Rampur News: बायोमीट्रिक समानता से जूझ रही जुड़वा बहनों को मिली पहचान, डीएम की पहल पर यूआईडीएआई ने जारी किए कार्ड

रामपुर में फिंगरप्रिंट और रेटिना की बायोमीट्रिक समानता के कारण जुड़वा बहनों का पहचान पत्र नहीं बन पा रहा था। डीएम के हस्तक्षेप से यूआईडीएआई मुख्यालय ने विशेष समाधान कर कार्ड जारी किए।

By INA News Desk
Sep 21, 2026 - 23:22
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Rampur News: बायोमीट्रिक समानता से जूझ रही जुड़वा बहनों को मिली पहचान, डीएम की पहल पर यूआईडीएआई ने जारी किए कार्ड

रामपुर/लखनऊ। सरकारी तंत्र में नियमों और तकनीकी प्रणालियों के फेर में जब कोई आम नागरिक उलझ जाता है, तो अक्सर मामलों के समाधान में वर्षों लग जाते हैं। हालांकि, उत्तर प्रदेश के रामपुर जनपद में प्रशासनिक संवेदनशीलता और सक्रिय पहल का एक अनूठा उदाहरण सामने आया है, जहां अत्यधिक दुर्लभ जैविक समानता के कारण पहचान के संकट से जूझ रहीं दो मासूम जुड़वा बहनों की समस्या का स्थायी समाधान निकाला गया। रामपुर नगर के मोहल्ला खारी कुआं निवासी जुबैर इलियास की जुड़वा पुत्रियों तुबा जुबैर और खिजरा जुबैर के फिंगरप्रिंट (उंगलियों के निशान) और आंखों की पुतलियों (रेटिना) के पैटर्न में असामान्य समानता होने के चलते राष्ट्रीय पहचान प्रणाली में तकनीकी अवरोध खड़ा हो गया था। जब भी दूसरी बहन के पंजीकरण का प्रयास किया जाता, सॉफ्टवेयर उसे पहले से पंजीकृत बच्ची का डुप्लीकेट डेटा मानकर आवेदन स्वतः निरस्त कर देता था।

परिवार पिछले कई वर्षों से इस तकनीकी विसंगति से जूझ रहा था। दोनों में से केवल एक ही बच्ची का पहचान पत्र बन सका था, जबकि दूसरी बच्ची बिना किसी आधिकारिक पहचान पत्र के रह गई थी। आधुनिक व्यवस्था में स्कूल में औपचारिक दाखिला कराने, छात्रवृत्ति योजनाओं, स्वास्थ्य बीमा और अन्य नागरिक अधिकारों के लाभ के लिए यह पहचान पत्र अनिवार्य आधार बन चुका है। ऐसे में दूसरी बेटी के भविष्य और शिक्षा को लेकर माता-पिता गंभीर मानसिक तनाव में थे।

जनता दर्शन में पहुंचा मामला, डीएम ने संभाली कमान

समस्या का कोई स्थानीय समाधान न निकलता देख पिता जुबैर इलियास ने रामपुर कलेक्ट्रेट में नियमित रूप से आयोजित होने वाले 'जनता दर्शन' में गुहार लगाने का निर्णय लिया। रामपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के समक्ष जब यह मामला प्रस्तुत किया गया, तो उन्होंने समस्या की जटिलता को समझा। यह केवल किसी लिपिकीय त्रुटि या दस्तावेज की कमी का मामला नहीं था, बल्कि केंद्रीय डेटाबेस के मुख्य बायोमीट्रिक मिलान एल्गोरिदम से जुड़ा एक अत्यंत दुर्लभ तकनीकी पेंच था।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए निर्देशों के क्रम में जिला प्रशासन ने इस मामले को औपचारिकता में टालने के बजाय व्यक्तिगत प्राथमिकता पर लिया। जिलाधिकारी ने स्थानीय स्तर पर जांच कराने के बाद सीधे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई), नई दिल्ली के उच्चाधिकारियों और सचिव स्तर पर दूरभाष व आधिकारिक पत्राचार के माध्यम से संपर्क स्थापित किया।

केंद्रीय तकनीकी मुख्यालय से कराया गया विशेष अपवाद समाधान

यूआईडीएआई के मुख्य सर्वर में किसी भी नागरिक के 10 उंगलियों के निशान और दोनों आंखों की पुतलियों का सूक्ष्म डेटा सुरक्षित रहता है। जब भी नया नामांकन होता है, तो प्रणाली पूरे देश के मौजूदा डेटा से उसका स्वतः मिलान करती है। यदि किसी नए आवेदक के बायोमीट्रिक किसी पूर्व पंजीकृत व्यक्ति से शत-प्रतिशत या अत्यधिक मेल खाते हैं, तो 'डी-डुप्लिकेशन' प्रणाली धोखाधड़ी या फर्जीवाड़े की आशंका में उसे तुरंत ब्लॉक कर देती है।

रामपुर की इन जुड़वा बहनों के मामले में भी यही प्रणालीगत अवरोध आ रहा था क्योंकि दोनों बच्चियों के बायोमीट्रिक लक्षण वैज्ञानिक दृष्टि से अत्यधिक समरूप पाए गए थे। रामपुर जिला प्रशासन की ओर से भेजे गए आधिकारिक सत्यापन और विशेष अनुरोध के बाद, नई दिल्ली स्थित तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने मामले को एक असाधारण परिस्थिति (Exceptional Case) के रूप में दर्ज किया। केंद्रीय मुख्यालय के विशेष तकनीकी हस्तक्षेप और आवश्यक वैधानिक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रणाली में अपवाद दर्ज किया गया। इसके बाद दूसरी जुड़वा बहन का पंजीकरण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ और दोनों बच्चियों के अलग-अलग पहचान पत्र जारी कर दिए गए।

तीन माह की निरंतर प्रशासनिक पैरवी से मिली सफलता

इस पूरी प्रक्रिया में लगभग तीन माह का समय लगा। इस दौरान जिला प्रशासन ने केंद्रीय प्राधिकरण से सतत संपर्क बनाए रखा ताकि तकनीकी अड़चन के कारण फाइल बंद न हो। दस्तावेज बनकर प्राप्त होने के बाद परिवार की वर्षों पुरानी चिंता समाप्त हो गई।

पिता जुबैर इलियास अपनी दोनों बेटियों तुबा और खिजरा को साथ लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी का व्यक्तिगत आभार प्रकट किया। पिता ने बताया कि इस पत्र के न होने के कारण वे स्कूल में नियमित प्रवेश कराने को लेकर संशय में थे और उन्हें लग रहा था कि शायद उनकी एक बेटी को कभी यह अनिवार्य दस्तावेज नहीं मिल पाएगा। जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल ने उनकी पारिवारिक चिंता को पूरी तरह समाप्त कर दिया।

तकनीकी बाधाओं के बीच मानवीय दृष्टिकोण की जीत

इस घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि प्रशासनिक व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को उसके विधिक और नागरिक अधिकार सुलभ कराना है। उन्होंने कहा कि तकनीक मानव जीवन को सरल बनाने के लिए है, लेकिन जब कभी तकनीकी मानक किसी वास्तविक नागरिक के मूल अधिकारों के आड़े आते हैं, तो वहां प्रशासनिक इच्छाशक्ति और मानवीय दृष्टिकोण के समन्वय से ही समाधान संभव होता है।

जनता दर्शन के माध्यम से इतने जटिल और केंद्रीय स्तर के तकनीकी मामले का सफल निस्तारण न केवल रामपुर प्रशासन की कार्यकुशलता को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि यदि अधिकारी संवेदनशील हों, तो आम नागरिकों की सबसे जटिल समस्याओं की राह भी आसान हो जाती है।

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