Saharanpur News: अल्हेरी गांव में सरकारी राशन पर डाका, डीलर पर 5 यूनिट के कार्ड पर 4 यूनिट देने का गंभीर आरोप
सहारनपुर के अल्हेरी गांव में राशन डीलर पर 5 यूनिट कार्ड पर केवल 4 यूनिट राशन देने और दुकान बंद रखने का आरोप लगा है। ग्रामीणों ने डीएम और सीएम पोर्टल पर शिकायत कर कार्रवाई की मांग की।
सहारनपुर। जनपद सहारनपुर के विकास खंड मुजफ्फराबाद अंतर्गत ग्राम अल्हेरी में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत बांटे जाने वाले गरीबों के निवाले पर कोटेदार द्वारा डाका डाले जाने का गंभीर मामला प्रकाश में आया है। गांव के उचित दर विक्रेता (राशन डीलर) पर पात्र गृहस्थी और अंत्योदय कार्डधारकों के तय अनाज में अवैध कटौती करने, दुकान को निर्धारित समयानुसार न खोलकर मनमाने ढंग से बंद रखने तथा अनाज की बड़े पैमाने पर कालाबाजारी कर अनुपातहीन संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मनमानी से त्रस्त ग्रामीणों में गहरा असंतोष है और उन्होंने मामले की औपचारिक लिखित शिकायत जिलाधिकारी सहारनपुर तथा मुख्यमंत्री जनसुनवाई (आईजीआरएस) पोर्टल पर दर्ज कराई है।
ग्रामीणों द्वारा उच्चाधिकारियों को भेजे गए शिकायती पत्र में सरकारी खाद्यान्न वितरण व्यवस्था में व्याप्त मिलीभगत की पोल खोली गई है। आरोप है कि शासन द्वारा गरीबों के लिए भेजा जाने वाला पूरा अनाज पात्र परिवारों तक नहीं पहुंच रहा है, बल्कि बिचौलियों और कालाबाजारियों के जरिए खुले बाजार में बेचा जा रहा है।
5 यूनिट पर 4 यूनिट राशन, सीधे 20 फीसदी की चोरी
ग्राम अल्हेरी निवासी राव सखावत अली ने ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त शिकायती पत्र प्रशासन को सौंपते हुए बताया कि गांव का राशन डीलर राकेश पिछले लगभग दो दशकों (20 वर्षों) से उचित दर विक्रेता के पद पर कार्यरत है। लंबे समय से पद पर जमे होने के कारण डीलर का रवैया पूरी तरह मनमाना हो चुका है।
शिकायत में तथ्यात्मक रूप से यह उजागर किया गया है कि यदि किसी गरीब अथवा मजदूर परिवार के डिजिटल राशन कार्ड में 5 यूनिट दर्ज हैं, तो ई-पॉस मशीन पर अंगूठा लगवाते समय तो पूरा विवरण दर्ज होता है, लेकिन जब वास्तविक तौल होती है तो उपभोक्ता को केवल 4 यूनिट का ही अनाज दिया जाता है। इस प्रकार प्रत्येक कार्ड से 1 यूनिट का राशन काटकर उसे डीलर अपने पास रख लेता है। औसतन 20 प्रतिशत अनाज सीधे डीलर की जेब में चला जाता है, जिसे बाद में कालाबाजारी कर खुले बाजार में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता है।
दुकान से नदारद रहने का आरोप, मजदूर काट रहे चक्कर
राशन में अवैध कटौती के अलावा राशन की दुकान के खुलने का कोई निश्चित समय न होने से भी ग्रामीण परेशान हैं। सरकारी नियमानुसार प्रत्येक माह निर्धारित तिथियों में सुबह से शाम तक उचित दर दुकान का संचालन अनिवार्य है, ताकि दैनिक मजदूरी करने वाले लोग अपनी सुविधानुसार राशन प्राप्त कर सकें।
ग्रामीणों का आरोप है कि डीलर दुकान को अक्सर बंद रखता है और अपनी मर्जी से कभी-कभार ही कुछ घंटों के लिए दुकान खोलता है। इसके चलते गांव के गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं और दिहाड़ी मजदूर कई-कई दिनों तक राशन के लिए दुकान के चक्कर काटते रहते हैं। कई बार ग्रामीणों की दिहाड़ी छूट जाती है और खाली हाथ लौटना पड़ता है। जब कोई कार्डधारक अपने पूरे राशन की मांग करता है, तो उसके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है और राशन कार्ड निरस्त कराने की धमकी दी जाती है।
20 साल की संपत्ति और पूर्ति विभाग की भूमिका पर सवाल
शिकायतकर्ता राव सखावत अली का आरोप है कि पिछले 20 वर्षों में सरकारी अनाज के गबन और अवैध बिक्री के बल पर आरोपी कोटेदार ने अनुपातहीन और अकूत संपत्ति एकत्र की है। ग्रामीणों ने जांच एजेंसियों से मांग की है कि डीलर के पिछले 20 वर्षों के वित्तीय रिकॉर्ड, उसकी अचल संपत्तियों और बैंक खातों की जांच कराई जाए।
शिकायती पत्र में स्थानीय जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) कार्यालय और क्षेत्रीय पूर्ति निरीक्षक (सप्लाई इंस्पेक्टर) की भूमिका पर भी उंगली उठाई गई है। ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में कई बार तहसील दिवस और विभागीय स्तर पर मौखिक व लिखित शिकायतें दर्ज कराई गईं, लेकिन निचले स्तर के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत और डीलर के स्थानीय रसूख के कारण आज तक कोई धरातलीय और निष्पक्ष जांच नहीं की गई। हर बार केवल औपचारिक खानापूर्ति करके मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
ग्रामीणों की मांग: स्थलीय जांच, एफआईआर और लाइसेंस निरस्तीकरण
अल्हेरी गांव के ग्रामीणों ने शासन और जिला प्रशासन से दो-टूक मांग की है कि किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी जैसे उपजिलाधिकारी (एसडीएम) या जिला विकास अधिकारी स्तर के अधिकारी को गांव भेजकर गोपनीय स्थलीय जांच कराई जाए। राशन कार्डधारकों के मौके पर जाकर बयान दर्ज किए जाएं और ई-पॉस मशीन के स्टॉक व वास्तविक भौतिक स्टॉक का मिलान कराया जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि भ्रष्ट डीलर का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित अथवा निरस्त नहीं किया गया और किसी निष्पक्ष व्यक्ति को वितरण की जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई, तो वे कलेक्ट्रेट पर धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। साथ ही मांग की गई है कि गरीबों के अनाज की चोरी करने वाले के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 3/7 के अंतर्गत सुसंगत विधिक धाराओं में मुकदमा दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
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