Hanuman Ansh OTT Controversy: ₹2 करोड़ के बजट वाली फिल्म ने कमाए ₹235 करोड़ से अधिक, मेकर्स ने 100 करोड़ की ओटीटी डील की अफवाहों को नकारा
नीम करौली बाबा पर बनी 'हनुमान अंश' ने बॉक्स ऑफिस पर ₹236 करोड़ से अधिक की कमाई कर इतिहास रच दिया है। फिल्म के ओटीटी रिजेक्शन और 100 करोड़ की डील की अफवाहों पर मेकर्स ने स्थिति स्पष्ट की।
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सिनेमाघरों में 'हनुमान अंश' का ऐतिहासिक चमत्कार: कभी ओटीटी ने अपमानित कर ठुकराई थी कहानी, अब सोशल मीडिया पर अधिकारों की बोली पर छिड़ी बहस
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Neem Karoli Baba Biopic: 25 स्क्रीन्स से शुरू होकर बॉक्स ऑफिस पर रचा इतिहास, निर्देशक विशाल चतुर्वेदी बोले- 'ओटीटी के पूर्वाग्रह को तोड़ना जरूरी था'
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हनुमान अंश और ओटीटी का सच: डिजिटल अधिकारों पर 100 करोड़ के ऑफर के दावों पर प्रोड्यूसर का बयान, जानिए क्या है पूरी सच्चाई
मुंबई: भारतीय सिनेमा के इतिहास में समय-समय पर ऐसी रचनाएं सामने आती हैं जो स्थापित फिल्म उद्योग के सभी पारंपरिक समीकरणों, स्टारडम के दावों और भारी-भरकम प्रचार तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर देती हैं। संत नीब करौरी बाबा (नीम करौली बाबा) के प्रारंभिक जीवन और आध्यात्मिक संदेशों पर आधारित भक्ति-प्रधान फीचर फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर ऐसा ही ऐतिहासिक करिश्मा दिखा रही है। मात्र 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने रिलीज के पांचवें-छठे सप्ताह में वैश्विक स्तर पर 236 करोड़ रुपये से अधिक का ग्रॉस कलेक्शन अर्जित कर समूचे फिल्म व्यापार को स्तब्ध कर दिया है।
इस अप्रत्याशित व्यावसायिक सफलता के समानांतर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर एक तीखी बहस छिड़ गई है। सोशल मीडिया पर यह दावा तेजी से प्रसारित हो रहा है कि रिलीज से पूर्व प्रमुख ओटीटी (ओवर-द-टॉप) स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स ने इस फिल्म के डिजिटल राइट्स को महज 1 करोड़ रुपये में भी खरीदने से इनकार कर दिया था और अब फिल्म के 200 करोड़ पार होने के बाद वही प्लेटफॉर्म 100 से 150 करोड़ रुपये में अधिकार खरीदने के लिए निर्माताओं के पीछे भाग रहे हैं। हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच फिल्म के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी के पूर्व बयानों और सह-निर्माता रागिनी सोना के ताजा बयानों ने इस पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट कर दी है।
ओटीटी रिजेक्शन का कड़वा अनुभव: निर्देशक का दर्द
फिल्म के लेखक और निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने हालिया साक्षात्कारों में यह स्वीकार किया था कि निर्माण और रिलीज के शुरुआती दौर में उन्हें स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स के स्तर पर गंभीर उपेक्षा और कड़वे अनुभवों से गुजरना पड़ा था। विशाल चतुर्वेदी के अनुसार, जब उन्होंने एक बड़े ओटीटी प्लेटफॉर्म के अधिकारियों के समक्ष इस विषय की अवधारणा रखी थी, तो उन्हें बेहद रूखे और अपमानजनक ढंग से खारिज कर दिया गया था।
निर्देशक ने बताया कि मनोरंजन उद्योग में बैठे कई नीति-निर्धारकों के दिमाग में एक खास तरह की संकीर्ण धारणा घर कर चुकी थी कि पारंपरिक आस्था, साधु-संतों के जीवन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों पर आधारित कंटेंट को आज का युवा दर्शक वर्ग स्वीकार नहीं करेगा। उन्हें यह सलाह तक दी गई थी कि सिनेमाघरों में पैसा लगाने के बजाय इसे किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर मामूली कीमत पर बेचकर अपनी मूल लागत निकाल लें, क्योंकि बड़े सितारों के बिना थियेटरों में दर्शक नहीं जुटेंगे।
विशाल चतुर्वेदी और उनकी निर्माता टीम ने इस सलाह को नकारते हुए जनता की अदालत यानी सिनेमाघरों में जाने का जोखिम उठाया। निर्देशक का कहना था कि यदि किसी फिल्म को सीधे सिनेमाघरों में दर्शकों के सामने न परखा जाए, तो उसकी वास्तविक प्रासंगिकता का आकलन कभी नहीं हो सकता।
10 लाख की ओपनिंग से 236 करोड़ के वैश्विक मुकाम तक
7 अगस्त 2026 को जब ‘हनुमान अंश’ देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तब उद्योग विश्लेषकों ने इसे लगभग खारिज कर दिया था। शुरुआत में फिल्म को पूरे भारत में महज 25 से 40 स्क्रीन्स पर जगह मिली थी। पहले दिन की कुल कमाई मात्र 10 लाख रुपये रही और शुरुआती दो सप्ताह में फिल्म बमुश्किल 2 करोड़ रुपये के आसपास का व्यापार कर सकी।
लेकिन तीसरे सप्ताह से कहानी में अप्रत्याशित मोड़ आया। दर्शकों की परस्पर अनुशंसा (वर्ड ऑफ माउथ) और सोशल मीडिया पर आम जनता द्वारा साझा की गई प्रतिक्रियाओं ने इसे जन-आंदोलन का रूप दे दिया। फिल्म में शोभिनव सत्या द्वारा निभाया गया नीम करौली बाबा का सौम्य किरदार, विहान शेडगे, चंदन के. आनंद और अनिल रस्तोगी का अभिनय तथा सुनील लोधी द्वारा गाए गए भजनों ने आम परिवारों को सिनेमाघरों की ओर खींच लिया।
तीसरे सप्ताह में 10 करोड़ से अधिक, चौथे सप्ताह में 61 करोड़ और पांचवें सप्ताह में 90 करोड़ रुपये से अधिक की कमाई दर्ज की गई। मल्टीप्लेक्स शृंखलाओं को अन्य बड़ी फिल्मों के शो घटाकर ‘हनुमान अंश’ के लिए 2,000 से अधिक स्क्रीन्स आवंटित करनी पड़ीं। व्यापार ट्रैकर सैकनिल्क के आंकड़ों के अनुसार, रिलीज के 37वें दिन तक घरेलू स्तर पर इसका नेट कलेक्शन 192 करोड़ रुपये तथा वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन 236.50 करोड़ रुपये पार कर चुका है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी फिल्म देखकर इसे राज्य में कर-मुक्त (टैक्स फ्री) घोषित किया।
क्या सचमुच हुई 100 करोड़ की ओटीटी डील? प्रोड्यूसर ने बताया सच
फिल्म की अभूतपूर्व सफलता के बाद इंटरनेट पर यह नैरेटिव फैला कि अब प्रमुख ओटीटी प्लेटफॉर्म्स 100 करोड़ रुपये का प्रस्ताव लेकर निर्माताओं के दरवाजे पर हैं, जबकि निर्माता 150 करोड़ रुपये की मांग कर रहे हैं।
इस विषय पर समाचार माध्यमों से बात करते हुए फिल्म की सह-निर्माता रागिनी सोना ने इन चर्चाओं को पूरी तरह भ्रामक और निराधार अफवाह करार दिया है। रागिनी सोना ने स्पष्ट किया:
"सोशल मीडिया पर जो 100 करोड़ रुपये की ओटीटी डील की बातें चल रही हैं, वे सिर्फ अफवाहें हैं। हमारी टीम को ऐसा कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं मिला है और न ही हम इस समय किसी डिजिटल नंबर गेम में उलझे हैं। हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लाखों लोग सिनेमाघरों में जाकर इस कथा को देख रहे हैं और इसे अपना प्यार दे रहे हैं। फिल्म का सबसे बड़ा प्रचारक खुद दर्शक बन चुका है, जो बाबा नीम करौली का आशीर्वाद ही है।"
अनिवार्य आठ सप्ताह का थियेट्रिकल नियम
व्यापार विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि भारतीय फिल्म उद्योग के नियमों के मुताबिक किसी भी हिंदी फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज होने के न्यूनतम आठ सप्ताह बाद ही किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम किया जा सकता है। चूंकि फिल्म अभी सिनेमाघरों में करोड़ों का दैनिक कारोबार कर रही है और दर्शकों की भीड़ कम नहीं हुई है, इसलिए मेकर्स जल्दबाजी में डिजिटल राइट्स बेचने के पक्ष में नहीं हैं।
यह पूरा घटनाक्रम भारतीय मनोरंजन जगत के लिए एक बड़ा सबक बनकर उभरा है। इसने यह साबित किया है कि एल्गोरिद्म, कॉर्पोरेट रणनीतियों और स्टार-पावर से परे यदि किसी कहानी में सांस्कृतिक प्रामाणिकता, भावुकता और लोक-सरोकार जुड़े हों, तो वह बिना किसी पूर्व-प्रचार या डिजिटल बैकिंग के भी जनमानस के दिल में जगह बना सकती है।
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