UP Basic Education: हर माह के चौथे शनिवार को परखी जाएगी परिषदीय स्कूलों की गुणवत्ता, बीईओ और प्रधानाध्यापकों की होगी अनिवार्य बैठक
योगी सरकार ने यूपी के परिषदीय स्कूलों की गुणवत्ता जांचने के लिए हर माह चौथे शनिवार को बीईओ-प्रधानाध्यापक समीक्षा बैठक अनिवार्य की है। निपुण भारत व डिजिटल लैब पर रहेगा फोकस।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने, विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को ऊंचा उठाने और सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए आधुनिक संसाधनों की उपयोगिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक नई निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार बेसिक शिक्षा विभाग ने तय किया है कि अब प्रत्येक विकासखंड स्तर पर माह के चतुर्थ शनिवार को खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) और प्रधानाध्यापकों के मध्य अनिवार्य रूप से मासिक समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक का मुख्य एजेंडा निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों की समयबद्ध प्राप्ति, प्री-प्राइमरी शिक्षा का सुदृढ़ीकरण और विद्यालयों में स्थापित स्मार्ट क्लास व आईसीटी लैब की नियमित कार्यशीलता की पड़ताल करना होगा।
शासन की मंशा है कि परिषदीय विद्यालयों में केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज न हो, बल्कि कक्षा-कक्ष में वास्तविक शिक्षण और बच्चों के अधिगम स्तर में निरंतर प्रगति दिखाई दे। इस नियमित समीक्षा तंत्र के माध्यम से विद्यालय स्तर पर आने वाली व्यावहारिक और तकनीकी बाधाओं को मौके पर ही चिन्हित कर उनका त्वरित निस्तारण किया जाएगा।
निपुण लक्ष्य और लर्निंग गैप को पाटने पर विशेष ध्यान
समीक्षा बैठकों के केंद्र में 'निपुण भारत मिशन' को रखा गया है। इसके अंतर्गत शैक्षिक कैलेंडर और मासिक पाठ्यक्रम के अनुसार निर्धारित शैक्षणिक लक्ष्यों की प्राप्ति की स्थिति परखी जाएगी। विभाग द्वारा उपलब्ध कराई गई शिक्षक संदर्शिकाओं, शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम) और गणित-भाषा किट का शिक्षक कक्षा में कितना प्रभावी उपयोग कर रहे हैं, इसका बिंदुवार आकलन होगा।
कोरोना काल अथवा अन्य कारणों से बच्चों में उत्पन्न सीखने की खाई (लर्निंग गैप) को समाप्त करने के लिए 'कैच-अप' उपचारात्मक शिक्षण की प्रगति देखी जाएगी। विद्यालयों में स्थापित पुस्तकालयों की पुस्तकों के नियमित उपयोग और पठन संस्कृति को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। इसके साथ ही, शिक्षकों द्वारा निपुण तालिका में दक्षताओं के अंकन, निपुण लक्ष्य ऐप के जरिए नियमित छात्र मूल्यांकन और 'परख' परीक्षा के परिणामों की गहन समीक्षा की जाएगी।
होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड और प्री-प्राइमरी का विस्तृत मूल्यांकन
पारंपरिक अंकपत्रों के स्थान पर विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास को मापने के लिए 'होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड' लागू किया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक मासिक बैठक में कम से कम दो प्रधानाध्यापक अपने विद्यालय के छात्रों के होलिस्टिक प्रोग्रेस कार्ड प्रस्तुत करेंगे और उनकी केस स्टडी को अभिलेखित किया जाएगा।
प्री-प्राइमरी शिक्षा के संदर्भ में विद्यालय परिसरों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों के समन्वय, बालवाटिका सामग्री के प्रयोग तथा यू-डायस मॉड्यूल में गतिविधियों की प्रविष्टि को देखा जाएगा। तीन से छह वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के शत-प्रतिशत नामांकन और उनकी दैनिक उपस्थिति को सुनिश्चित करने की जवाबदेही तय की जाएगी।
स्मार्ट क्लास, डिजिटल पुस्तकालय और तकनीकी संसाधनों की पड़ताल
बेसिक शिक्षा विभाग ने प्राथमिक विद्यालयों को हाईटेक बनाने के लिए बड़े पैमाने पर स्मार्ट क्लास, आईसीटी लैब और डिजिटल पुस्तकालयों की स्थापना की है। अब इन संसाधनों के वास्तविक उपयोग की जांच एनबीडीयूपी पोर्टल की 'मोबाइल डिवाइस मैनेजमेंट' (MDM) रिपोर्ट के आधार पर की जाएगी। अधिकारी यह जांचेंगे कि कौन से विद्यालय में इंटरएक्टिव पैनल और कंप्यूटर चालू स्थिति में हैं और कहां उपकरण तकनीकी खराबी के चलते बंद पड़े हैं।
इसके अतिरिक्त, यू-डायस प्लस (U-DISE+) पोर्टल पर छात्र विवरण का शुद्धिकरण, छात्र-छात्राओं की विशिष्ट पहचान 'अपार' (APAAR) आईडी का निर्माण और डिजिटल उपस्थिति रजिस्टरों के अद्यतन की स्थिति भी अनिवार्य रूप से जांची जाएगी।
ऑपरेशन कायाकल्प, पीएम पोषण और बालिका सुरक्षा की मॉनिटरिंग
समीक्षा बैठक का दायरा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि विद्यालयी सुविधाओं के रखरखाव पर भी केंद्रित होगा। 'स्कूल चलो अभियान' और आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों के चिन्हांकन की प्रगति परखी जाएगी। पीएम पोषण योजना (मध्यान्ह भोजन) के अंतर्गत मेन्यू के अनुसार भोजन, मौसमी फल और दूध वितरण की गुणवत्ता देखी जाएगी।
'ऑपरेशन कायाकल्प' के तहत लंबित अवस्थापना सुविधाओं, बाउंड्री वॉल, परिसर से अतिक्रमण हटाने तथा बालिकाओं व दिव्यांग बच्चों (CWSN) के लिए बने शौचालयों की साफ-सफाई व रनिंग वाटर व्यवस्था का मुआयना होगा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) के नियमित निरीक्षण, मीना मंच के क्रियान्वयन और रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण की प्रगति रिपोर्ट ली जाएगी। दिव्यांग बच्चों की शीघ्र पहचान के लिए 'प्रशस्त' ऐप के माध्यम से स्क्रीनिंग की स्थिति भी एजेंडे में शामिल रहेगी।
नेतृत्व का संदेश: परिणामोन्मुख होगी व्यवस्था
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने स्पष्ट किया है कि सरकार का संकल्प प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण और आधुनिक शिक्षा से जोड़ना है। बीईओ और प्रधानाध्यापकों की इस मासिक बैठक से शिक्षकों की समस्याओं का समाधान होगा और डिजिटल उपकरणों के प्रभावी संचालन हेतु आवश्यक मार्गदर्शन मिलेगा।
वहीं, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि इस मासिक बैठक को उद्देश्यपूर्ण बनाने के लिए शिक्षकों को डिजिटल प्रशिक्षण सामग्री और वीडियो उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इंटरएक्टिव पैनल, स्मार्ट क्लास और होलिस्टिक असेसमेंट के बेहतर उपयोग से परिषदीय विद्यालय निजी स्कूलों के समक्ष एक मजबूत विकल्प बनकर उभरेंगे।
What's Your Reaction?