सोनू मलान ने तोड़ी रूढ़ियां, अलीगढ़ से नोएडा तक रोडवेज बस दौड़ाकर बनीं महिला स्वावलंबन की मिसाल
अलीगढ़ की सोनू मलान बनीं मंडल की पहली महिला बस चालक। प्रतिदिन अलीगढ़ से नोएडा के बीच 540 किमी बस चलाकर सोशल मीडिया पर भी दे रही हैं आत्मनिर्भरता की सीख।
सड़क परिवहन जैसे पारंपरिक रूप से पुरुषों के प्रभाव वाले क्षेत्र में अलीगढ़ की बेटी सोनू मलान ने अपने अटूट साहस और लगन से नई पहचान कायम की है। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम में बतौर बस चालक तैनात सोनू प्रतिदिन अलीगढ़ से नोएडा मार्ग पर रोडवेज बस का सुरक्षित संचालन करती हैं। दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन लगभग 540 किलोमीटर का सफर तय कर वे यात्रियों को सुरक्षित उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं। नवरात्र के पावन वातावरण में उनकी यह कर्तव्यनिष्ठा प्रदेश में महिला सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन के सरकारी संकल्प को जमीन पर साकार करती नजर आ रही है।
जट्टारी क्षेत्र के हजियापुर गांव की निवासी 28 वर्षीय सोनू मलान अलीगढ़ परिक्षेत्र की इकलौती महिला बस चालक हैं। वे रोजाना इस लंबे मार्ग पर चार फेरे लगाती हैं। बस की कमान एक युवती के हाथों में देखकर शुरुआत में मुसाफिर भले ही अचरज महसूस करते हैं, लेकिन सोनू की सधी हुई और सुरक्षित ड्राइविंग देखने के बाद सभी उनकी कार्यकुशलता की मुक्तकंठ से सराहना करते हैं।
गाड़ियों के प्रति उनका आकर्षण बचपन से ही रहा। मात्र बारह वर्ष की उम्र में उन्होंने अपने पैतृक गांव के खेतों में ट्रैक्टर चलाना सीख लिया था। यही आरंभिक रुचि समय के साथ उनके करियर का मजबूत आधार बन गई। राज्य सरकार द्वारा परिवहन निगम में महिला चालकों को अवसर देने की योजना शुरू होने पर सोनू ने अपनी योग्यता साबित की और चयन पाकर स्टीयरिंग संभाल ली।
सड़कों पर अपनी पेशेवर जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ डिजिटल मंचों पर भी सोनू ने जबरदस्त प्रभाव स्थापित किया है। यूट्यूब, इंस्टाग्राम और फेसबुक पर उनके दस लाख से अधिक प्रशंसक जुड़े हैं। अपने कार्य से जुड़े सकारात्मक पलों को वीडियो के माध्यम से साझा कर वे अन्य युवतियों को भी अपनी क्षमता पहचानने और समाज में आत्मनिर्भर बनने की निरंतर प्रेरणा दे रही हैं।
पारिवारिक सहयोग को अपनी सफलता का आधार बताते हुए सोनू का कहना है कि जब उन्होंने इस पेशे को चुना, तो कई तरह के संकोच और सामाजिक सवाल सामने आए। उनके पिता एक सेवानिवृत्त शिक्षक हैं और भाई भी परिवहन विभाग में ही चालक के पद पर सेवाएं दे रहे हैं। पूरे परिवार ने उनके निर्णय पर भरोसा जताया। बस में यात्रा करने वाली छात्राएं और महिलाएं सोनू को चालक सीट पर देखकर आत्मविश्वास और सुरक्षा का अनुभव करती हैं। रूढ़ियों को पीछे छोड़कर आगे बढ़ने की यह दास्तान दर्शाती है कि निष्ठा और लगन के बल पर हर कठिन चुनौती को पार किया जा सकता है।
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