Fake Drug Case: नकली दवा कारोबार पर बड़ा शिकंजा, सहारनपुर से लखनऊ तक फैले सप्लाई नेटवर्क का खुलासा
नकली दवाओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कार्रवाई में सहारनपुर से लखनऊ तक
- सहारनपुर से लखनऊ तक नकली दवा सप्लाई के कारोबार पर एफएसडीए का शिकंजा
- लखनऊ में एजाज से पूछताछ के बाद सामने आई सप्लाई कड़ी, सहारनपुर में तहखाने से मिली पैकिंग मशीनरी
- सहारनपुर में 32.5 किलो दवा स्ट्रिप्स, सैकड़ों प्रिंटेड कार्टन और पैकिंग सामग्री जब्त
- रुड़की-हरिद्वार से जुड़े लोगों और फर्मों की भूमिका भी जांच के दायरे में
- लखनऊ में भी दवाओं के खरीद-बिक्री अभिलेख, इनवॉइस और लेजर की जांच
- लखनऊ और सहारनपुर प्रकरण में एफआईआर, आगे की जांच जारी
लखनऊ। नकली दवाओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) की कार्रवाई में सहारनपुर से लखनऊ तक नकली दवा सप्लाई नेटवर्क की कड़ी सामने आई है। लखनऊ में नकली दवाओं की सप्लाई के मामले में एजाज के एफएसडीए की कार्रवाई के दायरे में आने के बाद उससे पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर सहारनपुर के नागल क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की गई। सहारनपुर में कार्रवाई के दौरान दवाओं की पैकिंग से जुड़ा पूरा सेटअप मिला। तहखाने से स्ट्रिपिंग मशीन, बैच स्टीरियो, डाई पंच और प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल समेत बड़ी मात्रा में पैकिंग सामग्री बरामद हुई। वहीं, लखनऊ में भी हुई एक अन्य कार्रवाई में दवाओं के खरीद-बिक्री अभिलेख, इनवॉइस और लेजर की जांच में लेवेरा-500 के दो बैच और राजकीय प्रयोगशाला की जांच में ‘प्रकृति से असली नहीं’ पाए गए। मामले में एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
- एजाज की पूछताछ से खुला सहारनपुर कनेक्शन
सहारनपुर निवासी एजाज का नाम लखनऊ के अमीनाबाद थाने में दर्ज एफआईआर में भी है। उस पर सस्ती/नकली दवाओं की सप्लाई से जुड़े होने का आरोप है। विगत दिनों इसी मामले में लखनऊ एसओजी और पुलिस ने एजाज को लखनऊ में गिरफ्तार किया था। पूछताछ में वह पूरे नेटवर्क की मुख्य कड़ी के रूप में सामने आया। जांच के अनुसार, एजाज इस नेटवर्क में अलग-अलग स्थानों से दवाओं और पैकिंग सामग्री की व्यवस्था कर संबंधित ठिकानों तक पहुंचाता था। लखनऊ में उससे पूछताछ के बाद मिली जानकारी के आधार पर सहारनपुर कनेक्शन की जांच आगे बढ़ाई गई और नागल क्षेत्र में कार्रवाई की गई।
- सहारनपुर में नकली दवा पैकिंग का ठिकाना मिला
सहारनपुर के ग्राम व पोस्ट कोटा, थाना नागल में एफएसडीए की कार्रवाई के दौरान एक मकान में दवाओं की पैकिंग से जुड़े सामान मिले। कमरे में 41 लुपिन और दो मैक्लिओड्स के कॉरुगेटेड बॉक्स पाए गए। इनके नीचे बने तहखाने में स्ट्रिपिंग मशीन, डिफकॉर्ट-6 की प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल, बैच स्टीरियो और विभिन्न डाई-पंच मिले। विनोद ने पूछताछ में बताया कि तहखाने में दवाओं की पैकिंग की जाती थी।
- 32.555 किलो दवा स्ट्रिप्स समेत भारी मात्रा में सामग्री जब्त
कार्रवाई में डिफकॉर्ट-6 की करीब 32.555 किलो स्ट्रिप्स, 973 प्रिंटेड कार्टन, रोसुुवास एफ-10 के 472 प्रिंटेड कार्टन, करीब 6.950 किलो पीली गोलियां और 4.900 किलो सफेद गोलियां मिलीं। इसके अलावा रोसुुवास एफ-10 और डिफकॉर्ट-6 की प्रिंटेड एल्युमिनियम फॉयल तथा करीब 6.370 किलो सादा एल्युमिनियम फॉयल भी बरामद हुआ। सहारनपुर में दर्ज कराई गई एफआईआर में विनीत कुमार, प्रतीश कुमार, प्रेम मलिक, इश्तकार भाई, रहमान, अमित सेन, एजाज और उबैर के नाम अवैध नकली दवा कारोबार से जुड़े होने का उल्लेख है। एफआईआर में प्रथमदृष्टया इसे संगठित सिंडिकेट के रूप में संचालित किए जाने की बात कही गई है। विनीत के बयान के अनुसार, इश्तकार, रहमान और अमित सैन टैबलेट, प्रिंटेड व सादा एल्युमिनियम फॉयल, प्रिंटेड कार्टन और बैच स्टीरियो जैसी सामग्री उपलब्ध कराते थे। पैकिंग के बाद तैयार स्ट्रिप्स को इश्तकार, रहमान, अमित सैन, एजाज और उबैर ले जाते थे।
- रुड़की से जुड़े लोगों की भूमिका भी जांच में
विनीत ने पूछताछ में रुड़की की प्रिजार्क हेल्थकेयर और रेडिएंट प्रिंटो पैक में काम करने की जानकारी दी। उसके बयान में वी-ब्रोस लाइफसाइंसेज समेत कुछ अन्य लोगों और ठिकानों का भी उल्लेख है। जांच एजेंसियां इन कड़ियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। एफएसडीए टीम ने बरामद सामग्री को फार्म-16 पर दर्ज कर 15 बोरों में सील किया। भारी स्ट्रिपिंग मशीन को कमरे और तहखाने में ही सील कर दिया गया। पूरी कार्रवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग की गई और विनीत के बयान की भी वीडियोग्राफी की गई। चार दवाओं के नमूने परीक्षण एवं विश्लेषण के लिए लिए गए।
- लखनऊ में अभिलेखों की पड़ताल से खुली सप्लाई चेन
दूसरी तरफ, लखनऊ के अमीनाबाद क्षेत्र में हुई जांच में अहमदाबाद, गुजरात की मेसर्स क्योरपाथ इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स श्रीकृष्ण फार्मास्युटिकल्स डिस्ट्रीब्यूटर्स और मेसर्स विनोद फार्मास्युटिकल्स डिस्ट्रीब्यूटर्स से जुड़े दस्तावेजों और लेनदेन की पड़ताल की गई। लेवेरा-500 के बैच एन2600803 और एन2601077 के नमूने जांच के लिए भेजे गए, जिन्हें राजकीय प्रयोगशाला ने ‘प्रकृति से असली नहीं’ पाया। खरीद-बिक्री अभिलेखों के मिलान में करीब 76,790 स्ट्रिप्स की खरीद के मुकाबले बिक्री और स्टॉक का आंकड़ा 85,832 स्ट्रिप्स दर्ज मिला। इस अंतर ने सप्लाई चेन और संबंधित अभिलेखों की जांच को और गहरा किया। इस पर एफएसडीए ने एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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