ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति में संगठन विस्तार और पत्रकारों के हितों के लिए बड़ा संकल्प

राष्ट्रीय कार्यसमिति के इस महत्वपूर्ण सत्र में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए शीर्ष पदाधिकारियों ने अपने बहुमूल्य विचार और सुझाव साझा किए। इस चर्चा में दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष सुखमाल जैन, उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार चौधरी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं कर्नाटक के

Jun 17, 2026 - 22:26
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ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति में संगठन विस्तार और पत्रकारों के हितों के लिए बड़ा संकल्प
ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति में संगठन विस्तार और पत्रकारों के हितों के लिए बड़ा संकल्प
  • देशभर के ग्रामीण पत्रकारों का दिल्ली में महासंगठन, पत्रकार सुरक्षा और अधिकारों को लेकर बनी राष्ट्रव्यापी रणनीति
  • संगठन के मूल मंत्र 'संवाद, संपर्क और संघर्ष' के साथ हर राज्य के प्रत्येक जिले तक पहुंचेगा ग्रामीण पत्रकारों का यह मजबूत मंच

देश की राजधानी दिल्ली में ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन (ग्रापए) की दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक का अत्यंत गरिमामय और भव्य शुभारंभ हुआ। इस दो दिवसीय राष्ट्रीय आयोजन के प्रथम सत्र में देश के विभिन्न राज्यों और सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आए पत्रकार प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। बैठक के पहले सत्र का मुख्य एजेंडा संगठन का राष्ट्रव्यापी विस्तार करना, पत्रकारों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करना और विभिन्न राज्यों में संगठनात्मक ढांचे को वैधानिक रूप से मजबूत बनाना था।

इस दौरान सर्वसम्मति से कई महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय लिए गए, जो आने वाले समय में देश के ग्रामीण पत्रकारों की दशा और दिशा तय करने में मील का पत्थर साबित होंगे। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस बैठक में ग्रामीण और कस्बाई पत्रकारों की समस्याओं को राष्ट्रीय पटल पर उठाने और उनके समाधान के लिए एक ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष देवी प्रसाद गुप्ता ने संगठन की ताकत और इसकी सार्थकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने देश के कोने-कोने से आए पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों को प्रेरित करते हुए आह्वान किया कि संगठन की पहुंच को देश के प्रत्येक जिले और तहसील स्तर तक सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले पत्रकार सबसे विपरीत परिस्थितियों में पत्रकारिता करते हैं, इसलिए उन्हें एक सूत्र में पिरोना बेहद ज़रूरी है।

इसी क्रम में संगठन के महासचिव प्रवीण चौहान ने एसोसिएशन की भावी रणनीतियों, आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक बदलावों पर एक विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। बैठक में उपस्थित विभिन्न राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों, क्षेत्रीय प्रभारियों और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारियों ने राष्ट्रीय नेतृत्व के इस आह्वान का पुरज़ोर समर्थन किया और आगामी तीन महीने के भीतर सभी राज्यों में जिला इकाइयों के गठन और पुनर्गठन के लक्ष्य को हर हाल में पूरा करने का सामूहिक संकल्प लिया।

इस राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के दौरान विभिन्न राज्यों में कार्यरत पत्रकारों को मिलने वाली सरकारी मान्यताओं, चिकित्सा सुविधाओं, बीमा योजनाओं और सबसे महत्वपूर्ण- पत्रकार उत्पीड़न से जुड़े गंभीर मुद्दों पर बेहद बारीकी से चर्चा की गई। बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि ग्रामीण अंचलों में सच्चाई लिखने वाले पत्रकारों को अक्सर प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ता है।

ऐसे में संगठन के मूल मंत्र “संवाद, संपर्क और संघर्ष” को जन-जन तक पहुंचाने और इसे ही हर संगठनात्मक कार्य का मुख्य आधार बनाने पर विशेष बल दिया गया। पदाधिकारियों ने एकजुटता दिखाते हुए कहा कि किसी भी राज्य में यदि किसी पत्रकार का उत्पीड़न होता है, तो पूरा संगठन उसके पीछे पूरी ताकत से खड़ा रहेगा। इसके लिए हर राज्य में एक विशेष विधिक इकाई (लीगल सेल) के गठन पर भी विचार किया गया, जो पीड़ित पत्रकारों को त्वरित कानूनी सहायता प्रदान कर सके।

राष्ट्रीय कार्यसमिति के इस महत्वपूर्ण सत्र में देश के अलग-अलग हिस्सों से आए शीर्ष पदाधिकारियों ने अपने बहुमूल्य विचार और सुझाव साझा किए। इस चर्चा में दिल्ली के प्रदेश अध्यक्ष सुखमाल जैन, उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार चौधरी, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष एवं कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष अतुल कपूर के साथ-साथ तेलंगाना के प्रदेश अध्यक्ष एफ.एम. सलीम और हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष हितेश जिंदल ने अपने-अपने राज्यों की संगठनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत की।

इसके अलावा राष्ट्रीय प्रभारी ओम प्रकाश द्विवेदी, दिल्ली के प्रदेश सचिव सौरभ सिंह और प्रदेश कार्यकारिणी के वरिष्ठ सदस्य आकाश कनौजिया ने भी संगठन की मजबूती के लिए तकनीकी और व्यावहारिक सुझाव दिए।

बैठक में डॉ. नरेश पाल सिंह, श्याम सुंदर पाराशर, विकास दत्त मिश्रा, इंद्र कुमार पांचाल, सुनील द्विवेदी, सौरभ जैन, सचिन उर्फ टीटू, आरजू सेठ, भानु देव अग्निहोत्री और संत कुमार भारद्वाज सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारियों ने संगठन की नियमावली को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अपनी बातें रखीं।

पत्रकार सुरक्षा और मानदेय का मुद्दा

राष्ट्रीय बैठक में यह बात भी प्रमुखता से उठी कि ग्रामीण और छोटे कस्बों के पत्रकारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार को नीति बनानी चाहिए। कई राज्यों में पत्रकारों को मिलने वाली पेंशन और सुरक्षा बीमा की विसंगतियों को दूर करने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया गया।

इस भव्य कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत बेहद सांस्कृतिक और आध्यात्मिक माहौल में हुई। वरिष्ठ पदाधिकारी संत कुमार द्वारा गाए गए मधुर स्वागत गीत से कार्यक्रम का आरंभ हुआ, जिसने सभागार में उपस्थित सभी अतिथियों और प्रतिनिधियों में एक नई ऊर्जा का संचार कर दिया। इसके बाद अतुल कपूर द्वारा मां सरस्वती और व्यास वंदना की शानदार प्रस्तुति दी गई। इस अवसर पर मेजबान दिल्ली प्रदेश इकाई ने देश के अलग-अलग राज्यों से आए हुए सभी सम्मानित अतिथियों, प्रदेश अध्यक्षों और राष्ट्रीय पदाधिकारियों का भारतीय परंपरा के अनुसार अंगवस्त्र पहनाकर और स्मृति चिह्न के रूप में डायरी भेंट कर भव्य स्वागत और सम्मान किया। दिल्ली इकाई के इस आतिथ्य सत्कार की सभी आगंतुकों ने सराहना की और इसे संगठन के भीतर के पारिवारिक और आत्मीय संबंधों को मजबूत करने वाला एक बेहतरीन प्रयास बताया।

इस दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक के संपूर्ण संचालन की जिम्मेदारी वरिष्ठ पत्रकार और संगठन के कुशल रणनीतिकार नरेश कुमार सक्सेना ने निभाई। उन्होंने अत्यंत सधे हुए अंदाज़ में मंच का संचालन करते हुए सभी राज्यों के प्रतिनिधियों को अपनी बात रखने का भरपूर अवसर दिया। बैठक के अंतिम चरण में दिल्ली प्रदेश के अध्यक्ष सुखमाल जैन ने दूर-दराज के राज्यों से यात्रा करके दिल्ली पहुंचे सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रांतीय अध्यक्षों, प्रभारियों और कार्यकर्ता प्रतिनिधियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास दिलाया कि दिल्ली प्रदेश इकाई संगठन के हर राष्ट्रीय आह्वान पर सबसे आगे खड़ी रहेगी। इस धन्यवाद प्रस्ताव के साथ ही कार्यसमिति के प्रथम सत्र का समापन हुआ, जिसने संगठन के भीतर एक नए उत्साह और एकजुटता की नई इबारत लिख दी है।

कार्यसमिति के पहले सत्र के समापन तक यह पूरी तरह स्पष्ट हो गया कि ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन अब केवल कुछ राज्यों तक सीमित न रहकर एक अखिल भारतीय स्वरूप ले चुका है। बैठक में लिए गए निर्णयों के अनुसार, आने वाले दिनों में देश के सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और महामहिम राज्यपालों के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को एक व्यापक मांग पत्र भेजा जाएगा। इस मांग पत्र में मुख्य रूप से केंद्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने, ग्रामीण पत्रकारों को टोल टैक्स से मुक्ति दिलाने, रेलवे यात्रा में मिलने वाली छूट को बहाल करने और पत्रकारों के बच्चों के लिए मुफ्त उच्च शिक्षा व स्वास्थ्य कार्ड जारी करने जैसी महत्वपूर्ण मांगें शामिल होंगी। संगठन विस्तार, पत्रकार सुरक्षा और प्रांतीय इकाइयों की मजबूती के इस महाअभियान को गति देने के लिए अगले माह से राष्ट्रीय नेतृत्व विभिन्न राज्यों का सघन दौरा भी शुरू करने जा रहा है।

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