Jaunpur: जौनपुर के शुभम सिंह चंदेल बने IAS, UPSC में 378वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान।

जिले के सिकरारा क्षेत्र के शेरवा धोबहा गांव निवासी शुभम सिंह चंदेल ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा

Mar 6, 2026 - 21:20
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Jaunpur: जौनपुर के शुभम सिंह चंदेल बने IAS, UPSC में 378वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान।
जौनपुर के शुभम सिंह चंदेल बने IAS, UPSC में 378वीं रैंक हासिल कर बढ़ाया जिले का मान।

जौनपुर। जिले के सिकरारा क्षेत्र के शेरवा धोबहा गांव निवासी शुभम सिंह चंदेल ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा में 378वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में स्थान प्राप्त किया है। शुभम की इस उपलब्धि से परिवार के साथ-साथ पूरे जनपद में खुशी की लहर है और लोग उन्हें बधाई दे रहे हैं।

शुभम सिंह चंदेल दीनानाथ सिंह ‘छेदी’ के पुत्र हैं। साधारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले शुभम के पिता ने हमेशा बच्चों की शिक्षा को प्राथमिकता दी। शुभम ने प्रारंभिक शिक्षा के बाद ही प्रशासनिक सेवा में जाने का लक्ष्य तय कर लिया था और उसी दिशा में लगातार मेहनत करते रहे।

लगातार प्रयास और धैर्य का परिणाम उन्हें अपने पांचवें प्रयास में मिला। शुरुआती असफलताओं से निराश हुए बिना उन्होंने अपनी कमियों को सुधारा और आखिरकार सिविल सेवा परीक्षा में सफलता हासिल कर भारतीय प्रशासनिक सेवा तक पहुंचने का सपना पूरा किया।

शुभम की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है। उन्होंने हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई सेंट पैट्रिक्स स्कूल से पूरी की। इसके बाद देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी धनबाद से इंजीनियरिंग की डिग्री प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा के बाद समाज में बदलाव लाने की इच्छा से उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया और दिल्ली में रहकर कई वर्षों तक कड़ी मेहनत की।

परिणाम घोषित होने के बाद परिवार में खुशी का माहौल है। शुभम की मां शकुंतला सिंह ने बताया कि बेटे की सफलता की खबर सुनकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए। उन्होंने कहा कि यह पिता का सपना और बेटे की मेहनत का परिणाम है।वहीं शुभम की बहन सोना सिंह ने बताया कि शुभम शुरू से ही पढ़ाई में तेज रहा है और हमेशा बड़े लक्ष्य के लिए मेहनत करता रहा।

शुभम सिंह चंदेल की सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार की जाए, तो गांव की पगडंडियों से निकलकर भी देश की सर्वोच्च सेवाओं तक पहुंचा जा सकता है।

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