Sitapur News: जटायु-रावण युद्ध का मार्मिक प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, छलक उठीं आंखें

रामधुन ‘रघुपति राघव राजाराम...’ के साथ शुक्रवार को तीर्थनगर नैमिषारण्य में आयोजित श्रीमद् भागवत महाकुंभ के

By INA News Desk
Oct 2, 2026 - 16:46
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Sitapur News: जटायु-रावण युद्ध का मार्मिक प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, छलक उठीं आंखें

संदीप चौरसिया की रिपोर्ट 

सीतापुर। रामधुन ‘रघुपति राघव राजाराम...’ के साथ शुक्रवार को तीर्थनगर नैमिषारण्य में आयोजित श्रीमद् भागवत महाकुंभ के शुक्रवार के सत्र का शुभारंभ हुआ। इस मौके पर प्रख्यात रामकथा वाचक चारुदत्त गोविंदस्वामी आफले महाराज ने श्रीराम चरित मानस के विभिन्न प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन करते हुए श्रद्धालुओं को कथा का रसास्वादन कराया। 

माता सीता के अपहरण के आगे की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि जब रावण ने सीता को अपने पुष्पक विमान में बैठा कर लंका की तरफ उड़ान भरी तो माता सीता विलाप करने लगीं और भगवान राम को पुकारने लगीं। जब रावण का विमान छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य से गुजर रहा था तो माता सीता की आवाज गिद्धराज जटायु के कानों में पड़ी और जटायु ने रावण को ललकारते हुए रास्ता रोक लिया। सीता को बचाने के लिए जटायु और रावण के बीच भयंकर संषर्घ हुआ। लेकिन रावण तलवार से जटायु के पंख काट दिए। जिससे वह मरणासन्न स्थिति में जमीन पर आ गिरे, तब उन्होंने माता सीता से कहा कि आप अपने आभूषणों को रास्ते में बिखेरती जाएं, राम इन्हीं आभूषणों को देखते हुए अापका पता लगा लेंगे।  

सीता की खोज करते हुए जब राम और लक्ष्मण दंडकारण्य वन तरफ बढ़े तो उन्हें रास्ते में घायल जटायु दिखाई दिए। पहले तो लक्ष्मण ने समझा इस विशालकाय जटायु ने ही सीता को खा लिया है। लक्ष्मण ने अपना धनुष उतारा और उस पर बाण चढ़ा लिया, लेकिन तभी राम ने उन्हें रोक दिया।  क्योंकि जटायु कुछ बताना चाह रहे थे। जटायु ने राम को बताया कि रावण सीता का हरण कर दक्षिण दिशा की ओर ले गया है। सीता को बचाने में रावण ने उनके पंख काट दिए है। उन्होंने संषर्घ के दौरान टूटे हुए रावण के तीर भी दिखाए। अंत में जटायु ने कहा कि प्रभु आपके दर्शन हो गए मेरा जीवन सफल हो गया अब मुझे मुक्ति प्रदान करें और जटायु ने भगवान राम की गोद में प्राण त्याग दिए। 

इससे पूर्व कथा वाचिका धनश्री लेले ने मराठी भाष में श्रीमद् भागवत सुनाते हुए कहा कि आज के भागदौड़ भरे जीवन में प्रत्येक मनुष्य को प्रतिदिन ईश्वर का नाम स्मरण अवश्य करना चाहिए, क्योंकि हर कष्ट के निवारण में प्रभु की भक्ति ही सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने गीता के गूढ़ रहस्यों की चर्चा करते हुए यह भी बताया कि श्रद्धा और कर्म के समन्वय से ही मनुष्य मोक्ष की ओर अग्रसर हो सकता है। कार्यक्रम में अशीष शास्त्री सहित सांसद अशोक रावत, एमएलसी पवन सिंह चौहान, भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश शुक्ला, भाजपा नेता यतींद्र अवस्थी बबलू, विपुल प्रताप सिंह, विश्राम सागर राठौर आदि भी शामिल हुए।

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