Spiritual News: नैमिषारण्य के कालीपीठ में गूंजा ‘दिगम्बरा, दिगम्बरा श्रीपाद वल्लभ दिगम्बरा’ का जयघोष, भजन संध्या में श्रद्धालु हुए भावविभोर
भागवत महाकुंभ के दौरान शुक्रवार की रात भजन संध्या का आयेाजन किया गया। हिन्दी और मराठी भाषा के इस समागम कार्यक्रम में
संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर
भागवत महाकुंभ के दौरान शुक्रवार की रात भजन संध्या का आयेाजन किया गया। हिन्दी और मराठी भाषा के इस समागम कार्यक्रम में मुंबई से पधारे हिन्दी और मराठी के सुप्रसिद्ध भजन गायक अजीत करकरे के भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक खुशी से झूमते रहे।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए उन्होंने भगवान श्रीराम की स्तुति करते हुए जैसे ही पहला भजन 'भज ले राम नाम सुख धाम...' प्रस्तुत किया, पूरा पांडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। भजन संध्या को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने मराठी में अगला भजन 'अबीर-गुलाल उधड़ी तरंग...' प्रस्तुत किया, पूरा पांडाल उनके साथ तालियों की थाप पर गुनगुनाता नजर आया। इसके बाद उनकी प्रस्तुति 'झोली भरकर लाना, गुरु ने मंगाई झोली भरकर लाना...' ने हर किसी को श्रद्धा और भक्तिभाव से झूमने पर विवश कर दिया। श्रद्धालुओं की मांग पर उन्होंने मराठी के भजन 'निघालो घेड़न दत्ताची पालखी...' और 'दिगम्बरा, दिगम्बरा श्रीपाद वल्लभ दिगम्बरा...' को अपना स्वर दिया। 'गणपति बप्पा मोरिया, मंगल मूरति मोरिया...' की प्रस्तुति पर हर एक श्रद्धालु श्रद्धा से वशीभूत होकर झूमता नजर आया। भगवान शिव की आराधना करते हुए उन्होंने 'शिव के मन शरण...' भजन की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का समापन मराठी भजन 'स्वामी कृपा कधी करणार...' के साथ हुआ। कार्यक्रम में उनके साथ सहायक की भूमिका में किशोर देसाई रहे। इसके अलावा तबला पर रूपक वझे, हारमोनियम पर प्रकाशव वगल, मृदंग पर दिनकर भगत, मंजीरा पर उल्हास दलफी संगत कर रहे थे। कार्यक्रम में कालीपीठाधीश्वर गोपाल शास्त्री, संचालक भास्कर शास्त्री सहित मराठी और हिन्दी भाषी श्रद्धालु गण मौजूद रहे।
इससे पूर्व भागवत महाकुंभ के पांडाल में संत समागम का आयोजन किया गया। जिसमें जगदाचार्य स्वामी उपेंद्रा नंद सरस्वती, हनुमान गढ़ी के महंत 1008 पीठाधीश्वर पवन दास, महामंडलेश्वर विद्या चैतन्य जी, विद्यानंद सरस्वती, शिवेंद्र सरस्वती, 84 कोसी परिक्रमा समिति के अध्यक्ष एवं पहला आश्रम के मंहंत नारायण दास, समिति के महामंत्री एवं बनगढ़ आश्रम के महंत संतोष दास खाकी, महंत मनीष शास्त्री, महंत सुरेश दास, विमला नंद सरस्वती, साध्वी मोमोक्षा, काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत पुरुषोत्तम शास्त्री, चक्रतीर्थ के पुजारी सुनीत पांडेय, विवेक शास्त्री आदि संत-महात्मा मौजूद रहे। इस अवसर पर संतों ने नैमिष के महात्म्य पर चर्चा करते हुए इसका पौराणिक महत्व बताया। कार्यक्रम का समापन संतों और श्रद्धालुओं द्वारा 'श्रीराम जय राम, जय-जय राम...' की प्रार्थना के साथ व्यास पीठ की आरती के साथ हुआ।
What's Your Reaction?