मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को भेंट किया जीआई क्राफ्ट निर्मित अद्भुत शिवलिंग, नंदी और त्रिशूल ।

Varanasi News: श्रावण मास के पावन अवसर पर शनिवार को काशी पहुंचे वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश ...

By INA News Desk
Aug 2, 2025 - 19:32
149 Views
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को भेंट किया जीआई क्राफ्ट निर्मित अद्भुत शिवलिंग, नंदी और त्रिशूल ।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को भेंट किया जीआई क्राफ्ट निर्मित अद्भुत शिवलिंग, नंदी और त्रिशूल ।
  • काशी के तीन जी.आई. क्राफ्ट्स, जिसमें मेटल रिपोंसी क्राफ्ट, मीनाकारी और मेटल कास्टिंग क्राफ्ट का समन्वय है अरघा वाला शिवलिंग 
  • इस विशिष्ट उपहार में मीनाकारी की चौकी पर सुशोभित हैं अरघा में शिवलिंग, पांच फन वाला नाग, नंदी, प्रसाद, कलश में गंगा जल, त्रिशूल और चंदन भस्म
  • 18 इंच ऊंची और 15 इंच चौड़ी कलाकृति को काशी के तीन धातु शिल्पियों ने एक सप्ताह की मेहनत से है बनाया 

Varanasi News: श्रावण मास के पावन अवसर पर शनिवार को काशी पहुंचे वाराणसी के सांसद और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जी.आई. रजिस्टर्ड बनारस मेटल रिपोंसी क्राफ्ट से निर्मित अनूठी कलाकृति भेंट की गई। इस शिल्प में काशी के तीन जी.आई. क्राफ्ट्स, जिसमें मेटल रिपोंसी क्राफ्ट, मीनाकारी और मेटल कास्टिंग क्राफ्ट का अद्भुत समन्वय देखने को मिला।

पद्मश्री सम्मानित जी.आई. विशेषज्ञ डॉ. रजनी कांत ने बताया कि इस विशिष्ट उपहार में मीनाकारी की चौकी पर सुशोभित 18 इंच ऊंची और 15 इंच चौड़ी कलाकृति शामिल है। इसमें अरघा में शिवलिंग, पांच फन वाला नाग, नंदी, प्रसाद, कलश में गंगा जल, त्रिशूल और चंदन भस्म मौजूद है। इस कृति को धातु शिल्पी अनिल कसेरा, रघुनाथ कसेरा और मीनाकारी कलाकार अरुण कुमार वर्मा ने एक सप्ताह के निरंतर प्रयास और जी.आई. विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में श्रावण मास की थीम पर तैयार किया।

डॉ. रजनी कांत ने कहा कि यह कलाकृति काशी की समृद्ध शिल्प परंपरा और जी.आई. की ताकत को दर्शाती है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने काशी के सिल्क और भदोही की कालीन सहित बुनकरों और शिल्पियों को प्रोत्साहित करने के लिए 'स्वदेशी और लोकल से ग्लोबल' का आह्वान किया। उन्होंने जी.आई. को कानूनी रूप से लोकल पहचान बताते हुए इसके संरक्षण और प्रचार के लिए ठोस कदम उठाने का संदेश दिया। शिल्पी समाज ने इस सम्मान पर गर्व व्यक्त किया और इसे काशी की कला और संस्कृति को वैश्विक मंच पर ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

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