Haridwar Lord Shiva Statue: हरिद्वार में ओम ब्रिज के पास 21 फीट ऊंची भव्य शिव प्रतिमा का हुआ अनावरण, उमड़े श्रद्धालु
Haridwar Lord Shiva Statue: उत्तराखंड के हरिद्वार में ओम ब्रिज के पास 21 फीट ऊंची भगवान शिव की भव्य प्रतिमा का विधिवत उद्घाटन किया गया है। जानिए प्रमुख विशेषताएं।
- हरिद्वार के ओम ब्रिज के पास स्थापित हुई 21 फीट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा, धर्मनगरी में जुड़ा नया आध्यात्मिक आकर्षण
- हरिद्वार में ओम ब्रिज के पास 21 फीट ऊंची भगवान शिव की भव्य प्रतिमा का लोकार्पण, धर्मनगरी में दिखा अलौकिक नजारा
- Haridwar: हरिद्वार में ओम ब्रिज के समीप 21 फीट ऊंची भगवान शिव की भव्य प्रतिमा का उद्घाटन, श्रद्धालुओं में भारी उत्साह
उत्तराखंड की पावन धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा तट के समीप स्थित ओम ब्रिज (पुल) के पास 21 फीट ऊंची भगवान शिव की भव्य प्रतिमा का विधिवत उद्घाटन और अनावरण किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इस प्रतिमा का लोकार्पण संपन्न हुआ। धर्मनगरी के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को और अधिक समृद्ध करने के उद्देश्य से स्थापित यह प्रतिमा हरिद्वार आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का नया केंद्र बनेगी। इस अवसर पर साधु-संतों, स्थानीय जन प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर महादेव के दर्शन किए।
उत्तराखंड के प्रमुख तीर्थ स्थल हरिद्वार में ओम ब्रिज के निकट भगवान शिव की 21 फीट ऊंची विशाल और कलात्मक प्रतिमा स्थापित की गई है। धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और मंत्रोच्चार के बीच इस प्रतिमा का अनावरण किया गया। इस अवसर पर धर्मनगरी का वातावरण 'हर-हर महादेव' और 'जय गंगा मैया' के जयकारों से गूंज उठा।
यह प्रतिमा शिल्पकला और आधुनिक स्थापत्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसे गंगा नहर और ओम ब्रिज के प्राकृतिक व आध्यात्मिक परिवेश को ध्यान में रखकर स्थापित किया गया है। प्रतिमा का अनावरण होते ही स्थानीय नागरिकों और देश भर से पहुंचे श्रद्धालुओं का तांता दर्शन के लिए लग गया।
प्रतिमा अनावरण का मुख्य कार्यक्रम वैदिक आचार्यों और पुजारियों के सानिध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रतिमा का उद्घाटन किया। धार्मिक विधि-विधान के साथ जलाभिषेक और आरती की गई।
आयोजन समिति के अनुसार, हरिद्वार में बुनियादी ढांचे और धार्मिक सौंदर्य को निखारने की योजना के तहत ओम ब्रिज के आसपास के क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है। इस कड़ी में गंगा के पावन प्रवाह के समीप 21 फीट ऊंची भगवान शिव की ध्यानमग्न और आशीर्वाद मुद्रा वाली प्रतिमा का निर्माण कराया गया है। यह स्थान हर की पौड़ी और अन्य प्रमुख गंगा घाटों के निकट होने के कारण श्रद्धालुओं के आवागमन का एक प्रमुख मार्ग भी है, जिससे यहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को महादेव के इस भव्य स्वरूप के दर्शन होंगे।
उद्घाटन अवसर पर उपस्थित अतिथियों और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि हरिद्वार सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का वैश्विक केंद्र है। गंगा किनारे भगवान शिव के इस स्वरूप की स्थापना से न केवल धार्मिक आस्था को नया संबल मिलेगा, बल्कि तीर्थनगरी का सौंदर्य भी बढ़ेगा।
स्थानीय संत समाज और तीर्थ पुरोहितों ने भी इस पहल का स्वागत किया है। उनका मानना है कि ओम ब्रिज के पास इस विशाल प्रतिमा के स्थापित होने से श्रद्धालुओं को साधना और दर्शन के लिए एक शांत व दिव्य स्थान प्राप्त होगा। स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने भी हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि इस नए लैंडमार्क से क्षेत्र में पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को सकारात्मक गति मिलेगी।
हरिद्वार में हर साल कांवड़ यात्रा, कुंभ, अर्धकुंभ और सामान्य दिनों में करोड़ों श्रद्धालु दर्शन और गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। ओम ब्रिज के पास 21 फीट ऊंची प्रतिमा की स्थापना से हरिद्वार के आध्यात्मिक पर्यटन परिदृश्य में एक नया अध्याय जुड़ गया है।
यह स्थल अब श्रद्धालुओं के लिए दर्शन के साथ-साथ एक प्रमुख दर्शनीय स्थल के रूप में उभरेगा। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से स्थानीय अर्थव्यवस्था, होटल व्यवसाय, हस्तशिल्प और परिवहन से जुड़े लोगों को सीधा लाभ पहुंचने की संभावना है। साथ ही, शाम के समय गंगा आरती और घाटों के आलोक के साथ यह प्रतिमा क्षेत्र के विहंगम दृश्य को और अधिक मनोहारी बनाएगी।
प्रतिमा के लोकार्पण के बाद अब प्रशासन और संबंधित विकास एजेंसियां ओम ब्रिज के आसपास के क्षेत्र में सौंदर्यीकरण, प्रकाश व्यवस्था (फसाड लाइटिंग), सुरक्षा रेलिंग और स्वच्छ पेयजल जैसी नागरिक सुविधाओं को और अधिक सुदृढ़ करने पर काम कर रही हैं।
आने वाले दिनों में इस परिसर के चारों ओर हरित पट्टी (ग्रीन बेल्ट) और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए व्यवस्थित घाट-किनारे के गलियारे को विकसित करने की रूपरेखा तैयार की जा रही है, जिससे यहां आने वाले तीर्थयात्री सुकून से समय बिता सकें और धर्मनगरी की पवित्रता का अनुभव कर सकें।
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