UPITS 2026: यूपी के डेयरी और मत्स्य सेक्टर को मिलेगा वैश्विक बाजार, ग्रेटर नोएडा ट्रेड शो में 22 प्रमुख कंपनियां दिखाएंगी ताकत
यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में प्रदेश के डेयरी और मत्स्य सेक्टर को वैश्विक मंच मिलेगा। ग्रेटर नोएडा एक्सपो में 14 डेयरी और 8 मत्स्य कंपनियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत दिखाएंगी।
लखनऊ/ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले दुग्ध और मत्स्य उत्पादन क्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारी की है। गौतमबुद्ध नगर जनपद के ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में 25 से 29 सितंबर 2026 तक आयोजित होने वाले 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (UPITS 2026) के चौथे संस्करण में डेयरी और मत्स्य पालन को प्रमुख फोकस सेक्टर के रूप में शामिल किया गया है। इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी का प्राथमिक उद्देश्य प्रदेश के किसानों, पशुपालकों, मत्स्य पालकों और खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों के उत्पादों को देश और दुनिया के बड़े खरीदारों, निवेशकों और आयातकों से सीधा जोड़ना है।
राज्य सरकार की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पांच दिवसीय मेगा ट्रेड शो के माध्यम से प्रदेश की पारंपरिक उत्पादन क्षमता को आधुनिक तकनीक, बेहतर पैकेजिंग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) से एकीकृत करने का प्रयास किया जाएगा। आयोजन में डेयरी क्षेत्र से जुड़े 14 प्रमुख स्टेकहोल्डर्स और औद्योगिक ब्रांड्स तथा मत्स्य पालन व जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) से जुड़ी 8 अग्रणी कंपनियां अपने उत्पादों और तकनीकी नवाचारों का जीवंत प्रदर्शन करेंगी।
ग्रामीण समृद्धि और स्वरोजगार का बनेगा सशक्त माध्यम
उत्तर प्रदेश में डेयरी और मत्स्य पालन केवल कृषि से जुड़े सहायक व्यवसाय नहीं हैं, बल्कि ये लाखों ग्रामीण परिवारों की दैनिक आजीविका, महिला सशक्तिकरण और स्वरोजगार के सबसे बड़े स्रोत हैं। ट्रेड शो के दौरान इन दोनों क्षेत्रों में केंद्र व राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं, सब्सिडी मॉडल्स, क्रेडिट लिंकेज और उद्यमिता के अवसरों को सिंगल-विंडो प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित किया जाएगा।
प्रदर्शनी में स्वयं सहायता समूहों (SHGs), दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और युवा स्टार्टअप्स को अपने स्थानीय और ऑर्गेनिक उत्पादों को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मंच पर पेश करने का सीधा अवसर प्राप्त होगा। इससे बिचौलियों पर निर्भरता समाप्त होगी और ग्रामीण उत्पादकों को उनके उत्पाद का उचित व लाभकारी मूल्य मिल सकेगा।
प्रसंस्करण, कोल्ड चेन और लॉजिस्टिक्स में निवेश की संभावनाएं
मत्स्य क्षेत्र में केवल उत्पादन बढ़ाने तक ही ध्यान केंद्रित नहीं रखा गया है, बल्कि आधुनिक मछली पालन प्रणालियों जैसे बायोफ्लॉक, रिसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), उच्च गुणवत्ता वाले फ्लोटिंग फिश फीड, प्रशीतन (कोल्ड चेन), हाइजीनिक पैकेजिंग और रेडी-टू-ईट उत्पादों के प्रसंस्करण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। यूपीआईटीएस 2026 में मत्स्य क्षेत्र से जुड़ी कंपनियां यह प्रदर्शित करेंगी कि कैसे कम पानी और सीमित भूमि में भी वैज्ञानिक विधियों से मछली उत्पादन को कई गुना बढ़ाकर निर्यात के योग्य बनाया जा सकता है।
इसी प्रकार दुग्ध उत्पादन के पूरे इकोसिस्टम पशु नस्ल सुधार, पशु पोषण, डिजिटल मिल्क टेस्टिंग, स्वचालित दुग्ध संकलन केंद्र, कोल्ड स्टोरेज वैन और मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट्स को भी निवेशकों के सामने रखा जाएगा। इससे राज्य में मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) के नए अवसर सृजित होंगे और पनीर, घी, मक्खन, चीज और मिल्क पाउडर जैसे उत्पादों के निर्यात को पंख लगेंगे।
देश-विदेश के बी2बी और बी2सी खरीदारों से होगा सीधा संवाद
ट्रेड शो के दौरान अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, घरेलू बिजनेस-टू-बिजनेस (B2B) प्रतिनिधियों और आम उपभोक्ताओं (B2C) के साथ सीधे संवाद के लिए विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके माध्यम से सरकारी नीतियों, निजी क्षेत्र की पूंजी और तकनीकी विशेषज्ञों का एक मजबूत तालमेल देखने को मिलेगा।
दुग्ध आयुक्त एवं मत्स्य विभाग की महानिदेशक धनलक्ष्मी के. ने इस आयोजन की तैयारियों को लेकर बताया कि यूपीआईटीएस के चौथे संस्करण में दोनों विभागों की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक रहेगी। उन्होंने कहा कि देश-विदेश से आने वाले मेहमान और निवेशक यह देख सकेंगे कि उत्तर प्रदेश पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर किस तरह कृषि-संबद्ध क्षेत्रों में आधुनिक क्रांति की ओर अग्रसर है। दोनों विभागों ने अपनी सभी प्रदर्शनियों और संवाद सत्रों की तैयारी पूरी कर ली है।
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