मेरठ में कांवड़ शिविरों का हाईटेक अंदाज: बिना प्याज-लहसुन के चाइनीज और पारंपरिक व्यंजनों से हो रहा स्वागत

मेरठ में कांवड़ यात्रा के दौरान शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए हाईटेक व्यवस्थाएं। बिना लहसुन-प्याज के पारंपरिक और चाइनीज सात्विक व्यंजन परोसे जा रहे हैं।

By INA News Desk
Aug 7, 2026 - 23:25
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मेरठ में कांवड़ शिविरों का हाईटेक अंदाज: बिना प्याज-लहसुन के चाइनीज और पारंपरिक व्यंजनों से हो रहा स्वागत
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  • ‘अतिथि देवो भव’-कांवड़िया शिविरों में सात्विक व्यंजनों के साथ हाईटेक सेवा का संगम
  • विवाह समारोह जैसा मेन्यू, बिना प्याज-लहसुन के देसी से लेकर चाइनीज व्यंजन तक
  • योगी सरकार की गाइडलाइन के अनुसार भोजन की गुणवत्ता पर प्रशासन की पैनी नजर
  • ईको-फ्रेंडली भंडारों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश, मशीनों ने बढ़ाई सेवा की रफ्तार

मेरठ : श्रावण मास की कांवड़ यात्रा में इस बार सेवा, स्वच्छता और आधुनिक व्यवस्थाओं का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। कांवड़ मार्ग पर लगे शिविरों में शिवभक्तों के स्वागत के लिए ऐसी व्यवस्थाएं की गई हैं, जो किसी भव्य विवाह समारोह से कम नहीं हैं। सात्विक परंपरा को कायम रखते हुए श्रद्धालुओं को बिना प्याज-लहसुन के देसी व्यंजनों के साथ पास्ता, पिज्जा, नूडल्स, मोमोज और मंचूरियन जैसे आधुनिक स्वाद भी परोसे जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के अनुरूप प्रशासनिक अधिकारी लगातार निजी शिविरों का निरीक्षण कर भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और व्यवस्थाओं की जांच कर रहे हैं।

कांवड़ियों के लिए पूरे दिन का भोजन समयानुसार निर्धारित किया गया है। सुबह चाय, बिस्किट, पोहा और जलेबी से दिन की शुरुआत होती है, जबकि नाश्ते में समोसा, कचौड़ी, ब्रेड पकौड़ा, वेज हक्का नूडल्स और हनी चिली पोटैटो परोसे जा रहे हैं। दोपहर में शाही पनीर, कढ़ाई पनीर, पनीर लबाबदार, दाल मखनी, मिक्स वेज, चूरचूर नान, बटर नान, जीरा राइस और ताजा रोटियों के साथ रबड़ी-जलेबी, रसमलाई, रसगुल्ला और गुलाब जामुन जैसी मिठाइयों की व्यवस्था है।

शाम के समय स्प्रिंग रोल, चिली पनीर, मंचूरियन, व्हाइट व रेड सॉस पास्ता, वेज पिज्जा, मोमोज, मैकरोनी, सूप और बर्गर श्रद्धालुओं को परोसे जा रहे हैं। रात में छोले-पूड़ी, मटर पनीर, पुलाव, दाल, ताजी रोटियों के साथ खीर, हलवा, फ्रूट कस्टर्ड और गुलाब जामुन परोसे जा रहे हैं। शिविरों में लस्सी, छाछ, जूस, चाय, कॉफी और शीतल पेयजल की भी निरंतर व्यवस्था है।

हाईटेक रसोई ने बढ़ाई सेवा की रफ्तार

कंकरखेड़ा व्यापार संघ के शिविर में तकनीक ने सेवा को नई गति दी है। संयोजक नीरज मित्तल और व्यवस्था संचालक राजेश खन्ना के अनुसार 20 किलो आटा एक साथ गूंधने वाली मशीन और ऑटोमैटिक रोटी मशीन लगाई गई है। मशीन एक मिनट में करीब 16 और एक घंटे में लगभग 900 रोटियां तैयार कर रही है। प्रतिदिन छह से सात हजार रोटियां बनाई जा रही हैं। सब्जियां काटने और मसाले तैयार करने के लिए भी आधुनिक मशीनों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे कम समय में हजारों श्रद्धालुओं के लिए भोजन तैयार हो रहा है।

व्रत रखने वालों के लिए अलग फलाहार\

मोदीपुरम स्थित शिविर संचालक दल के सदस्य सुधीर रस्तोगी ने बताया कि उपवास रखने वाले कांवड़ियों के लिए विशेष फलाहार की व्यवस्था की गई है। कुट्टू और सिंघाड़े के आटे से बने व्यंजन, आलू की सब्जी, मौसमी फल और अन्य व्रताहार उपलब्ध कराए जा रहे हैं। लंबी यात्रा के बाद श्रद्धालुओं को कुल्हड़ में केसर युक्त गर्म दूध भी पिलाया जा रहा है, ताकि उन्हें ऊर्जा मिल सके।

ईको-फ्रेंडली भंडारों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश

इस बार अनेक शिविरों को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाया गया है। भोजन परोसने के लिए प्लास्टिक और थर्माकोल की प्लेटों के स्थान पर स्टेनलेस स्टील के बर्तनों का उपयोग किया जा रहा है। स्वच्छ सर्विंग स्टेशन, व्यवस्थित भोजन व्यवस्था और साफ-सुथरा वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहा है। इससे कांवड़ यात्रा के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी प्रभावी ढंग से दिया जा रहा है।

सेवा को मान रहे सबसे बड़ी साधना

मां कांवड़ सेवा शिविर संचालक अमित मूर्ति का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल भोजन कराना नहीं, बल्कि शिवभक्तों की यात्रा को सुरक्षित, सुखद और यादगार बनाना है। शिविर संचालकों ने कहा कि योगी सरकार की गाइडलाइन के अनुरूप भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और सुरक्षा के मानकों का पालन किया जा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों की टीमें समय-समय पर निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा ले रही हैं, जबकि सैकड़ों स्वयंसेवक चौबीसों घंटे सेवा में जुटकर ‘अतिथि देवो भव’ की भावना को साकार कर रहे हैं।

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