लखीमपुर खीरी मेडिकल कॉलेज में नौकरी के नाम पर लाखों की ठगी, सवालों के घेरे में प्राचार्य वाणी गुप्ता की भूमिका
लखीमपुर खीरी मेडिकल कॉलेज में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी का मामला सामने आया है। ड्राइवर पर आरोप लगा अलग हुईं प्राचार्य वाणी गुप्ता सवालों के घेरे में हैं।
लखीमपुर खीरी जिले के राजकीय मेडिकल कॉलेज में नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी के मामले में नया मोड़ आ गया है। इस पूरे प्रकरण में घिरीं मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉक्टर वाणी गुप्ता का बयान सामने आने के बाद प्रशासनिक और सार्वजनिक हलकों में विवाद और ज्यादा गहरा गया है। प्राचार्य ने इस पूरे मामले से खुद को अलग करते हुए सारा दोष अपने पूर्व चालक (ड्राइवर) पर मढ़ दिया है। उनका कहना है कि गलत आचरण और खराब व्यवहार के कारण उक्त चालक को पहले ही सेवा से मुक्त किया जा चुका है। हालांकि, इस सफाई के बाद भी पीड़ितों द्वारा लगाए गए आरोपों ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस मामले में शिकायत दर्ज कराने वाले पीड़ितों का दावा बेहद चौंकाने वाला है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने नौकरी पाने के लिए जो लाखों रुपये की नकद राशि दी थी, वह खुद प्राचार्य की मौजूदगी में उनके चालक को सौंपी गई थी। पीड़ितों के इस गंभीर दावे के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि यदि यह बात सच है, तो इतने बड़े पैमाने पर हो रहे पैसों के लेनदेन की जानकारी होने के बावजूद प्राचार्य ने समय रहते उचित कदम क्यों नहीं उठाया? प्रशासनिक हलकों में यह भी चर्चा है कि यदि चालक की गतिविधियां पहले से ही संदिग्ध थीं और उसे नौकरी से हटाया गया था, तो उसके खिलाफ पुलिस में आधिकारिक तौर पर शिकायत क्यों नहीं दर्ज कराई गई थी? इन अनुत्तरित सवालों ने प्राचार्य की भूमिका को भी संदेह के दायरे में ला दिया है।
इस पूरे प्रकरण की तह तक जाने के लिए अब स्थानीय पुलिस की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। पुलिस की विस्तृत जांच के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि शिकायतकर्ताओं के इन आरोपों में कितनी सच्चाई है और इस पूरे गिरोह में किसकी क्या भूमिका रही है। फिलहाल यह पूरा मामला गंभीर आरोपों और प्रशासनिक जवाबों के फेर में अटका हुआ है। कानून के जानकारों का कहना है कि जांच प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी भी एक पक्ष की जिम्मेदारी या दोष तय नहीं किया जा सकता। गौरतलब है कि इससे पहले वाणी गुप्ता हरदोई जिले के मेडिकल कॉलेज में भी तैनात रह चुकी हैं। हरदोई में उनके सेवाकाल के दौरान भी उनका कार्य-इतिहास और प्रशासनिक फैसले काफी विवादों और चर्चाओं में रहे थे, जिसे अब इस नए मामले से जोड़कर देखा जा रहा है।
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