मोहन भागवत के अमेरिकी बयान पर मौलाना अरशद मदनी का सवाल, बोले- नफरत फैलाने वालों पर भी हो कार्रवाई
जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सद्भाव को जमीन पर लागू करने की मांग की।
देवबंद। जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के उस हालिया वक्तव्य पर अपनी प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने विदेशों में सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सभी पंथों के समान आदर की बात कही थी। मौलाना मदनी ने कहा कि यदि किसी समुदाय को देश से बेदखल करने की बात करने वाला सच्चा हिंदू नहीं हो सकता, तो ऐसे भड़काऊ विचार रखने वाले तत्वों के खिलाफ स्पष्ट व असरदार कदम उठाए जाने चाहिए।
उन्होंने पूछा कि अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ कटुता फैलाने, हिंसा का समर्थन करने और सामाजिक व आर्थिक बहिष्कार की वकालत करने वाले लोगों पर अब तक क्या कार्रवाई की गई है। इसके साथ ही धार्मिक स्थलों, शिक्षण संस्थानों को निशाना बनाने और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर सवाल खड़े करने वालों की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
मौलाना मदनी ने कहा कि विदेश में आपसी सौहार्द और सम्मान की बातें करना स्वागत योग्य है, लेकिन इसकी सबसे ज्यादा आवश्यकता वर्तमान समय में भारत की धरती पर है। यदि इन विचारों को सही मायनों में अमल में लाना है, तो नफरत की राजनीति करने वालों से पूरी तरह दूरी बनानी होगी और उनके विरुद्ध सख्त कदम उठाने होंगे। इससे देश और दुनिया में यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि सद्भाव के विचार केवल संबोधनों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें देश के भीतर भी पूरी गंभीरता के साथ लागू किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत सभी धर्मों और समुदायों के लोगों का साझा वतन है और किसी भी सोच की परख भाषणों से नहीं बल्कि जमीनी स्तर पर संविधान द्वारा प्रदत्त समान अधिकारों की रक्षा से होती है।
What's Your Reaction?







