Gandhi Jayanti Reality Check: कहीं नीला ड्रम तो कहीं कचरे और बोरियों का ढेर, पटना में बदहाली के बीच 'गांधीजी'
Patna News: गांधी जयंती के अवसर पर पटना की सड़कों पर महात्मा गांधी की प्रतिमाओं के पास उपेक्षा की तस्वीर सामने आई। कहीं नीला ड्रम, तो कहीं बोरियों और कचरे के ढेर के बीच बापू को माला पहनाई गई।
- पटना में गांधी जयंती पर प्रशासनिक दावों की खुली पोल: एक तरफ माल्यार्पण की औपचारिकता, दूसरी तरफ बापू की प्रतिमाओं के पास गंदगी का अंबार
- Patna News: जयंती पर फूलों से सजे बापू, पास में रखा नीला ड्रम और कूड़ा; पटना की सड़कों पर दिखी उपेक्षा की तस्वीर
- राष्ट्रपिता के स्वच्छता संदेश की राजधानी में अनदेखी: पटना में महात्मा गांधी की प्रतिमाओं के आसपास पसरी गंदगी, नागरिकों ने उठाए सवाल
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर एक ओर जहां पूरे देश में स्वच्छता अभियान चलाए जाने और बापू के आदर्शों को याद करने के औपचारिक सरकारी दावे किए जा रहे हैं, वहीं बिहार की राजधानी पटना की सड़कों से व्यवस्था की संवेदनहीनता को उजागर करने वाली विचलित करने वाली तस्वीरें सामने आई हैं। शहर के विभिन्न चौराहों और सार्वजनिक स्थलों पर स्थापित महात्मा गांधी की प्रतिमाओं के आसपास साफ-सफाई और गरिमापूर्ण रखरखाव के बजाय घोर लापरवाही का नजारा देखने को मिला।
कहीं प्रतिमा के ठीक नीचे नीला प्लास्टिक का ड्रम और बोरियां रखी नजर आईं, तो कहीं कूड़े और धूल के ढेर के ठीक ऊपर बापू के गले में गेंदे की माला पहनाकर रस्म अदायगी पूरी कर ली गई। यह विडंबना उस शहर में दिखी है, जो ऐतिहासिक रूप से चंपारण सत्याग्रह और गांधी जी के आंदोलनों का साक्षी रहा है।
- स्वच्छता के प्रतीक के पास ही कचरे का साम्राज्य
महात्मा गांधी ने आजीवन जिस स्वच्छता को आजादी से भी ऊपर का दर्जा दिया, आज उसी गांधी की जयंती पर राजधानी पटना में प्रशासनिक तत्परता की पोल खुल गई। शहर के व्यस्त मार्गों और चौक-चौराहों पर स्थित कई प्रतिमा स्थलों पर नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों का अभाव साफ दिखा।
गांधी मैदान के ऐतिहासिक इलाके से लेकर शहर के भीतरी उपनगरीय चौराहों तक कई स्थानों पर देखा गया कि प्रतिमाओं के चबूतरे की न तो कायदे से धुलाई की गई थी और न ही आसपास बिखरे कचरे को हटाया गया था। कई जगहों पर प्रतिमा के आधार स्तंभ के पास नगर निगम के टूटे-फूटे नीले डस्टबिन, प्लास्टिक की पुरानी बोरियां, बिखरी निर्माण सामग्री और सड़े-गले फूलों के ढेर जमा थे। इन सबके बीच किसी ने जाकर जल्दबाजी में प्रतिमा पर पुष्पहार चढ़ा दिया और औपचारिकता पूरी कर ली।
- रस्म अदायगी और जमीनी हकीकत का अंतर
गांधी जयंती के दिन हर वर्ष सरकारी प्रतिष्ठानों, नगर निकायों और सामाजिक संगठनों द्वारा विशेष स्वच्छता पखवाड़ा और सफाई अभियानों के आयोजन की लंबी-चौड़ी घोषणाएं की जाती हैं। पटना के प्रमुख वीवीआईपी क्षेत्रों में तो प्रशासनिक अमला सक्रिय रहा और रंग-रोगन के साथ मंच सजाए गए, लेकिन आम चौराहों पर लगी प्रतिमाओं की स्थिति भगवान भरोसे छोड़ दी गई।
स्थानीय नागरिकों और राहगीरों ने इस स्थिति पर गहरा रोष जताया। स्थानीय लोगों का कहना था कि बापू की जयंती पर केवल फोटो खिंचवाने और माल्यार्पण करने के लिए लोग पहुंचते हैं, लेकिन प्रतिमा के आसपास पसरी गंदगी को हटाने की सुध किसी को नहीं रहती। यदि वर्ष में केवल एक दिन भी राष्ट्रपिता के स्मारक स्थलों को साफ-सुथरा और सम्मानजनक स्वरूप नहीं दिया जा सकता, तो फिर साल भर चलने वाले स्वच्छता अभियानों की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
- नगर निगम की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल
पटना नगर निगम (PMC) हर साल स्वच्छता सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग पाने के लिए करोड़ों रुपये के बजट का प्रावधान करता है। शहर में घर-घर कचरा उठाने और सड़कों की सफाई के तमाम दावे विज्ञापनों में किए जाते हैं।
इसके बावजूद शहर के मुख्य सार्वजनिक चौराहों पर ऐतिहासिक महापुरुषों की प्रतिमाओं की ऐसी उपेक्षा नगर निगम के निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाती है। नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की है कि ऐसे स्थलों के नियमित रखरखाव के लिए एक स्थायी एसओपी (मानक संचालन प्रक्रिया) तय की जानी चाहिए और जयंती जैसे विशेष अवसरों पर केवल रस्म अदायगी करने के बजाय स्थायी रूप से स्वच्छता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
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