स्मार्ट सिटी सहारनपुर में सिस्टम फेल: काशीराम कॉलोनी में नालों का गंदा पानी सड़कों पर, सुध लेने को तैयार नहीं जिम्मेदार

करोड़ों रुपये खर्च कर सहारनपुर को 'स्मार्ट सिटी' की फेहरिस्त में शामिल कराने का दम भरने वाले नगर निगम और प्रशासनिक

Jul 4, 2026 - 13:31
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स्मार्ट सिटी सहारनपुर में सिस्टम फेल: काशीराम कॉलोनी में नालों का गंदा पानी सड़कों पर, सुध लेने को तैयार नहीं जिम्मेदार
स्मार्ट सिटी सहारनपुर में सिस्टम फेल: काशीराम कॉलोनी में नालों का गंदा पानी सड़कों पर, सुध लेने को तैयार नहीं जिम्मेदार

सहारनपुर। करोड़ों रुपये खर्च कर सहारनपुर को 'स्मार्ट सिटी' की फेहरिस्त में शामिल कराने का दम भरने वाले नगर निगम और प्रशासनिक अमले के दावों की हवा दिल्ली रोड स्थित वार्ड संख्या 11 की मान्यवर काशीराम कॉलोनी में आकर पूरी तरह निकल जाती है। बसपा शासनकाल में बनी इस बहुमंजिला कॉलोनी के वासी आज प्रशासनिक लापरवाही के चलते नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। नियमित सफाई कर्मचारियों की भारी-भरकम फौज होने के बावजूद यहां सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है, जिससे निवासियों में भारी आक्रोश है।
कॉलोनी के निवासियों का गंभीर आरोप है कि नगर निगम के रिकॉर्ड में यहां के लिए पर्याप्त संख्या में सफाई कर्मचारी तैनात हैं, लेकिन धरातल पर महज गिने-चुने कर्मचारी ही कभी-कभार दिखाई देते हैं। आलम यह है कि कॉलोनी के मुख्य और आंतरिक नालों में सालों से सिल्ट (कीचड़) जमा है। नालों की समय पर मुस्तैदी से सफाई न होने के कारण उनमें कीड़े और मच्छरों की फौज पनप रही है, जिससे पूरे इलाके में भयंकर संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है। जलभराव के चलते नालों का बदबूदार गंदा पानी ओवरफ्लो होकर मुख्य सड़कों पर बह रहा है।


इस अव्यवस्था की सबसे गाज ग्राउंड फ्लोर (नीचे की मंजिल) पर रहने वाले परिवारों पर गिरी है। दूषित और मलीन पानी सड़कों से होता हुआ सीधे लोगों के कमरों और रसोइयों में घुस रहा है। महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि चौबीसों घंटे आ रही भीषण दुर्गंध और सीलन के कारण उनका घर में बैठना और जीना मुहाल हो चुका है।
जनता का फूटा गुस्सा जाहिर करते हुए निवासियों ने बताया कि उन्होंने नगर निगम के कंट्रोल रूम सहित कई स्तरों पर मौखिक और लिखित शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन सुनवाई हमेशा सिफर रही। सफाई कर्मचारी हर बार 'आगे से पानी की निकासी न होने' का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते हैं और काम अधूरा छोड़ जाते हैं। हैरानी की बात यह है कि क्षेत्र की सफाई इंस्पेक्टर (SFI) ने आज तक इस काशीराम कॉलोनी का मौका मुआयना करना मुनासिब नहीं समझा और सुपरवाइजर भी पूरी तरह से इस बदहाली से आंखें मूंदे बैठा है।
अधिकारियों की इस बेरुखी के साथ-साथ जनता में जनप्रतिनिधियों के खिलाफ भी गहरा रोष है। कॉलोनी वासियों का साफ कहना है कि चुनाव जीतने के बाद से जनता की सुध लेने वाला कोई नहीं है; यहां तक कि पार्षद पति भी आज तक कॉलोनी में आकर देखना तो दूर, झांकने तक नहीं आए हैं।
जनता को उनके हाल पर छोड़ देने का यह रवैया सिस्टम पर एक बड़ा तमाचा है। सवाल यह उठता है कि जब सरकार सफाई व्यवस्था के लिए बजट और कर्मचारियों की फौज दोनों दे रही है, तो फिर इस लापरवाही की सजा जनता क्यों भुगते? अब देखना यह है कि इस जमीनी हकीकत के सामने आने के बाद नगर निगम के आला अधिकारी नींद से जागते हैं या फिर वार्ड 11 की जनता को ऐसे ही नरक जैसे हालात में रहने के लिए छोड़ दिया जाएगा।

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