Neeraj Bawana Case Court Verdict: डॉक्टर अनुज गोयल फायरिंग मामले में नीरज बवाना को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी

सहारनपुर की देवबंद अदालत ने चिकित्सक डॉ. अनुज गोयल पर हुए जानलेवा हमले के 9 साल पुराने मामले में साक्ष्यों के अभाव में नीरज बवाना को दोषमुक्त कर दिया है।

By INA News Desk
Jul 5, 2026 - 12:57
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Neeraj Bawana Case Court Verdict: डॉक्टर अनुज गोयल फायरिंग मामले में नीरज बवाना को मिली बड़ी राहत, कोर्ट ने किया बरी
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  • Saharanpur Court News: देवबंद के बहुचर्चित डॉक्टर अनुज गोयल हमला कांड में नीरज बवाना साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त
  • डॉक्टर फायरिंग कांड में नीरज बवाना बरी, कोर्ट ने दिया संदेह का लाभ; जानें 9 साल पुराने इस मामले में क्या हुआ
  • देवबंद कोर्ट का बड़ा फैसला: प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अनुज गोयल जानलेवा हमला मामले में नीरज बवाना बरी

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की देवबंद अदालत से एक बड़ी कानूनी खबर सामने आई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवेंद्र नाथ सिंह की अदालत ने क्षेत्र के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अनुज गोयल पर हुए जानलेवा हमले और रंगदारी के करीब नौ साल पुराने एक बहुचर्चित मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने तिहाड़ जेल में बंद नीरज बवाना को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपों से पूरी तरह बरी (दोषमुक्त) कर दिया है। शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई इस अंतिम सुनवाई में अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह असफल रहा है। न्यायालय ने संदेह का लाभ (Benefit of Doubt) देते हुए यह निर्णय दिया है, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले में बवाना को बड़ी कानूनी राहत मिली है।

यह मामला 4 अप्रैल 2017 को देवबंद के एक नामचीन नर्सिंग होम में घुसकर डॉक्टर अनुज गोयल पर की गई जानलेवा फायरिंग और रंगदारी से जुड़ा है। बदमाशों द्वारा किए गए इस हमले में चिकित्सक के पैर में गोली लगी थी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस घटना के बाद चिकित्सक की पत्नी डॉ. लीना गोयल ने देवबंद थाने में नामजद व अज्ञात आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। पुलिस विवेचना के दौरान इस कांड के तार दिल्ली के कुख्यात आरोपी नीरज बवाना से जुड़े, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ साजिश रचने, जानलेवा हमला करने और रंगदारी मांगने की धाराओं में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल किया था।

मामले के अनुसार, अप्रैल 2017 में देवबंद के प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. अनुज गोयल अपने नर्सिंग होम में मरीजों को देख रहे थे, तभी अचानक हथियारों से लैस बदमाशों ने वहां प्रवेश किया और उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस दुस्साहसिक वारदात से पूरे चिकित्सा जगत और स्थानीय व्यापारियों में रोष फैल गया था। मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने पाया कि इस पूरे हमले की पटकथा जेल के भीतर से लिखी गई थी और इसमें रंगदारी का एंगल शामिल था।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद शनिवार को इस मामले की अंतिम सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश देवेंद्र नाथ सिंह की अदालत में संपन्न हुई। वर्तमान में दिल्ली की सुरक्षित तिहाड़ जेल में बंद नीरज बवाना की पेशी कड़ी सुरक्षा के बीच वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से कराई गई। इससे पहले, बीती 12 जून को दिल्ली पुलिस की एक विशेष और भारी सुरक्षा टुकड़ी नीरज बवाना को व्यक्तिगत रूप से देवबंद न्यायालय में पेशी के लिए लेकर आई थी, जहां दोनों पक्षों की दलीलें दर्ज की गई थीं।

मुकदमे के ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष (Prosecution) ने आरोपी नीरज बवाना के खिलाफ अपराध साबित करने के लिए पूरी ताकत झोंकी थी। अभियोजन की ओर से अदालत के समक्ष कई मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिनमें घायल चिकित्सक, चश्मदीद गवाह, उपचार करने वाले डॉक्टर, घटना की जांच करने वाले पुलिस विवेचक और अन्य गवाहों के बयान शामिल थे।

दूसरी तरफ, बचाव पक्ष (Defense) के वकीलों ने अभियोजन द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में मौजूद विरोधाभास को अदालत के सामने रखा। बचाव पक्ष ने दलील दी कि पुलिस द्वारा पेश की गई कहानी केवल संदेहों पर आधारित है और नीरज बवाना के खिलाफ इस अपराध में सीधे शामिल होने या साजिश रचने का कोई भी पुख्ता, वैज्ञानिक या चश्मदीद साक्ष्य रिकॉर्ड पर मौजूद नहीं है।

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