Saharanpur RTO Case: परिवहन विभाग में 'क्लीन चिट' जांच पर मंडलायुक्त का कड़ा रुख, अब एसडीएम स्तर के अधिकारी करेंगे नए सिरे से जांच
सहारनपुर परिवहन विभाग में कथित भ्रष्टाचार की पुरानी जांच पर मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। डीडीओ की जांच पर सवाल उठने के बाद अब एसडीएम स्तर से दोबारा जांच होगी।
सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद में संभागीय परिवहन विभाग (आरटीओ) से जुड़े कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के मामले में एक नया और महत्वपूर्ण प्रशासनिक मोड़ सामने आया है। विभाग के अधिकारियों को पूर्व में दी गई 'क्लीन चिट' वाली जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े होने के बाद मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। मंडलायुक्त ने पूर्व में प्रस्तुत की गई जांच आख्या को अस्वीकार करते हुए समूची जांच पत्रावली जिलाधिकारी, सहारनपुर को स्थानांतरित कर दी है और स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि इस संवेदनशील प्रकरण की दोबारा जांच किसी वरिष्ठ उपजिलाधिकारी (एसडीएम) स्तर के प्रशासनिक अधिकारी से कराई जाए।
प्रशासनिक गलियारों में इस फैसले को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले हुई जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता और गुणवत्ता सीधे तौर पर कटघरे में आ गई थी। शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों की अनदेखी करने और मामले को आनन-फानन में रफा-दफा करने के आरोपों के बीच अब नए सिरे से जांच की रूपरेखा तैयार की जा रही है।
पूर्व जांच पर क्यों उठे गंभीर सवाल?
इस पूरे प्रकरण की शुरुआत परिवहन विभाग के कामकाज में व्यापक वित्तीय व प्रक्रियात्मक अनियमिता की शिकायतों से हुई थी। मंडलायुक्त स्तर से यह जांच पहले मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) सहारनपुर को सौंपी गई थी। सीडीओ ने अपने स्तर से इस जांच का जिम्मा जिला विकास अधिकारी (डीडीओ) धीरेन्द्र कुमार यादव को सौंपा था।
जिला विकास अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट में एआरटीओ (प्रशासन) मानवेन्द्र प्रताप सिंह और संभागीय निरीक्षक (आरआई) रोहित कुमार सिंह की कार्यप्रणाली को क्लीन चिट देते हुए राहत दे दी गई थी। हालांकि, जैसे ही यह रिपोर्ट उच्चाधिकारियों के सामने पहुंची, वैसे ही जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे।
शिकायतकर्ता मोहम्मद रागिब ने खुले तौर पर आरोप लगाया कि जांच अधिकारी ने विभागीय अधिकारियों को बचाने की नीयत से काम किया। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच के दौरान न तो उनका विस्तृत बयान दर्ज किया गया और न ही उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजी साक्ष्यों का समुचित भौतिक व अभिलेखीय परीक्षण कराया गया। शिकायतकर्ता का पक्ष सुने बिना ही एकतरफा निष्कर्ष निकालकर रिपोर्ट शासन को भेजने की तैयारी कर ली गई थी।
मंडलायुक्त का हस्तक्षेप: डीडीओ से हटी जांच, अब एसडीएम करेंगे पड़ताल
जांच प्रक्रिया में प्रक्रियात्मक खामियों और शिकायतकर्ता की आपत्तियों का संज्ञान लेते हुए मंडलायुक्त डॉ. रूपेश कुमार ने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने पहली जांच आख्या को वापस करते हुए स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों में सतही जांच स्वीकार नहीं की जाएगी।

मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी सहारनपुर को निर्देशित किया है कि वे कलेक्ट्रेट के किसी सक्षम उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को जांच अधिकारी नामित करें। जिला विकास अधिकारी से जांच का दायरा हटाकर एक मजिस्ट्रेट स्तर के अधिकारी को सौंपे जाने से यह तय हो गया है कि अब मामले की पड़ताल केवल विभागीय फाइलों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि कानूनी और विधिक दृष्टिकोण से भी साक्ष्यों का परीक्षण किया जाएगा।
क्या-क्या खंगालेगा नया जांच दल?
एसडीएम स्तर के अधिकारी द्वारा शुरू की जाने वाली नई जांच में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित पड़ताल की जाएगी:
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शिकायतकर्ता के मूल साक्ष्य: शिकायतकर्ता मोहम्मद रागिब द्वारा प्रस्तुत किए गए अभिलेखों, फिटनेस प्रमाणपत्रों, परमिट आवंटन और वित्तीय लेनदेन से जुड़े दस्तावेजों की मूल पत्रावलियों से जांच होगी।
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पूर्व जांच की विसंगतियां: यह परखा जाएगा कि जिला विकास अधिकारी की जांच में किन विशिष्ट बिंदुओं और साक्ष्यों को छोड़ा गया था और किस आधार पर अधिकारियों को क्लीन चिट दी गई थी।
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अधिकारियों की सीधी भूमिका: एआरटीओ (प्रशासन) और आरआई के अधिकार क्षेत्र में हुए कार्यों और जारी किए गए आदेशों की वैधानिकता का सरकारी नियमों के तहत मिलान किया जाएगा।
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कागजी परीक्षण व बयान दर्ज करना: दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित कराकर उनके विस्तृत बयान दर्ज किए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी व दस्तावेजीकरण कराया जाएगा।
निष्पक्ष जांच पर टिकी निगाहें
सहारनपुर में परिवहन विभाग लंबे समय से विभिन्न प्रकार की दलाली और फिटनेस जांच में धांधली के आरोपों को लेकर चर्चा में रहा है। ऐसे में मंडलायुक्त के इस कड़े कदम से उन अधिकारियों में हड़कंप मच गया है जो पुरानी जांच के सहारे राहत की सांस ले रहे थे।
जिले के प्रशासनिक हलकों में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एसडीएम स्तर की नई जांच में सभी तकनीकी और दस्तावेजी पहलुओं की निष्पक्ष पड़ताल हो पाएगी? क्या पूर्व जांच में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी? अब सभी की निगाहें जिलाधिकारी सहारनपुर द्वारा नामित किए जाने वाले नए जांच अधिकारी और उनके द्वारा सौंपी जाने वाली आगामी रिपोर्ट पर टिकी हैं।
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