35 साल से रावण बना रहा मुस्लिम परिवार! सम्भल से मेरठ तक डिमांड, दशहरे के लिए रात-दिन एक कर रहा इंतखाब का परिवार
उत्तर प्रदेश के सम्भल में एक मुस्लिम परिवार साढ़े तीन दशक से विजयादशमी के लिए पुतले तैयार कर रहा है। मेरठ से मुरादाबाद तक इनके काम की जबर्दस्त मांग है।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
पिता से मिली विरासत, अब बेटा निभा रहा परंपरा! 11 रावण बनाने में जुटा पूरा परिवार, 30 और 35 फीट के पुतलों की कई शहरों में मांग
एक तरफ दशहरे पर रावण दहन की तैयारियां, तो दूसरी तरफ रावण के पुतले बनाने में जुटा एक मुस्लिम परिवार! सम्भल में इंतखाब का परिवार पिछले करीब 35 साल से रावण के पुतले बनाने का काम कर रहा है।

खास बात यह है कि इस काम की शुरुआत उनके पिता शाहिद हुसैन ने की थी और अब इंतखाब उसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। धर्म की पहचान से अलग, यह हुनर और मेहनत की ऐसी कहानी है, जो हर साल दशहरे की तैयारियों में अपनी अहम भूमिका निभाती है।
सम्भल से मेरठ तक इंतखाब के रावण की डिमांड
इंतखाब के मुताबिक, उनके बनाए रावण सम्भल ही नहीं, बल्कि मेरठ, गढ़ी, मुरादाबाद, कुंदरकी, खासपुर और बहजोई तक भेजे जाते हैं। इस बार 30 और 35 फीट ऊंचे रावण के पुतले तैयार किए जा रहे हैं। दशहरे से पहले ऑर्डर पूरा करने के लिए करीब एक महीने से काम चल रहा है।
11 रावण बनाने में दिन-रात एक
इंतखाब ने बताया कि इस बार करीब 11 रावण एक साथ तैयार किए जा रहे हैं। काम पूरा करने के लिए परिवार दिन-रात मेहनत कर रहा है। इस काम में घर की छह-सात महिलाएं और तीन-चार पुरुष हाथ बंटा रहे हैं।

बांस समेत दूसरी सामग्री से तैयार हो रहे इन पुतलों को अंतिम रूप देने में अभी दो-चार दिन की मेहनत और बाकी है। दशहरे पर जिस रावण का दहन किया जाएगा, उसे तैयार करने में इंतखाब का परिवार अपनी मेहनत और हुनर लगा रहा है।

पिता से शुरू हुआ यह काम आज परिवार की पहचान बन चुका है। सम्भल के इस परिवार की कहानी बताती है कि हुनर की कोई एक पहचान नहीं होती, मेहनत ही उसकी असली पहचान बनती है।
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