बिजनौर में गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर: जनाजे के सम्मान में कांवड़ियों ने थामे कदम और बंद किया DJ

यूपी के बिजनौर स्थित स्योहारा में कांवड़ियों ने पूर्व सभासद के जनाजे के सम्मान में अपनी यात्रा रोक दी और DJ बंद कर दिया। इस पहल की हर तरफ तारीफ हो रही है।

Aug 12, 2026 - 23:49
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बिजनौर में गंगा-जमुनी तहजीब की खूबसूरत तस्वीर: जनाजे के सम्मान में कांवड़ियों ने थामे कदम और बंद किया DJ
Bijnor Kanwar Yatra Communal Harmony
  • बिजनौर में दिखी सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल, पूर्व सभासद के जनाजे के सम्मान में कांवड़ियों ने रोकी यात्रा
  • Bijnor Harmony News: स्योहारा में जनाजा गुजरने तक कांवड़ियों ने बंद किया DJ, रोकी यात्रा; मिसाल बना आपसी भाईचारा
  • यूपी के बिजनौर में दिखी अनोखी मिसाल: जनाजे के सम्मान में कांवड़ियों ने रोकी यात्रा और बंद किया DJ

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के स्योहारा कस्बे से सामाजिक सद्भाव और आपसी भाईचारे की एक बेहद सुकून देने वाली खबर सामने आई है। हरिद्वार से जल लेकर लौट रहे कांवड़ियों ने स्थानीय पूर्व सभासद मास्टर नसीम जफर के जनाजे के सम्मान में न केवल अपनी यात्रा कुछ देर के लिए रोक दी, बल्कि भक्ति गीतों में बज रहे डीजे (DJ) को भी बंद कर दिया। यह घटना तब घटी जब कांवड़ियों का समूह और जनाजा एक ही मार्ग पर आमने-सामने आ गए थे। कांवड़ियों ने जनाजा आगे निकल जाने के बाद ही अपनी यात्रा दोबारा शुरू की और डीजे चालू किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में घटी इस घटना को लोग भारत की गंगा-जमुनी तहजीब का एक जीवंत उदाहरण मान रहे हैं और सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर पर इसकी जमकर सराहना की जा रही है।

देश भर में कांवड़ यात्रा की धूम है और हरिद्वार से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र गंगाजल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। इस बीच उत्तर प्रदेश के बिजनौर अंतर्गत स्योहारा कस्बे से एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिसने आपसी सद्भाव की मिसाल कायम की है। स्योहारा के पूर्व नगर पालिका सभासद मास्टर नसीम जफर का निधन हो गया था, जिसके बाद उनका जनाजा अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। ठीक उसी समय सड़क के दूसरे हिस्से से हरिद्वार से आ रहे कांवड़ियों का एक जत्था तेज आवाज में डीजे बजाते हुए गुजर रहा था। जब कांवड़ियों को अहसास हुआ कि सामने से एक अंतिम यात्रा (जनाजा) निकल रही है, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के अपनी यात्रा के कदम रोक लिए और डीजे की आवाज पूरी तरह बंद कर दी।

पूरा घटनाक्रम स्योहारा कस्बे के मुख्य मार्ग का है। पूर्व सभासद मास्टर नसीम जफर क्षेत्र के एक सम्मानित नागरिक थे और उनके जनाजे में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग शामिल थे। जब जनाजा सड़क पर आगे बढ़ रहा था, तभी सामने से कांवड़ श्रद्धालुओं का समूह अपनी परंपरा के अनुसार शिव भजनों की धुन पर आगे बढ़ रहा था।

दोनों समूहों के आमने-सामने आने पर कांवड़ियों ने संवेदनशीलता और सम्मान का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत डीजे ऑपरेटर को संगीत बंद करने को कहा और अपनी यात्रा के काफिले को सड़क के एक किनारे रोक दिया। जब तक जनाजा पूरी तरह से मार्ग से गुजर कर आगे नहीं निकल गया, तब तक कांवड़िए शांत खड़े रहे। जनाजे के दूर चले जाने के बाद कांवड़ियों ने भगवान भोलेनाथ के जयकारों के साथ अपना डीजे पुन: शुरू किया और अपनी आगे की यात्रा पर निकल पड़े।

इस घटना को देखकर वहां मौजूद लोग भावुक हो गए। जनाजे में शामिल स्थानीय नागरिकों ने कांवड़ियों के इस कदम की दिल से सराहना की और उनका आभार व्यक्त किया। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस तरह की पहल से समाज में कटुता खत्म होती है और सदियों पुराना भाईचारा मजबूत होता है।

दूसरी ओर, कांवड़ियों के जत्थे का कहना था कि हर धर्म में अंतिम यात्रा का सम्मान करना इंसानियत का पहला फर्ज है। किसी की दुखद अंतिम यात्रा के समय तेज आवाज में संगीत बजाना हमारे संस्कारों के खिलाफ है, इसलिए हमने सम्मानपूर्वक अपनी यात्रा कुछ देर रोक दी थी। स्थानीय पुलिस और प्रशासन ने भी कांवड़ियों के इस विवेकपूर्ण और शांतिप्रिय व्यवहार की प्रशंसा की है।

वर्तमान दौर में जहां कई बार छोटी-छोटी बातों को लेकर सामाजिक तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है, वहीं बिजनौर की इस घटना ने पूरे देश को एक सकारात्मक संदेश दिया है। सोशल मीडिया पर इस घटना की तस्वीरें और चर्चाएं तेजी से वायरल हो रही हैं। लोग इसे भारतीय संस्कृति की उस महान परंपरा का हिस्सा बता रहे हैं, जहां विविधता में एकता और एक-दूसरे के धार्मिक-सामाजिक संस्कारों का सम्मान किया जाता है। स्थानीय स्तर पर भी दोनों समुदायों के बीच विश्वास और सौहार्द का माहौल और अधिक गहरा हुआ है।

इस घटना ने यह साबित कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर जनता की समझदारी और संवेदनशीलता किसी भी बड़े विवाद को टाल सकती है। बिजनौर पुलिस प्रशासन ने इस सकारात्मक पहल को देखते हुए अन्य क्षेत्रों में भी यात्रा मार्गों पर इसी तरह के शांति और सहयोगपूर्ण माहौल को बनाए रखने की अपील की है। आने वाले दिनों में जब कांवड़ यात्रा अपने चरम पर होगी, तब स्योहारा की यह मिसाल अन्य श्रद्धालुओं और नागरिकों के लिए भी एक मार्गदर्शक का काम करेगी। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस तरह के संदेशों को समाज में व्यापक रूप से प्रसारित करने का संकल्प लिया है।

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