Nepal Flash Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई प्रलयंकारी बाढ़, 160 की मौत और 133 भारतीयों समेत 750 लापता 

नेपाल-तिब्बत सीमा पर भयंकर बाढ़ से 160 लोगों की मौत हो गई और 133 भारतीय नागरिकों समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। सेना व राहत दल बड़े पैमाने पर रेस्क्यू में जुटे हैं।

Aug 27, 2026 - 15:48
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Nepal Flash Flood: नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई प्रलयंकारी बाढ़, 160 की मौत और 133 भारतीयों समेत 750 लापता 
  • Nepal Floods 2026: तिब्बत से आई विनाशकारी बाढ़ से नेपाल में हाहाकार, 160 शव बरामद; मानसरोवर यात्रियों की तलाश तेज 
  • नेपाल में कुदरत का कहर: तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर फटने से भीषण बाढ़, 160 की मौत और 133 भारतीय तीर्थयात्री लापता 
  • नेपाल-तिब्बत सीमा पर विनाशकारी बाढ़ में 160 लोगों की मौत, 133 भारतीयों समेत सैकड़ों लोग लापता

नेपाल और तिब्बत (चीन) के सीमावर्ती हिमालयी क्षेत्र में बुधवार सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। शुरुआती आंकड़ों के अनुसार अब तक 160 से अधिक शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए 133 भारतीय नागरिकों समेत 750 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। तिब्बती पठार से भोटेकोशी नदी में आए मलबे और भारी जलप्रवाह ने नेपाल के रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों में बस्तियों, प्रमुख पुलों, हाइड्रोपावर परियोजनाओं और सड़कों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। भारतीय दूतावास ने प्रभावित नागरिकों की सहायता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की है और दोनों देशों के सुरक्षा बल युद्धस्तर पर राहत व बचाव अभियान चला रहे हैं। 

नेपाल के उत्तरी और मध्य जिलों में तिब्बत सीमा के पास बुधवार सुबह अचानक प्रलयंकारी जलप्रवाह देखा गया, जिसने देखते ही देखते विशाल रूप ले लिया। प्रारंभिक जांच और विशेषज्ञों के आकलन के अनुसार तिब्बत क्षेत्र में 4.4 तीव्रता के भूकंपीय झटके अथवा ग्लेशियर झील फटने (GLOF) के कारण बर्फीली चट्टानों और मलबे का विशाल हिस्सा नदी में समा गया। इसके बाद भोटेकोशी और त्रिशूली नदी प्रणालियों में भीषण उफान आ गया। इस प्राकृतिक आपदा की चपेट में आने से 160 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और सीमावर्ती चौकियों पर मौजूद सैकड़ों लोग मलबे में बह गए। 

यह भयानक हादसा बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे शुरू हुआ जब तिब्बत के ग्यिरॉन्ग पोर्ट और नेपाल के रसुवागढ़ी बॉर्डर पोस्ट पर तेज गर्जना के साथ पानी और कीचड़ की एक विशाल दीवार ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया। वहां मौजूद इमिग्रेशन कार्यालय, दर्जनों बहुमंजिला इमारतें, वाहन और सीमा पर हाल ही में पुनर्निर्मित मैत्री पुल (Friendship Bridge) ताश के पत्तों की तरह ढह गए।

रसुवा के तिमुरे, स्याफ्रुबेसी और नुवाकोट के बेत्रावती में नदियां किनारों को तोड़कर रिहायशी इलाकों में घुस गईं। बाढ़ की चपेट में कैलाश मानसरोवर की पवित्र यात्रा पर गए कई जत्थे भी आ गए। अधिकारियों के मुताबिक 133 भारतीय तीर्थयात्रियों और 37 एनआरआई का अभी तक संपर्क नहीं हो सका है, जिनमें से एक बड़ा समूह तमिलनाडु और अन्य राज्यों से यात्रा पर निकला था।

नेपाल के ऊर्जा और परिवहन मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ के कारण 19 से अधिक प्रमुख मोटर वाहन पुल बह गए हैं और लगभग 430 मेगावाट क्षमता वाली 8 जलविद्युत परियोजनाओं को भारी क्षति पहुंची है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री से टेलीफोन पर बात कर इस भीषण त्रासदी पर गहरा शोक व्यक्त किया और भारत की ओर से हरसंभव मानवीय व तकनीकी सहायता का भरोसा दिया। भारत ने राहत सामग्री की पहली खेप रवाना करने के साथ ही दूतावास स्तर पर आपातकालीन नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने लापता नागरिकों की जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर (+977 9851316807 और +977 9709107500) जारी किए हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार अपने समस्त संसाधनों के साथ पीड़ितों की मदद में जुटी है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और पुलिस के जवान 12 से अधिक हेलीकॉप्टरों की मदद से दूरदराज के पर्वतीय इलाकों से लोगों को निकालने में जुटे हैं। 

इस विनाशकारी बाढ़ का असर अंतरराष्ट्रीय सीमा के दोनों ओर देखने को मिल रहा है। तिब्बत से नेपाल को जोड़ने वाले प्रमुख जमीनी व्यापारिक मार्ग और कस्टम चौकियां पूरी तरह ठप हो गई हैं। नेपाल की राजधानी काठमांडू को जोड़ने वाले कई राष्ट्रीय राजमार्ग बंद होने से संपर्क कट गया है।

इसके साथ ही, भारत के निचले मैदानी इलाकों विशेष रूप से बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक, नारायणी और कोसी नदी के जलस्तर में तेज वृद्धि की संभावना को देखते हुए सीमावर्ती जिलों में हाई अलर्ट जारी किया गया है और तटीय इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। 

राहत और बचाव एजेंसियों की पहली प्राथमिकता मलबे में दबे और कटे हुए इलाकों में फंसे लोगों तक चिकित्सा सहायता और खाद्य सामग्री पहुंचाना है। जल आयोग और मौसम विभाग लगातार भोटेकोशी व त्रिशूली नदियों के प्रवाह पर नजर बनाए हुए हैं क्योंकि नदी का प्राकृतिक मार्ग अवरुद्ध होने से बने अस्थायी जलाशयों के पूरी तरह खाली न होने का खतरा अभी बना हुआ है। आने वाले 48 घंटों में दोनों देशों की संयुक्त एजेंसियां लापता तीर्थयात्रियों और स्थानीय नागरिकों की खोजबीन के लिए सघन अभियान चलाएंगी।

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