सम्भल में आस्था का अनोखा संगम! दरगाह पर उमड़ते हैं हिंदू-मुस्लिम, सालों पुराने मेले में मांगी जाती हैं मन्नतें
उत्तर प्रदेश के सम्भल में लगने वाला ऐतिहासिक मेला साझा संस्कृति का बड़ा प्रतीक है, जहां हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग मिलकर दरगाह पर चादर और दुआएं पेश करते हैं।
Report : उवैस दानिश, सम्भल
सम्भल में आस्था, अकीदत और आपसी भाईचारे की ऐसी तस्वीर देखने को मिलती है, जहां मजहब की दीवारें छोटी पड़ जाती हैं और श्रद्धा के आगे हर फर्क मिट जाता है। यहां सालों से लगने वाले एक पुराने मेले में बड़ी तादाद में हिंदू और मुस्लिम समाज के लोग पहुंचते हैं और दरगाह पर हाजिरी लगाकर मन्नतें मांगते हैं।

मौहम्मद फैजान खान के मुताबिक, यहां हजरत सय्यद निजामुद्दीन साबरी रहमतुल्लाह अलैह का आस्ताना मुबारक है, जबकि हजरत सय्यद बदीउद्दीन जिंदा शाह मदारा रहमतुल्लाह अलैह का चिल्ला मुबारक भी मौजूद है।

उन्होंने बताया कि यह मेला वर्षों से लगता आ रहा है और दूर-दराज से अकीदतमंद यहां पहुंचकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। इस मेले की सबसे खास बात यहां नजर आने वाला गंगा-जमुनी तहजीब का रंग है।

फैजान खान का दावा है कि दरगाह पर मुस्लिमों के साथ बड़ी संख्या में हिंदू भाई-बहन भी पहुंचते हैं। लोग अपनी-अपनी आस्था के मुताबिक दुआएं करते हैं और मन्नतें मांगते हैं। मेले के दौरान दिनभर जायरीनों के आने का सिलसिला जारी रहता है।

दरगाह पर फातिहा पढ़ी जाती है और असर से मगरिब के बीच कुल शरीफ की रस्म अदा की जाती है। यह मेला सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आपसी सौहार्द और साझा विरासत की ऐसी मिसाल भी है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग एक साथ पहुंचकर मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम देते नजर आते हैं।
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