PM SHRI Yojana UP: प्राथमिक और कम्पोजिट स्कूलों के लिए ₹11.37 करोड़ जारी, कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को मिलेंगी लर्निंग किट और डायरी

उत्तर प्रदेश के पीएम श्री प्राथमिक एवं कम्पोजिट स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों के लिए 11.37 करोड़ रुपये से लर्निंग किट, टीएलएम और डायरी दी जाएगी। 31 अक्टूबर तक काम पूरा होगा।

By INA News Desk
Sep 11, 2026 - 23:52
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PM SHRI Yojana UP: प्राथमिक और कम्पोजिट स्कूलों के लिए ₹11.37 करोड़ जारी, कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को मिलेंगी लर्निंग किट और डायरी
  • UP Basic Education: पीएम श्री स्कूलों में 31 अक्टूबर तक तैयार होगा टीएलएम, ब्लॉक स्तर पर सजेंगे 'निपुण टीएलएम मेला उत्सव'
  •  Nipun Bharat Mission UP: निपुण लक्ष्यों को गति देने के लिए योगी सरकार की बड़ी पहल, वर्कशीट और जादुई सामग्री से लैस होंगे नौनिहाल
  • Lucknow News: बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किए दिशा-निर्देश, प्रेरणा पोर्टल और विद्या समीक्षा केंद्र से होगी लर्निंग किट के वितरण की ट्रैकिंग

लखनऊ। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों को आधुनिक व मॉडल स्वरूप में ढालने के लिए संचालित ‘पीएम श्री योजना’ के तहत प्राथमिक स्तर की शिक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने ठोस कदम उठाया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के अंतर्गत प्रदेश के चयनित पीएम श्री प्राथमिक एवं कम्पोजिट विद्यालयों की कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम), स्टूडेंट लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी उपलब्ध कराने के लिए 11.37 करोड़ रुपये की विशेष धनराशि स्वीकृत की गई है। यह राशि सीधे विद्यालय स्तर पर आवश्यक सामग्री की खरीद और निर्माण के लिए जारी की जा रही है।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा एवं राज्य परियोजना निदेशक मोनिका रानी ने इस संबंध में सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों (बीएसए), डायट प्राचार्यों और खंड शिक्षा अधिकारियों (बीईओ) को विस्तृत प्रशासनिक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाई को रटने की पारंपरिक परिपाटी से मुक्त कर पूरी तरह गतिविधि-आधारित, रोचक और बाल-केंद्रित बनाना है, जिससे 'निपुण भारत मिशन' के तहत निर्धारित बुनियादी भाषा और गणितीय लक्ष्यों को समयबद्ध रूप से हासिल किया जा सके।

कक्षावार और विषयवार निपुण लक्ष्यों के अनुरूप बनेगा टीएलएम

शासनादेश के अनुसार, विद्यालयों में उपलब्ध कराई जाने वाली धनराशि का उपयोग कक्षा 1 से 5 तक के पाठ्यक्रम और पाठ्य बिंदुओं के अनुरूप शिक्षण सामग्री तैयार करने में किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक प्राथमिक कक्षा में ‘निपुण लक्ष्य’ पोस्टर, कक्षावार गणित व भाषा की समझ विकसित करने वाले तालिका पोस्टर, सूचना-शिक्षा-संचार (आईईसी) सामग्री और छात्रों के साप्ताहिक सीखने के स्तर को दर्ज करने के लिए नियमित आकलन ट्रैकर की व्यवस्था की जाएगी।

शिक्षकों को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध और पर्यावरण-अनुकूल सामग्री से टीएलएम तैयार करने के लिए प्रेरित किया गया है। इसके लिए जारी मानक सूची में कार्डबोर्ड, चार्ट पेपर, स्केच पेन, सुरक्षित एडहेसिव, अबेकस (गिनतारा), ग्लोब, भारत और विश्व के भौतिक व राजनीतिक मानचित्र, शैक्षणिक कठपुतलियां, घड़ी के मॉडल, वर्णमाला कार्ड तथा पशु-पक्षियों व परिवहन के साधनों से संबंधित सचित्र चार्ट शामिल किए गए हैं। विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि तैयार सामग्री को अलमारी में बंद रखने के बजाय कक्षा-कक्ष में इस प्रकार रखा जाए कि वह बच्चों की पहुंच में हो और सुरक्षित रहे।

प्रत्येक विद्यार्थी को मिलेगी स्टूडेंट लर्निंग किट और डायरी

योजना का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसमें केवल सामूहिक कक्षा सामग्री ही नहीं दी जाएगी, बल्कि कक्षा 1 से 5 तक नामांकित प्रत्येक छात्र-छात्रा को व्यक्तिगत रूप से ‘स्टूडेंट लर्निंग किट’ प्रदान की जाएगी। इस किट में दैनिक अभ्यास के लिए विशेष वर्कशीट, अवधारणा आधारित कार्यपत्रक, रंगीन वर्कबुक, ड्राइंग शीट, ओरिगेमी पेपर (कागज मोड़ने की कला), ऊन, रंगीन रिबन और गणितीय गणनाओं के लिए 'लर्निंग डाइस' शामिल होंगे।

इसके अतिरिक्त, प्रत्येक बच्चे को एक ‘स्टूडेंट डायरी’ भी दी जाएगी, जिसमें उनके दैनिक गृहकार्य, सीखने की प्रगति और शिक्षकों के सुझाव दर्ज होंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि लर्निंग किट का वितरण विद्यालय स्तर पर आयोजित होने वाली शिक्षक-अभिभावक बैठक (पीटीएम) में अभिभावकों की उपस्थिति में किया जाए, जिससे परिवार को भी यह जानकारी रहे कि बच्चे को क्या संसाधन मिले हैं और उनका घर पर कैसे अभ्यास कराना है।

15 अक्टूबर तक खरीद और 31 अक्टूबर तक निर्माण की समयसीमा

सामग्री के क्रियान्वयन को पारदर्शी और गतिमान रखने के लिए शासन ने समय-सारणी निर्धारित की है:

  • 15 अक्टूबर 2026 तक: सभी निपुण लक्ष्य पोस्टर, तालिकाएं और आईईसी सामग्री का मुद्रण कराकर उन्हें कक्षाओं में प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। साथ ही टीएलएम निर्माण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री की खरीद पूरी करनी होगी।

  • 31 अक्टूबर 2026 तक: शिक्षकों द्वारा बच्चों के सहयोग से विषयवार टीएलएम का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। इसी तिथि तक प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत लर्निंग किट और स्टूडेंट डायरी का वितरण भी संपन्न कराना होगा।

ब्लॉक स्तर पर सजेंगे 'निपुण टीएलएम मेला उत्सव'

शिक्षकों द्वारा अपनी रचनात्मकता से तैयार किए गए नवाचारी मॉडलों को पहचान और सम्मान दिलाने के लिए ब्लॉक संसाधन केंद्र (बीआरसी) स्तर पर ‘निपुण टीएलएम मेला उत्सव’ आयोजित किया जाएगा। इस मेले में प्रत्येक न्याय पंचायत और संकुल के शिक्षक अपने द्वारा विकसित शिक्षण साधनों का सजीव प्रदर्शन करेंगे। उत्कृष्ट और प्रभावी टीएलएम को चिन्हित कर जिले के अन्य सामान्य परिषदीय विद्यालयों में भी मॉडल के रूप में अपनाने के लिए साझा किया जाएगा।

डिजिटल पोर्टल और विद्या समीक्षा केंद्र से होगी मॉनिटरिंग

बजट के उपयोग और सामग्री की गुणवत्ता को लेकर जवाबदेही तय की गई है। विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक या प्रभारी प्रधानाध्यापक और ब्लॉक स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी की यह प्राथमिक जिम्मेदारी होगी कि सामग्री वास्तव में कक्षा में उपयोग हो रही हो।

विभाग की ओर से स्पष्ट किया गया है कि प्रेरणा पोर्टल, सपोर्ट सुपरविजन मॉड्यूल और लखनऊ स्थित 'विद्या समीक्षा केंद्र' के डेटा के माध्यम से खरीद, वितरण और उपयोग की डिजिटल ट्रैकिंग की जाएगी। किसी भी परिस्थिति में इस बजट को सामान्य स्टेशनरी, कार्यालयीन व्यय या गैर-शैक्षणिक कार्यों में खर्च नहीं किया जा सकेगा।

नीतिगत प्राथमिकता पर सरकार का जोर

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि प्राथमिक शिक्षा किसी भी बच्चे के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण नींव होती है। सरकार का उद्देश्य है कि पीएम श्री विद्यालयों में पढ़ने वाले गरीब और ग्रामीण परिवेश के बच्चों को भी निजी कॉन्वेंट स्कूलों की तर्ज पर आधुनिक शैक्षणिक संसाधन निःशुल्क मिलें।

वहीं महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि जब बच्चे खिलौनों, कार्डों और स्वयं बनाई गई कलाकृतियों के माध्यम से गणितीय संक्रियाएं और भाषा सीखते हैं, तो उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और सीखने का प्रतिफल (लर्निंग आउटकम) दीर्घकालिक बनता है। यह पहल परिषदीय विद्यालयों के शैक्षणिक परिवेश को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी।

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