Lucknow : गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, सिख गुरुओं के बलिदान को याद किया

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्य को कोई झुठला नहीं सकता। गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। वर्ष 2020 और 2021 में प्रदेश सर

Nov 25, 2025 - 23:44
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Lucknow : गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, सिख गुरुओं के बलिदान को याद किया
Lucknow : गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर योगी आदित्यनाथ ने दी श्रद्धांजलि, सिख गुरुओं के बलिदान को याद किया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी दिवस पर विशेष गुरुमति समागम में हिस्सा लिया। डीएवी डिग्री कॉलेज के मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के सामने माथा टेकाया। सिख गुरु परंपरा के नौवें गुरु तेग बहादुर के बलिदान को नमन करते हुए उन्होंने राज्य सरकार और प्रदेश के लोगों की ओर से श्रद्धांजलि दी।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज हम गुरु तेग बहादुर, भाई मतिदास, भाई सती दास और भाई दयाला दास की शहादत को याद कर रहे हैं। यह अवसर उन महान व्यक्तियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का है।गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस हमें प्रेरणा देता है। उनके समय क्रूर शासक औरंगजेब मनमानी कर रहा था। वह देश भर में धर्म बदलने की मुहिम चला रहा था। तिलक मिटाने और जनेऊ समाप्त करने के लिए उसने अत्याचार किए।कश्मीर में उसके अत्याचार चरम पर पहुंच गए थे। वहां उसके अधिकारी शेर अफगान खान अत्याचार कर रहा था। कश्मीरी पंडित कृपा राम को कहीं शरण न मिलने पर उन्होंने गुरु तेग बहादुर के पास मदद मांगी।गुरु गोबिंद सिंह उस समय गुरु तेग बहादुर के साथ थे। उन्होंने गुरु और पंडित कृपा राम की बात सुनकर कहा कि किसी बड़े व्यक्ति को बलिदान देना पड़ेगा, तो गुरु से बड़ा कौन है। गुरु तेग बहादुर ने उस अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई। उन्हें कैद कर लिया गया। भाई मतिदास को आरी से चीर दिया गया। भाई सती दास को रुई में लपेटकर जला दिया गया। भाई दयाला दास को उबलते पानी में डालकर शहीद कर दिया गया।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गुरु तेग बहादुर ने सारी यातनाओं के बावजूद अपने धर्म और संकल्प से समझौता नहीं किया। इतिहास के उन क्रूर पलों को याद करने पर लगता है कि गुरु परंपरा ने न केवल यातनाएं सहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर क्रूरता का जवाब देने के लिए खुद को तैयार भी किया। गुरु गोबिंद सिंह ने नौ साल की उम्र में अपने गुरु और पिता को खोया। उनके चार साहिबजादे सनातन की रक्षा के लिए बलिदान हो गए। गुरु गोबिंद सिंह शहीद पिता के पुत्र और शहीद पुत्रों के पिता थे। दुनिया में ऐसे उदाहरण बहुत कम हैं।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अयोध्या गए थे। उन्होंने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर भगवा ध्वज फहराया। यह वही भगवा ध्वज है जिसकी रक्षा के लिए सिख गुरुओं ने पीढ़ी दर पीढ़ी अपना बलिदान दिया। सन् 1510 से 1515 के बीच प्रथम गुरु नानक देव अयोध्या धाम में भगवान राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन के लिए आए थे। सन् 1528 में आक्रांता बाबर के सेनापति ने मंदिर तोड़ दिया। बाबर के अत्याचार देखकर गुरु नानक देव ने उसे जाबर कहकर कृत्यों का विरोध किया। श्रीराम जन्मभूमि के संघर्ष में सिख गुरु, योद्धा, निहंग, संत, राजा और आम नागरिक पीछे नहीं हटे।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या के बारे में याद रखें कि कई साम्राज्य और पीढ़ियां आईं-गईं, लेकिन आस्था अटल रही। यही आस्था 500 साल बाद श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण की गवाह बनी। वही आस्था आज गुरु तेग बहादुर के शहीदी दिवस पर दिख रही है। 350 साल बाद भी हर सिख और सनातनी गुरु तेग बहादुर, भाई मतिदास, भाई सती दास और भाई दयाला दास के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर आस्था जता रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्य को कोई झुठला नहीं सकता। गुरु गोबिंद सिंह के चार साहिबजादों को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिला। वर्ष 2020 और 2021 में प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री आवास पर उनके शहीदी को समर्पित कार्यक्रम आयोजित किए। प्रधानमंत्री ने 26 दिसंबर को वीर बाल दिवस घोषित कर चारों साहिबजादों की स्मृति को जीवंत किया। आने वाली पीढ़ी को बताया गया कि देश और धर्म के लिए जो करेगा, समाज उसकी कृतज्ञता व्यक्त करेगा। गुरु तेग बहादुर का शहीदी दिवस भी कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि लखनऊ को गुरु तेग बहादुर का सान्निध्य मिलना हमारा सौभाग्य है। याहियागंज गुरुद्वारे में उनका आगमन हुआ था। तब गुरु गोबिंद सिंह शिशु थे। उनकी स्मृति आज भी उसी रूप में वहां है। यह तेज और अध्यात्म सिख परंपरा के गौरवशाली क्षणों में से एक है। उत्तर प्रदेश में स्थित इन स्मृतियों को मजबूत करने के लिए प्रदेश और केंद्र सरकार कटिबद्ध हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी गुरु परंपरा, महापुरुषों और देश-धर्म के लिए योगदान देने वाले योद्धाओं के प्रति आस्था अटल होनी चाहिए। केसरिया ध्वज हमेशा प्रेरणा देता है। यह आगे बढ़ने की नई ऊर्जा प्रदान करता है। उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधक समिति से जुड़े लोगों को आश्वासन दिया कि डबल इंजन सरकार हमेशा आपके साथ है। यह केवल विचार नहीं, बल्कि महान परंपरा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिसने देश और धर्म के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया।

इस अवसर पर कृषि राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख, गुरुद्वारा प्रबंध समिति के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।

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