Lucknow News: लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने 5,826 मीटर ऊंची माउंट रुद्रगैरा पर फहराया तिरंगा, अब एवरेस्ट पर नजर

लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने 5,826 मीटर ऊंची माउंट रुद्रगैरा चोटी पर तिरंगा फहराया। 'पीक्स एंड प्लास्टिक' के जरिए स्वच्छता का संदेश देने वाली पूर्वा का अगला लक्ष्य माउंट एवरेस्ट है।

By INA News Desk
Sep 13, 2026 - 21:36
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Lucknow News: लखनऊ की पर्वतारोही पूर्वा धवन ने 5,826 मीटर ऊंची माउंट रुद्रगैरा पर फहराया तिरंगा, अब एवरेस्ट पर नजर

  • साहस और पर्यावरण का संगम: लखनऊ की बेटी पूर्वा धवन ने रुद्रगैरा चोटी की फतह, ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ से दिया स्वच्छता संदेश

  • माउंट रुद्रगैरा पर लहराया तिरंगा: 1300 मीटर की सीधी चढ़ाई कर पूर्वा धवन ने रचा इतिहास, सीएम योगी से मिली थी प्रेरणा

  • पर्वतारोही पूर्वा धवन की बड़ी उपलब्धि: गंगोत्री से रुद्रगैरा तक का कठिन सफर पूरा, 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का बढ़ाया मान

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की युवा पर्वतारोही पूर्वा धवन ने उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में स्थित 5,826 मीटर (लगभग 19,114 फीट) ऊंची माउंट रुद्रगैरा चोटी पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर राज्य और देश का नाम रोशन किया है। बेहद दुर्गम चट्टानी रास्तों, बर्फीले ढलानों और अत्यधिक कम ऑक्सीजन की चुनौतियों का सामना करते हुए पूर्वा 10 सितंबर 2026 को दोपहर 12:30 बजे इस दुर्गम शिखर पर पहुंचीं। महिला सशक्तीकरण और पर्यावरण संरक्षण का दोहरा संकल्प लेकर निकलीं पूर्वा का अगला लक्ष्य अब दुनिया के सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) पर तिरंगा फहराना है।

पूर्वा धवन ने अपने इस साहसिक अभियान की सफलता को अपने परिवार के निरंतर समर्थन, मार्गदर्शकों के तकनीकी मार्गदर्शन और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिली प्रेरणा को समर्पित किया है। पूर्वा ने बताया कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल एक भौगोलिक ऊंचाई को छूना नहीं था, बल्कि समाज में बेटियों के सामर्थ्य को स्थापित करना और हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना भी था।

सीएम योगी से मिला प्रोत्साहन बना सबसे बड़ी ताकत

पूर्वा के पर्वतारोहण सफर में एक महत्वपूर्ण पड़ाव मई 2018 में आया था, जब उन्होंने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से शिष्टाचार भेंट की थी। उस दौरान पूर्वा ने मुख्यमंत्री को ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ अभियान से जुड़ा बैनर सौंपा था। मुख्यमंत्री ने पूर्वा के अदम्य साहस की सराहना करते हुए उन्हें हरसंभव प्रोत्साहन और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी थीं।

पूर्वा का कहना है कि उस मुलाकात के दौरान मिले सकारात्मक शब्दों ने उनके भीतर पहाड़ों की कठिन चुनौतियों से जूझने का हौसला भरा। जब भी ऊंचाई पर बर्फीली हवाओं और थकावट के कारण कदम डगमगाते हैं, तो वह प्रेरणा शक्ति बनकर आगे बढ़ने की ऊर्जा देती है।

गंगोत्री से बेस कैंप और फिर अंतिम 1,300 मीटर की सीधी चढ़ाई

माउंट रुद्रगैरा पर विजय पाने का यह अभियान शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर कड़ी परीक्षा लेने वाला था। पूर्वा ने अनुभवी पर्वतारोही शैलेश सेमवाल और बिहारी सिंह राणा के तकनीकी मार्गदर्शन में गंगोत्री में उच्च तुंगता (हाई-एल्टीट्यूड) का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया।

अभियान की शुरुआत 7 सितंबर की सुबह 9 बजे गंगोत्री से हुई। दो दिनों तक ऊबड़-खाबड़ रास्तों, संकरी पगडंडियों और पत्थरों से भरी घाटियों से होकर गुजरते हुए टीम 4,350 मीटर की ऊंचाई पर स्थित रुद्रगैरा बेस कैंप पहुंची। बेस कैंप में मौसम के अनुकूल खुद को ढालने के बाद 10 सितंबर को तड़के सुबह चार बजे ‘समिट पुश’ (शिखर की ओर अंतिम चढ़ाई) का निर्णय लिया गया।

सुबह चार बजे से शुरू हुई यह अंतिम चढ़ाई बेहद जोखिम भरी थी। बेस कैंप से चोटी तक लगभग 1,300 मीटर की सीधी चढ़ाई थी, जिसमें खड़ी बर्फ, दरारें (क्रेवासेस) और अस्थिर चट्टानी हिस्से शामिल थे। लगभग आठ घंटे 30 मिनट तक लगातार कठिन परिस्थितियों से जूझते हुए टीम ने दोपहर 12:30 बजे 5,826 मीटर की ऊंचाई पर पहुंचकर राष्ट्रीय ध्वज स्थापित किया।

‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ से स्वच्छ हिमालय की अलख

पूर्वा धवन केवल चोटियों को नापने तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वह संवेदनशील पर्वतीय पारिस्थितिकी को लेकर भी सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने इस अभियान के तहत ‘पीक्स एंड प्लास्टिक’ नामक विशेष पहल चलाई है। इस पहल के जरिए वह पर्वतारोहियों और पर्यटकों के बीच पहाड़ों में बढ़ते प्लास्टिक कचरे के निस्तारण और जिम्मेदार पर्यटन का संदेश दे रही हैं।

पूर्वा का स्पष्ट मानना है कि साहसिक अभियानों के दौरान हिमालय की जैव विविधता को नुकसान नहीं पहुंचना चाहिए। हिमालय की चोटियों पर विजय प्राप्त करना जितना गौरव का विषय है, उससे कहीं अधिक महत्वपूर्ण इन प्राकृतिक धरोहरों को स्वच्छ, सुरक्षित और प्लास्टिक-मुक्त बनाए रखना है। उन्होंने अपने पूरे ट्रैक के दौरान कचरा प्रबंधन के नियमों का कड़ाई से पालन किया और अन्य ट्रेकर्स को भी इसके लिए प्रेरित किया।

अगला पड़ाव: 8,848.86 मीटर ऊंचा माउंट एवरेस्ट

माउंट रुद्रगैरा की सफल चढ़ाई पूर्वा के बड़े पर्वतारोहण करियर का एक महत्वपूर्ण तकनीकी पड़ाव है। तकनीकी दृष्टि से रुद्रगैरा को एवरेस्ट और अन्य 8,000 मीटर से ऊंची चोटियों की तैयारी के लिए सबसे मुफीद और चुनौतीपूर्ण परीक्षण माना जाता है।

रुद्रगैरा पर तिरंगा फहराने के बाद पूर्वा ने अब पूरी तरह से माउंट एवरेस्ट फतह करने के अपने मिशन पर ध्यान केंद्रित कर दिया है। उनका अंतिम सपना दुनिया की सबसे ऊंची छत पर भारत का तिरंगा लहराकर यह साबित करना है कि अगर सही अवसर और प्रोत्साहन मिले तो भारत की बेटियां दुनिया के किसी भी मुकाम को हासिल कर सकती हैं।

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