Lucknow : ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के लिए जिलाधिकारियों को मिली जिम्मेदारी, सिर्फ सामान्य सरकारी काम करने की होगी इजाजत
पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने बताया कि कानून में यह व्यवस्था है कि अगर किन्हीं खास वजहों से या जनता के भले के लिए समय पर चुनाव कराना संभव न हो, तो सरकार या उसकी तरफ से तय अधिकारी किसी समिति या प्रशासक को नियुक्त कर सकते
उत्तर प्रदेश में पिछले पंचायत चुनाव के बाद बनी ग्राम पंचायतों का पांच साल का समय पूरा हो रहा है। राज्य के पंचायत कानून के मुताबिक कोई भी ग्राम पंचायत अपनी पहली बैठक से पांच साल तक ही काम कर सकती है। इसी तरह पंचायत के सदस्यों का समय भी पंचायत के साथ ही खत्म हो जाता है।
पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव अनिल कुमार ने बताया कि कानून में यह व्यवस्था है कि अगर किन्हीं खास वजहों से या जनता के भले के लिए समय पर चुनाव कराना संभव न हो, तो सरकार या उसकी तरफ से तय अधिकारी किसी समिति या प्रशासक को नियुक्त कर सकते हैं। यह व्यवस्था ज्यादा से ज्यादा छह महीने के लिए की जा सकती है। इसी नियम के तहत अब नई पंचायतों की पहली बैठक होने तक या अधिकतम छह महीने के लिए पुराने ग्राम प्रधानों को ही गांवों का प्रशासक बनाने का फैसला लिया गया है।
पंचायतों का समय पूरा होने के अगले दिन से पुराने ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में सिर्फ रोजमर्रा के सामान्य काम संभालने के लिए नाम तय करने का अधिकार संबंधित जिले के जिलाधिकारी को दे दिया गया है। ये प्रशासक अपनी मर्जी से नीति से जुड़ा कोई बड़ा फैसला नहीं ले सकेंगे। बहुत जरूरी या विशेष परिस्थितियों में अगर नीति से जुड़ा कोई फैसला लेना होगा, तो उसका प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए जिलाधिकारी के पास भेजा जाएगा और उनकी मंजूरी मिलने के बाद ही काम हो सकेगा।
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