Fact Check: क्या पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी सरकार ने बंद किए 250 मदरसे? जानिए वायरल दावे का पूरा सच

सोशल मीडिया पर पश्चिम बंगाल की कथित 'सुवेंदु अधिकारी सरकार' द्वारा 250 मदरसे बंद करने का दावा पूरी तरह फर्जी और भ्रामक है। जानिए इस वायरल दावे की वास्तविक हकीकत।

By INA News Desk
Sep 24, 2026 - 16:59
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Fact Check: क्या पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी सरकार ने बंद किए 250 मदरसे? जानिए वायरल दावे का पूरा सच
  • West Bengal News: 'सुवेंदु अधिकारी सरकार' और 250 मदरसे बंद करने का दावा पूरी तरह भ्रामक, ममता बनर्जी हैं राज्य की मुख्यमंत्री
  • सोशल मीडिया पर फर्जी खबर वायरल: पश्चिम बंगाल में कैबिनेट फैसले और मदरसों पर फैलाया जा रहा सफेद झूठ, न कोई आदेश न फैसला
  • Fact Check: पश्चिम बंगाल सरकार के नाम पर 250 मदरसे बंद करने का दावा निराधार, नेता प्रतिपक्ष हैं सुवेंदु अधिकारी

कोलकाता। सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल मंचों पर पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य के मदरसों को लेकर एक दावा तेजी से प्रसारित किया जा रहा है। वायरल संदेश में यह दावा किया जा रहा है कि "पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य में 250 मदरसों को बंद करने का निर्णय लिया है और इसकी विस्तृत रिपोर्ट आगामी दुर्गा पूजा से पहले सार्वजनिक की जाएगी।" इसके साथ ही यह भी दावा जोड़ा जा रहा है कि मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई हालिया कैबिनेट बैठक में इस निर्णय पर आधिकारिक मुहर लगाई गई है।

आईएनए न्यूज (INA NEWS) की फैक्ट-चेक और संपादकीय टीम ने जब इस पूरे दावे की पड़ताल की, तो यह दावा पूरी तरह से मनगढ़ंत, तथ्यहीन और भ्रामक पाया गया। प्रशासनिक और राजनीतिक यथार्थ यह है कि पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं है और न ही सुवेंदु अधिकारी राज्य के मुख्यमंत्री हैं। राज्य में अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) की पूर्ण बहुमत वाली सरकार सत्तारूढ़ है और ममता बनर्जी प्रदेश की निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं।

  • दावे का विश्लेषण और प्राथमिक विसंगतियां

वायरल संदेश की पहली ही पंक्ति में संवैधानिक और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा ऐसा बुनियादी झूठ मौजूद है, जो किसी भी जागरूक नागरिक को सतर्क करने के लिए पर्याप्त है:

संवैधानिक पद की स्थिति: सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल सरकार में मुख्यमंत्री नहीं हैं। वे राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) हैं और भारतीय जनता पार्टी से नंदीग्राम सीट के विधायक हैं। पश्चिम बंगाल में वर्तमान में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार कार्यरत है।

कैबिनेट बैठक का दावा: संवैधानिक नियमों के अनुसार, कैबिनेट की बैठक सरकार के सत्तारूढ़ मंत्रिमंडल की होती है, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री करते हैं। विपक्ष के नेता का कैबिनेट बैठक बुलाने या उसमें नीतिगत फैसले लेने का कोई विधिक अधिकार नहीं होता। ऐसे में 'सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में कैबिनेट बैठक' का दावा पूरी तरह हास्यास्पद और काल्पनिक है।

  • क्या पश्चिम बंगाल सरकार ने 250 मदरसों को बंद करने का आदेश दिया है?

आईएनए न्यूज ने पश्चिम बंगाल सरकार के अल्पसंख्यक मामले एवं मदरसा शिक्षा विभाग (Minority Affairs and Madrasah Education Department) के आधिकारिक पोर्टल, राज्य सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग और आधिकारिक गजट की गहन समीक्षा की।

  • पड़ताल में सामने आया कि:

राज्य सरकार की ओर से 250 अथवा किसी भी संख्या में मान्यता प्राप्त मदरसों को बंद करने संबंधी कोई शासनादेश (Government Order), अधिसूचना या कैबिनेट प्रस्ताव पारित नहीं किया गया है।

राज्य मदरसा शिक्षा बोर्ड के अधीन संचालित किसी भी शैक्षणिक संस्थान पर प्रतिबंध लगाने या दुर्गा पूजा से पूर्व ऐसी कोई रिपोर्ट प्रस्तुत करने की आधिकारिक योजना अस्तित्व में नहीं है।

राज्य के मुख्य सचिव अथवा गृह विभाग द्वारा भी इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

  • सुवेंदु अधिकारी के बयान

पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी समय-समय पर राज्य में संचालित गैर-मान्यता प्राप्त अथवा अवैध रूप से संचालित मदरसों के सर्वेक्षण और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी करते रहे हैं। वे अक्सर पड़ोसी राज्यों (जैसे असम या उत्तर प्रदेश) की तर्ज पर पश्चिम बंगाल में भी असंबद्ध मदरसों की जांच की मांग उठाते रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया पर शरारती तत्वों और कुछ अनधिकृत हैंडल्स द्वारा सुवेंदु अधिकारी की किसी पुरानी राजनीतिक मांग या सार्वजनिक बयान को तोड़-मरोड़ कर उसे "कैबिनेट का आधिकारिक फैसला" बनाकर वायरल कर दिया गया। किसी राजनीतिक नेता की व्यक्तिगत या दलीय मांग और सरकार के आधिकारिक नीतिगत फैसले में बुनियादी अंतर होता है, जिसे इस भ्रामक संदेश में जानबूझकर छिपाया गया है।

  • सोशल मीडिया पर 'अर्धसत्य' और फर्जी खबरों का खतरा

डिजिटल युग में राजनीतिक और धार्मिक संवेदनशीलता वाले विषयों पर इस प्रकार की मनगढ़ंत खबरें जनमानस में भ्रम और वैमनस्य फैलाने के उद्देश्य से गढ़ी जाती हैं। बिना किसी आधिकारिक पुष्टि, प्रेस विज्ञप्ति या विश्वसनीय समाचार स्रोत के ऐसे दावों को साझा करना न केवल पत्रकारिता के सिद्धांतों के विपरीत है, बल्कि कानूनन भी भ्रामक सूचना के प्रसार की श्रेणी में आता है।

पाठकों और नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे राज्य स्तर के नीतिगत निर्णयों, कैबिनेट फैसलों या प्रशासनिक आदेशों की पुष्टि केवल संबंधित विभाग की अधिकृत वेबसाइट, आधिकारिक सरकारी प्रवक्ताओं या प्रतिष्ठित समाचार प्रतिष्ठानों के माध्यम से ही करें। सोशल मीडिया पर प्रसारित "पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी सरकार द्वारा 250 मदरसे बंद करने" का दावा पूरी तरह झूठा, भ्रामक और फर्जी है।

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