सम्भल में बर्क परिवार की दावेदारी बरकरार! इकबाल परिवार से समझौते की चर्चा खारिज, टिकट पर आर-पार के संकेत
सम्भल विधानसभा सीट पर सपा नेता ममलुकुर्रहमान बर्क ने चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। उन्होंने इकबाल परिवार के साथ किसी भी समझौते की चर्चा को पूरी तरह खारिज किया।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल की सियासत में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता ममलुकुर्रहमान बर्क ने विधानसभा चुनाव लड़ने की अपनी मंशा जाहिर करते हुए साफ कहा है कि उनका इरादा चुनाव लड़ने का है, लेकिन अंतिम फैसला जनता और कार्यकर्ताओं की राय के आधार पर होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर सपा से टिकट नहीं मिला, तो दूसरे विकल्पों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने फिलहाल किसी दूसरी पार्टी में जाने या निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला नहीं किया है।
ममलुकुर्रहमान बर्क ने कहा कि उन्होंने चुनाव लड़ने का फैसला कार्यकर्ताओं पर छोड़ रखा है। कार्यकर्ता उनसे चुनाव मैदान में उतरने की अपील कर रहे हैं और साथ देने का भरोसा दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी वह समाजवादी पार्टी में हैं और आगे की रणनीति परिस्थितियों के हिसाब से तय होगी।
जियाउर्रहमान के बयान को बताया सही
सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के उस बयान पर भी उन्होंने सहमति जताई, जिसमें सांसद ने कहा था कि उनके पिता को सम्भल से विधानसभा चुनाव लड़ने का अधिकार है और टिकट का फैसला अखिलेश यादव करेंगे। ममलुकुर्रहमान बर्क ने कहा कि सांसद होने के नाते जियाउर्रहमान ने अपनी पार्टी के लिहाज से सही बात कही है।
इकबाल परिवार से समझौते की चर्चा पर क्या बोले?
बर्क ने सांसद और विधायक के टिकट को लेकर बर्क परिवार और इकबाल परिवार के बीच किसी तय समझौते की बात खारिज कर दी। उन्होंने कहा कि टिकट की दावेदारी करना किसी परिवार से दरार होने का संकेत नहीं है। नवाब इकबाल महमूद और उनके परिवार की दावेदारी पर उन्होंने कहा कि सुहैल इकबाल को भी चुनाव लड़ने का पूरा अधिकार है। हालांकि, सुहैल इकबाल को टिकट मिलने की स्थिति में उनके चुनाव प्रचार को लेकर ममलुकुर्रहमान बर्क ने अभी कोई स्पष्ट प्रतिबद्धता नहीं जताई। उन्होंने कहा कि उस समय के हालात देखकर फैसला किया जाएगा।
सम्भल में टिकट की जंग होगी दिलचस्प!
ममलुकुर्रहमान बर्क के बयान से साफ है कि सम्भल विधानसभा सीट पर सपा के भीतर दावेदारी की सियासत तेज हो सकती है। अब निगाहें अखिलेश यादव के फैसले पर टिकी हैं कि पार्टी किस चेहरे पर भरोसा जताती है और टिकट की इस लड़ाई में बर्क परिवार तथा इकबाल परिवार की आगे की रणनीति क्या रहती है।
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