प्रहार
सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने क्रिकेट प्रशासन की वित्तीय व्यवस्था पर भी सीधा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत और पाकिस्तान के बीच खेले जाने वाले मैचों में भारी-भरकम प्रसारण अधिकार (ब्रॉडकास्टिंग राइट्स) और विज्ञापनों का वित्तीय तंत्र काम करता है। वैश्विक क्रिकेट बाजार में भारत-पाक का मुकाबला सबसे अधिक देखे जाने वाले और सबसे महंगे आयोजनों में गिना जाता है। इस एक मुकाबले से प्रसारणकर्ताओं, प्रायोजकों और क्रिकेट प्रशासकों को सैकड़ों करोड़ रुपये का मुनाफा होता है।
ओवैसी का आरोप है कि आम नागरिकों और सरहद पर तैनात जवानों के बलिदान के प्रति संवेदनशीलता दिखाने के बजाय, क्रिकेट के नाम पर व्यावसायिक मुनाफे को तरजीह दी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय सांस्कृतिक कार्यक्रम, व्यापारिक संबंध और कलाकारों के आदान-प्रदान पर पूर्ण पाबंदी लागू है, तो खेल के इस एक प्रारूप को टीवी राइट्स और विज्ञापन राजस्व के लिए अलग छूट क्यों मिल रही है।
- द्विपक्षीय श्रृंखलाओं पर रोक बनाम बहुपक्षीय टूर्नामेंट
भारत और पाकिस्तान के खेल संबंधों के इतिहास पर नजर डालें तो दोनों देशों के बीच 2012-13 के बाद से कोई भी द्विपक्षीय क्रिकेट श्रृंखला आयोजित नहीं हुई है। भारत सरकार की घोषित नीति रही है कि 'आतंक और खेल एक साथ नहीं चल सकते।' इसी नीति के तहत भारतीय टीम ने पाकिस्तान में जाकर खेलने से लगातार इनकार किया है, जिसके चलते हालिया टूर्नामेंटों में 'हाइब्रिड मॉडल' अपनाना पड़ा था जहां भारतीय टीम ने अपने मैच तटस्थ वेन्यू पर खेले।
हालांकि, केंद्र सरकार और खेल प्रशासकों का यह तर्क रहा है कि आईसीसी (ICC) और एशियाई क्रिकेट काउंसिल (ACC) जैसे बहुपक्षीय टूर्नामेंटों में भाग न लेने से भारतीय टीम पर अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतिबंध लगने और भारी वित्तीय दंड का खतरा रहता है। अंतरराष्ट्रीय खेल चार्टर के नियमों के तहत किसी बहुराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शामिल देश किसी विशिष्ट टीम के खिलाफ खेलने से एकतरफा इनकार नहीं कर सकते। यदि कोई देश बिना वैश्विक प्रतिबंध के ऐसा करता है, तो उसे वॉकओवर देना पड़ता है और टूर्नामेंट से बाहर होना पड़ सकता है।
ओवैसी के इस बयान के बाद खेल और राजनीति के अंतर्संबंधों पर एक बार फिर तीखी बहस छिड़ गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी ने इस बयान के जरिए राष्ट्रवाद और विदेश नीति के मुद्दे पर सरकार को उसी के तर्कों से घेरने की कोशिश की है।
एक वर्ग का मानना है कि जब पाकिस्तान से हर तरह का सीधा संवाद और द्विपक्षीय संबंध ठंडे बस्ते में हैं, तो क्रिकेट मैदान पर आमना-सामना होने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक विरोधाभासी संदेश जाता है। वहीं खेल विशेषज्ञों का मत है कि अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) और फीफा जैसे वैश्विक संगठनों की तरह आईसीसी में भी सदस्यों को अंतरराष्ट्रीय खेल संहिताओं का पालन करना पड़ता है, जिसे द्विपक्षीय कूटनीति से अलग रखा जाना चाहिए।
ओवैसी के इस कड़े बयान ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या भारत को बहुपक्षीय खेल आयोजनों में भी पाकिस्तान के खिलाफ पूर्ण बहिष्कार की नीति अपनानी चाहिए, या फिर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर खेलकर अपनी खेल श्रेष्ठता साबित करना ही उपयुक्त रणनीति है।
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