Raebareli News: ऊंचाहार में शिव महापुराण कथा में पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ, बोले- सनातन की पताका ऊंची रहेगी तो सुरक्षित रहेगा भारत

रायबरेली के ऊंचाहार में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिव भक्ति भारत की एकता का आधार है और सनातन की पताका ऊंची रहने पर देश सदैव सुरक्षित रहेगा।

By INA News Desk
Sep 13, 2026 - 23:09
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Raebareli News: ऊंचाहार में शिव महापुराण कथा में पहुंचे सीएम योगी आदित्यनाथ, बोले- सनातन की पताका ऊंची रहेगी तो सुरक्षित रहेगा भारत

  • धर्म केवल पूजा पद्धति नहीं, समाज की जीवन शक्ति है: रायबरेली में बोले मुख्यमंत्री योगी, शिव भक्ति को बताया सांस्कृतिक एकता का आधार

  • ऊंचाहार में शिव महापुराण कथा: पंडित प्रदीप मिश्रा का सीएम योगी ने किया अभिनंदन, कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय के आयोजन में हुए शामिल

  • विरासत और विकास की यात्रा साथ-साथ: रायबरेली के ऊंचाहार में गरजे योगी आदित्यनाथ, तुलसीदास और सनातन परंपरा का किया गुणगान

रायबरेली / ऊंचाहार: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार, 13 सितंबर को रायबरेली जनपद के ऊंचाहार में आयोजित भव्य श्री शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन सम्मिलित होकर व्यासपीठ का नमन किया और कथा श्रवण की। इस पावन अवसर पर विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक भारत की पावन धरा पर धार्मिक एवं आध्यात्मिक कथाओं की यह अविरल परंपरा जीवित रहेगी, तब तक सनातन धर्म की पताका कभी झुक नहीं सकती। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सनातन की ध्वजा आकाश में ऊंची लहराती रहेगी, तब तक दुनिया की कोई भी ताकत भारत का बाल बांका नहीं कर सकती।

मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि भगवान शिव की आराधना केवल एक व्यक्तिगत उपासना का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समूचे भारत की सांस्कृतिक, भौगोलिक और आध्यात्मिक एकात्मता की सुदृढ़ आधारशिला है। उत्तर में हिमालय की कंदराओं से लेकर दक्षिण में रामेश्वरम के पावन तट तक स्थापित द्वादश ज्योतिर्लिंग भारत के सांस्कृतिक भूगोल और भावनात्मक एकात्मकता का सजीव दर्शन कराते हैं।

शंखनाद और डमरू की मंगल ध्वनि से हुआ भव्य स्वागत

कथा पंडाल में मुख्यमंत्री के आगमन पर अत्यंत श्रद्धापूर्ण और अनुशासित वातावरण देखने को मिला। वैदिक बटुकों ने पारंपरिक परिधानों में समवेत स्वर में शंखनाद और डमरू वादन की मंगल ध्वनि कर मुख्यमंत्री की अगवानी की। कथा के मुख्य आयोजक एवं उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य, रसद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा ऊंचाहार विधायक मनोज पांडेय ने मुख्यमंत्री को शॉल, श्रीफल और पवित्र कलश में गंगाजल भेंट कर उनका नागरिक अभिनंदन किया।

इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने व्यासपीठ के समक्ष शीश नवाया और देश-विदेश में शिव कथा के माध्यम से अलख जगा रहे प्रख्यात कथा व्यास पंडित प्रदीप मिश्रा का अंगवस्त्र व स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया।

धर्म समाज की जीवन शक्ति और राष्ट्र की प्रेरक ऊर्जा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भारतीय दर्शन की गहराई को समझाते हुए कहा कि सनातन परंपरा में धर्म को केवल कर्मकांड, अनुष्ठान अथवा पूजा पद्धति की संकुचित सीमाओं में कभी नहीं बांधा गया। धर्म वास्तव में समाज की प्राणवायु, प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य-बोध और राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी प्रेरक शक्ति है।

उन्होंने कहा कि मध्यकाल के दौरान जब भारत पर गंभीर राजनीतिक और सामरिक संकट आए, विदेशी आक्रांताओं ने देश की आस्था और पवित्र धर्मस्थलों को निर्ममता से निशाना बनाया, उस भीषण दौर में भी व्यासपीठों से प्रवाहित होने वाली ज्ञान और भक्ति की रसधार ने भारत की सामाजिक एकजुटता और आत्मबल को टूटने नहीं दिया।

गोस्वामी तुलसीदास और रामकथा की सामाजिक चेतना का स्मरण

अपने वक्तव्य के दौरान मुख्यमंत्री ने महाकवि गोस्वामी तुलसीदास के योगदान को विशेष रूप से याद किया। उन्होंने कहा कि मुग़ल काल के घोर तिमिर में तुलसीदास जी ने रामचरितमानस और रामकथा के माध्यम से गांव-गांव में जनचेतना की ज्योति प्रज्वलित की थी। जब उन्हें तत्कालीन सम्राट अकबर के दरबार में नवरत्न बनने का प्रस्ताव दिया गया, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के यह घोषणा कर दी थी कि उनके एकमात्र राजा और स्वामी प्रभु श्रीराम हैं।

कठिन कालखंड में रामलीलाओं का मंचन और 'राजा रामचंद्र की जय' का उद्घोष केवल धार्मिक नारा नहीं, बल्कि समाज के भीतर स्वाभिमान और स्वतंत्रता की भावना को जीवित रखने वाला राष्ट्र-मंत्र था। उसी प्रकार की आध्यात्मिक जागृति आज भी समाज को एकजुट रखने के लिए अनिवार्य है।

विविधता में एकता का संदेश: उत्तर से दक्षिण तक एक ही भाव

देश की आंतरिक एकता का उदाहरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के भिन्न-भिन्न प्रांतों में खान-पान, वेशभूषा, भाषा और बोलियां भले ही अलग दिखाई दें, लेकिन भगवान शिव के प्रति समर्पण और भक्ति का भाव पूरे राष्ट्र में एक समान स्पंदित होता है। तमिलनाडु के रामेश्वरम में जिस आत्मीयता से श्रद्धालु 'हर-हर महादेव' का जयघोष करते हैं, वही निष्ठा और ऊर्जा उत्तर प्रदेश के काशी, उत्तराखंड के केदारनाथ, महाराष्ट्र के त्र्यंबकेश्वर, असम के कामाख्या और गुजरात के सोमनाथ में परिलक्षित होती है।

उन्होंने कहा कि भगवान शिव लोकमंगल के प्रतीक हैं, जिन्होंने सृष्टि के कल्याण हेतु हलाहल विष को अपने कंठ में धारण किया था। शिव की साधना समाज से नकारात्मकता, भेदभाव और सामाजिक विकारों को दूर कर सर्वजन हिताय का मार्ग प्रशस्त करती है।

उत्तर प्रदेश के आध्यात्मिक केंद्रों का गौरवगान

मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा की चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में जब मर्यादा और आदर्श आचरण की बात आती है तो हमारा ध्यान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या की ओर जाता है। जब ज्ञान, मुक्ति और आंतरिक चेतना की खोज होती है तो अविनाशी काशी मार्गदर्शन करती है। प्रेम, निष्काम भक्ति और समर्पण की अनुभूति हमें मथुरा-वृंदावन में होती है, जबकि सामाजिक समरसता और संगम की पवित्रता प्रयागराज में साकार होती है।

उन्होंने नैमिषारण्य और शुकतीर्थ की पावन भूमि का भी उल्लेख किया, जहां ऋषियों ने हजारों वर्ष पूर्व वेदों और पुराणों के गूढ़ ज्ञान को लिपिबद्ध कर मानवता के कल्याण के लिए सुरक्षित रखा था।

ऊंचाहार में विरासत और विकास का संतुलित संगम

मुख्यमंत्री ने आयोजन के लिए कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय और उनके परिवार की सराहना करते हुए कहा कि ऊंचाहार के नागरिकों ने एक ऐसा जनप्रतिनिधि चुना है जो अपने क्षेत्र के भौतिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को भी पूरे मनोयोग से सहेज रहा है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि आज का उत्तर प्रदेश 'विरासत भी और विकास भी' के सिद्धांत पर दृढ़ता से अग्रसर है। एक ओर जहां प्रदेश में आधुनिक एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, उद्योग और रोजगार के अवसर तेजी से सृजित हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्राचीन तीर्थों का कायाकल्प कर सांस्कृतिक चेतना को पुनर्स्थापित किया जा रहा है।

संबोधन के समापन पर मुख्यमंत्री ने उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं से शिव महापुराण के पावन संदेशों को अपने दैनिक आचरण में ढालने की अपील की और संपूर्ण वातावरण 'नमः पार्वती पतये, हर-हर महादेव' के गगनभेदी उद्घोष से गुंजायमान हो उठा।

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