Sambhal News: मुल्ला अफ़रोज़ की NSA रद्द होने पर ममलुकुर्रहमान बर्क का बड़ा हमला- बेकसूरों को फंसाया गया, 2024 की हिंसा प्री-प्लान्ड थी
सम्भल में 2024 की हिंसा से जुड़े मामले में मुल्ला अफ़रोज़ की NSA के तहत निवारक हिरासत रद्द करने और उत्तर प्रदेश सरकार पर
उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में 2024 की हिंसा से जुड़े मामले में मुल्ला अफ़रोज़ की NSA के तहत निवारक हिरासत रद्द करने और उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत लगाए जाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट ने 29 सितंबर 2026 को मुल्ला अफ़रोज़ की NSA हिरासत को रद्द करते हुए कहा कि केवल कथित इकबालिया बयान निवारक हिरासत का एकमात्र आधार नहीं हो सकता।
इसी फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता मौलाना ममलुकुर्रहमान बर्क ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का स्वागत किया। उन्होंने दावा किया कि मुल्ला अफ़रोज़ का 2024 में शाही जामा मस्जिद से जुड़े घटनाक्रम से कोई संबंध नहीं था और उन्हें बेवजह फंसाया गया। ममलुकुर्रहमान बर्क ने आरोप लगाया कि हिंसा के दौरान कई बेकसूर लोगों के साथ मारपीट कर उन्हें जेल भेजा गया। उन्होंने पांच मुसलमानों की मौत को पुलिस फायरिंग से जोड़ते हुए गंभीर आरोप लगाए और कहा कि मृतकों के परिजनों पर पुलिस के खिलाफ बयान नहीं देने का दबाव बनाया गया। बर्क ने 2024 की घटना को प्री-प्लान्ड बताते हुए पुलिस और प्रशासन के तत्कालीन अधिकारियों पर भी सवाल खड़े किए। उनका आरोप है कि मस्जिद की ओर प्रशासन की नीयत साफ नहीं थी और सुबह अंधेरे में कार्रवाई से लोगों में यह डर पैदा हुआ कि मस्जिद को नुकसान पहुंचाया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि अगर किसी के खिलाफ गलत चार्जशीट या आरोप लगाए गए हैं तो अदालत में उन्हें चुनौती देने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले और 10 लाख रुपये की लागत का हवाला देते हुए बर्क ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए और कहा कि न्यायपालिका के सामने हर किसी को जवाबदेह होना चाहिए।
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