UP Electronics Hub: इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यूपी की लंबी छलांग, 43 हजार करोड़ का निवेश और 3 लाख नए रोजगार

उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश और 55% से ज्यादा मोबाइल उत्पादन के साथ राज्य 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर अग्रसर है।

By INA News Desk
Sep 13, 2026 - 23:06
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UP Electronics Hub: इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में यूपी की लंबी छलांग, 43 हजार करोड़ का निवेश और 3 लाख नए रोजगार

  • मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में उत्तर प्रदेश का दबदबा: देश के 55 फीसदी से अधिक फोन का उत्पादन, सेमीकंडक्टर पार्क से बनेगी नई पहचान

  • यूपी बना देश का नया टेक हब: यमुना एक्सप्रेसवे पर 1 हजार एकड़ का सेमीकंडक्टर पार्क, 24 हजार से अधिक स्टार्टअप्स ने पकड़ी रफ्तार

  • Yogi Government Tech Push: इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई और सेमीकंडक्टर से 1 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी की ओर उत्तर प्रदेश, 200 से ज्यादा कंपनियां सक्रिय

लखनऊ: उत्तर प्रदेश अपनी पारंपरिक औद्योगिक छवि से आगे निकलकर देश के प्रमुख हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में तेजी से स्थापित हो रहा है। राज्य सरकार की निवेश-हितैषी नीतियों, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और वृहद तकनीकी मानव संसाधन के समन्वय से प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डीप-टेक जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 200 से अधिक बड़ी कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं। इस क्षेत्र में अब तक 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रत्यक्ष पूंजी निवेश धरातल पर उतर चुका है, जिसने 3 लाख से ज्यादा युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं।

प्रदेश की इस औद्योगिक प्रगति का सबसे मजबूत आधार मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र बना है। आज देश भर में बनने वाले कुल मोबाइल फोनों में से 55 प्रतिशत से अधिक का उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में हो रहा है। इसके साथ ही गौतमबुद्ध नगर (नोएडा और ग्रेटर नोएडा) में दो बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर पूरी तरह विकसित हो चुके हैं। राज्य अब केवल मोबाइल असेंबली तक सीमित नहीं है, बल्कि टैबलेट, लैपटॉप, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स, होम अप्लायंसेज, सोलर सेल, डिफेंस एवं लॉजिस्टिक्स ड्रोन तथा औद्योगिक रोबोटिक्स के निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम और वैश्विक कंपनियों की मौजूदगी

राज्य सरकार द्वारा लागू की गई 'उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025' निवेशकों को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण उत्प्रेरक साबित हुई है। फैक्टशीट के अनुसार, इस विशिष्ट नीति के तहत अब तक 3,800 करोड़ रुपये से अधिक के नए निवेश प्रस्ताव आकर्षित किए जा चुके हैं।

आज दुनिया की दिग्गज विनिर्माण और तकनीकी कंपनियां राज्य के इकोसिस्टम का हिस्सा बन चुकी हैं। इनमें एलजी, हैयर, डिक्सन टेक्नोलॉजीज, रैपे, एडवर्ब, सैमसंग और भगवती जैसी प्रमुख इकाइयां शामिल हैं। इन कंपनियों की उपस्थिति ने राज्य में कलपुर्जा निर्माण (कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग) और सहायक लघु उद्योगों का एक सुदृढ़ जाल बिछा दिया है, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो रही है और स्थानीय आपूर्ति शृंखला मजबूत हुई है।

सेमीकंडक्टर सेक्टर में यूपी का रणनीतिक प्रवेश

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण की सुदृढ़ नींव तैयार करने के बाद उत्तर प्रदेश ने अब सेमीकंडक्टर और माइक्रोचिप निर्माण के रणनीतिक क्षेत्र में मजबूत दस्तक दी है। केंद्र सरकार के 'सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0' (जिसका कुल वित्तीय परिव्यय 1.27 लाख करोड़ रुपये है) के अंतर्गत उत्तर प्रदेश को देश का एक प्रमुख केंद्र माना गया है।

इस दिशा में केंद्र सरकार से स्वीकृत एक सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (ATMP) सुविधा राज्य में स्थापित की जा रही है। इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की यह अत्याधुनिक इकाई यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) क्षेत्र के सेक्टर-28 में स्थित है, जिसमें 3,700 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया जा चुका है।

1,000 एकड़ का सेमीकंडक्टर पार्क और वैश्विक डिजाइन कंपनियां

यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में 1 हजार एकड़ भूमि पर विकसित किया जा रहा सेमीकंडक्टर पार्क राज्य की भविष्य की प्रौद्योगिकी-आधारित अर्थव्यवस्था का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है। इस पार्क में चिप निर्माण के साथ-साथ डिजाइनिंग, फैब्रिकेशन, पैकेजिंग और टेस्टिंग से जुड़ी सहायक इकाइयों को एक ही परिसर में जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।

राज्य में एनएक्सपी (NXP), रेनेसास (Renesas), क्वालकॉम (Qualcomm) और कैडेंस (Cadence) जैसी वैश्विक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से जुड़ी अनुसंधान एवं डिजाइन कंपनियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश केवल विनिर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP) निर्माण में भी अपनी साख स्थापित कर रहा है।

जेवर एयरपोर्ट, फ्रेट कॉरिडोर और रोबोटिक्स पार्क का नेटवर्क

हाई-टेक उद्योगों की सबसे पहली जरूरत त्वरित और निर्बाध लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की होती है। उत्तर प्रदेश में आगामी जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर तथा छह से आठ लेन के एक्सप्रेसवे का संजाल वैश्विक आपूर्ति शृंखला से सीधा जुड़ाव प्रदान कर रहा है।

इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा में 75 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जा रहा 'रोबोटिक्स एवं एआई कंप्यूटिंग पार्क' प्रदेश को ऑटोमेशन और एडवांस कंप्यूटिंग का प्रमुख केंद्र बना रहा है। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर का दोहरा लाभ उद्योगों को एक साथ मिल रहा है।

आईटी और डेटा सेंटर में 28 हजार करोड़ का निवेश

राज्य की तकनीकी यात्रा केवल हार्डवेयर तक सीमित नहीं है। राज्य की आईटी नीति के तहत अब तक 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश दर्ज किया गया है। राजधानी लखनऊ में 100 एकड़ में फैली एचसीएल आईटी सिटी और प्रदेश के विभिन्न संभागों में स्थापित सात एसटीपीआई (STPI) आईटी पार्क टियर-2 शहरों में सॉफ्टवेयर सेवाओं का विस्तार कर रहे हैं।

डेटा सुरक्षा और डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले डेटा सेंटर क्षेत्र में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित हुआ है। ग्रेटर नोएडा में स्थापित हो रहे हाइपरस्केल डेटा सेंटर्स पूरे उत्तर भारत की डिजिटल ट्रैफिक आवश्यकताओं को पूरा करने की क्षमता विकसित कर रहे हैं।

24 हजार से अधिक स्टार्टअप्स और डीप-टेक नवाचार

उद्योगों के साथ-साथ नवाचार को बढ़ावा देने के लिए स्टार्टअप परिदृश्य को भी तेजी से विस्तार दिया गया है। उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 24 हजार से अधिक डीपीआईआईटी (DPIIT) पंजीकृत स्टार्टअप्स संचालित हैं। भारत सरकार के स्टेट स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क-2024 में उत्तर प्रदेश को ‘टॉप परफॉर्मर’ राज्य का दर्जा मिल चुका है।

'उत्तर प्रदेश स्टार्टअप पॉलिसी-2026' के माध्यम से नोएडा और लखनऊ में 'यू-हब' (U-Hub) की स्थापना की जा रही है, जिसका विशेष ध्यान डीप-टेक, एआई, हेल्थ-टेक और क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता और इनक्यूबेशन सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

विशाल तकनीकी मानव संसाधन बनी सबसे बड़ी ताकत

सेमीकंडक्टर और एडवांस्ड इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे जटिल उद्योगों की निरंतर सफलता कुशल इंजीनियरों और तकनीशियनों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। उत्तर प्रदेश के पास देश का सबसे बड़ा शैक्षणिक और तकनीकी कार्यबल मौजूद है। राज्य में 760 से अधिक इंजीनियरिंग व तकनीकी संस्थान संचालित हैं, जिनमें प्रतिवर्ष चार लाख से अधिक छात्र-छात्राएं प्रवेश लेते हैं।

आईआईटी कानपुर, आईआईटी बीएचयू, एमएनएनआईटी प्रयागराज और एनसीआर स्थित तकनीकी विश्वविद्यालयों का नेटवर्क सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए उद्योग-उन्मुख पाठ्यक्रम तैयार कर रहा है। इस मानव पूंजी, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और नीतिगत स्पष्टता के बल पर उत्तर प्रदेश राज्य की अर्थव्यवस्था को 1 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ा रहा है।

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